ट्रंप की मध्यस्थता से या आपसी समझौते से? भारत-पाकिस्तान के सीमा विवाद पर गरमाई सियासत, शरीफ ने फिर किया धन्यवाद
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने एक बार फिर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को मई में हुए भारत-पाकिस्तान सीमा संघर्ष को सुलझाने में उनकी भूमिका के लिए सार्वजनिक रूप से धन्यवाद दिया है। हालांकि, भारत का रुख लगातार यही रहा है कि इस मामले में किसी तीसरे पक्ष की कोई मध्यस्थता नहीं थी, बल्कि दोनों देशों के बीच आपसी समझौता हुआ था।
शरीफ ने की ट्रंप की प्रशंसा
शनिवार को बाकू में अजरबैजान की ‘विक्ट्री डे परेड’ को संबोधित करते हुए, शहबाज शरीफ ने ट्रंप की “बोल्ड और निर्णायक लीडरशिप” की सराहना की। उनके अनुसार, ट्रंप के हस्तक्षेप से ही पाकिस्तान और भारत के बीच संघर्षविराम संभव हुआ, जिससे न केवल दक्षिण एशिया में शांति बहाल हुई, बल्कि एक बड़े युद्ध को टाला गया और लाखों लोगों की जान बच गई।
यह दावा उसी घटना से जुड़ा है जब 10 मई को ट्रंप ने घोषणा की थी कि वाशिंगटन की मध्यस्थता में चली लंबी बातचीत के बाद दोनों देश पूर्ण और तत्काल संघर्षविराम पर सहमत हुए थे। पाकिस्तान ने कई बार ट्रंप के इस दावे को सराहा है।
भारत ने मध्यस्थता से किया कड़ा इंकार
दूसरी ओर, भारत ने शुरू से ही किसी भी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप से साफ तौर पर इनकार किया है। नई दिल्ली का कहना है कि 10 मई को हुए तनाव को समाप्त करने में किसी बाहरी शक्ति की भूमिका नहीं थी। भारत के अनुसार, चार दिनों तक चले सीमा पार ड्रोन और मिसाइल हमलों के बाद, भारत और पाकिस्तान ने आपसी बातचीत के जरिए ही इस समझौते पर सहमति जताई थी।
पृष्ठभूमि: भारत-पाकिस्तान संघर्ष
यह विवाद 7 मई को भारत द्वारा शुरू किए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से जुड़ा है। यह कार्रवाई 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए उस आतंकी हमले के जवाब में की गई थी, जिसमें 26 आम नागरिक मारे गए थे। भारत ने इस ऑपरेशन के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में मौजूद आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया था।
शरीफ के भाषण में अन्य अहम बातें
अपने संबोधन में, शरीफ ने कश्मीर का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि काराबाख में अजरबैजान की जीत उन सभी देशों के लिए आशा की किरण है जो अत्याचार के खिलाफ लड़ रहे हैं। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि पाकिस्तान शांति चाहता है, लेकिन वह किसी को भी अपनी संप्रभुता को चुनौती देने या क्षेत्रीय अखंडता को कमजोर करने की इजाजत नहीं देगा। खास बात यह रही कि इस परेड में अजरबैजानी सेना के साथ-साथ पाकिस्तान और तुर्की की सैन्य टुकड़ियों ने भी हिस्सा लिया, जिसमें जेएफ-17 थंडर जेट का फ्लाईपास्ट भी शामिल था।
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