दक्षिण एशिया की क्षेत्रीय राजनीति में एक बार फिर हलचल दिखने लगी है। वर्षों से निष्क्रिय पड़े दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय समूह (SAARC) को लेकर नई चर्चाएं तब तेज हुई, जब बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि सार्क की भावना जिंदा है। सवाल यह है कि क्या भारत के बिना सार्क जैसी किसी क्षेत्रीय सोच की कोई प्रासंगिकता बचती है, या यह सिर्फ कूटनीतिक बयानबाजी भर है? दरअसल, बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस ने इस सप्ताह दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (SAARC) मंच को पुनर्जीवित करने पर जोर दिया। उन्होंने भारत, पाकिस्तान और क्षेत्र के अन्य हिस्सों के गणमान्य व्यक्तियों से मुलाकात की थी। सार्क 2016 से ही निष्क्रिय पड़ा है, जब भारत द्वारा पाकिस्तान पर आतंकवादी हमले का आरोप लगाने के बाद इस्लामाबाद शिखर सम्मेलन से हटने के कारण यह सम्मेलन रद्द हो गया था। इस्लामाबाद ने इसमें संलिप्तता से इनकार किया, लेकिन नई दिल्ली के इस फैसले के बाद अफगानिस्तान, बांग्लादेश और भूटान ने भी इससे अपना नाम वापस ले लिया, जिसके परिणामस्वरूप शिखर सम्मेलन अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया। यूनुस ने बुधवार को ढाका में बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के राजकीय अंत्येष्टि समारोह में पाकिस्तान की राष्ट्रीय सभा के अध्यक्ष अयाज सादिक और भारतीय विदेश मंत्री सुब्रह्मण्यम जयशंकर से मुलाकात की। अंत्येष्टि समारोह में भारतीय और पाकिस्तानी प्रतिनिधियों ने हाथ मिलाया। मई में हुए संघर्ष के बाद दोनों देशों के अधिकारियों के बीच यह पहला उच्च स्तरीय संपर्क था।
सार्क या ऐसे किसी क्षेत्रीय संगठन को लेकर उठ रही सुगबुगाहट एकदम से शुरू नहीं हुई है। इस तरह की चर्चाएं उस वक्त भी सामने आई थी, जब जून में चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश ने त्रिपक्षीय बैठक की थी। सार्क समूह में अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, भारत, मालदीव, पाकिस्तान और श्रीलंका शामिल है। अपने शुरुआती वर्षों में इसे दक्षिण एशिया की आवाज की तरह देखा जाता था। 2016 में इसकी मीटिंग इस्लामाबाद में होनी थी, लेकिन उरी हमले के बाद भारत ने इस समिट में शामिल होने से इनकार कर दिया था।
पाकिस्तान का दबाव और बांग्लादेश का साथ
पाकिस्तान सार्क जैसा एक गुट बनाने की कोशिशों में लगा है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार कह चुके हैं कि पाकिस्तान भारत के बगैर एक क्षेत्रीय संगठन बनाना चाहता है। इस साल फरवरी में बांग्लादेश के विदेश मामलों के सलाहकार मोहम्मद तौहीद हुसैन ने ओमान में जयशंकर के साथ हुई बैठक में सार्क का मुद्दा उठाया था।
सार्क जैसा संगठन बनाने की किसी भी त्रिपक्षीय कोशिश करने वाले देश ये जानते हैं कि वैकल्पिक समूह को प्रभावी तरीके से काम करने के लिए ये जरूरी है कि भूटान, नेपाल श्रीलंका, अफगानिस्तान और मालदीव जैसे देशों को सार्क सरीखे किसी समूह में शामिल करना इतना आसान नहीं होगा।
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