अडानी को SEBI की हरी झंडी: हिंडनबर्ग के दावों पर लगा विराम!

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अडानी को SEBI की हरी झंडी: हिंडनबर्ग के दावों पर लगा विराम!
हिंडनबर्ग के आरोपों में दम नहीं..अडानी ग्रुप को SEBI से मिल गई बड़ी राहत

सेबी का अडानी समूह को बड़ी राहत: हिंडनबर्ग के आरोपों पर फैसला, गौतम अडानी बोले – ‘चट्टान की तरह खड़े रहे हम’

बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने हिंडनबर्ग रिसर्च द्वारा अडानी समूह और उसके चेयरमैन गौतम अडानी पर लगाए गए गंभीर आरोपों के मामले में अपना फैसला सुना दिया है। सेबी ने गुरुवार को अपनी वेबसाइट पर जारी दो अलग-अलग आदेशों में स्पष्ट किया कि अडानी समूह ने अपनी सूचीबद्ध कंपनियों में धन भेजने के लिए किसी भी संबंधित पक्ष का दुरुपयोग नहीं किया है। इस फैसले के साथ ही अडानी समूह और गौतम अडानी को हिंडनबर्ग के कुछ अनियमितताओं के आरोपों से बड़ी राहत मिली है।

यह मामला तब गरमाया था जब जनवरी 2023 में हिंडनबर्ग रिसर्च ने अडानी समूह पर कई गंभीर आरोप लगाए थे। हालांकि, अडानी समूह ने इन आरोपों का लगातार खंडन किया था।

‘हर गिरावट के बाद और मज़बूती से उभरे हैं’: गौतम अडानी का आत्मविश्वास

हिंडनबर्ग की रिपोर्ट के बाद उपजे हालातों पर बात करते हुए, अडानी समूह के चेयरमैन गौतम अडानी ने हर चुनौती से मज़बूती से उबरने के महत्व पर ज़ोर दिया था। उन्होंने कहा था, “पिछले कुछ वर्षों में, हमने ऐसे नेताओं का एक समूह तैयार किया है जो बार-बार अज्ञात में कदम रखने का साहस रखते हैं। अभूतपूर्व चुनौतियों का सामना करते हुए भी, यही उनका साहस दूसरों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है। नेतृत्व का यही स्वरूप अडानी समूह की पहचान है।”

अडानी ने विशेष रूप से पिछले साल जनवरी में वित्तीय बाज़ार पर हुए “विदेश से शुरू किए गए शॉर्ट-सेलिंग हमले” का ज़िक्र करते हुए कहा कि यह कोई आम हमला नहीं था। उन्होंने इस हमले को “हमारी वित्तीय स्थिरता को निशाना बनाकर किया गया दोहरा हमला” बताया, जिसने उन्हें “राजनीतिक तूफ़ान” में धकेल दिया था। अडानी के अनुसार, यह हमला “सोची-समझी चाल” थी, जिसे उनके अनुवर्ती सार्वजनिक प्रस्ताव (FPO) के बंद होने से कुछ ही दिन पहले “अधिकतम नुकसान पहुँचाने के लिए” रचा गया था और “निहित स्वार्थों वाले कुछ मीडिया द्वारा इसे और बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया”।

सेबी के फैसले से अटकलों पर विराम

सेबी का यह फैसला अडानी समूह के लिए एक बड़ी जीत माना जा रहा है और हिंडनबर्ग रिपोर्ट के बाद से चल रही अटकलों पर भी विराम लग गया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस फैसले का अडानी समूह के भविष्य और शेयर बाज़ार पर क्या असर पड़ता है।


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