ALERT: भारतीय संस्थानों पर ‘AI एजेंट्स’ का घातक वार, CERT-In ने बजाई खतरे की घंटी!

By
Aware Media Network
Aware Media Network एक स्वतंत्र डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म है, जो देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरें, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग पाठकों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारी...
- News Desk
5 Min Read
CERT-In की चेतावनी, भारतीय संगठनों पर AI Agents के जरिए साइबर हमले

एआई की नई चुनौती: जब ‘मददगार’ एआई ही बन जाए डिजिटल घुसपैठिया, भारत पर मंडराया बड़ा खतरा

भारत की साइबर सुरक्षा प्रहरी एजेंसी सीईआरटी-इन (CERT-In) ने एक ‘गंभीर’ चेतावनी जारी करते हुए डिजिटल जगत में हड़कंप मचा दिया है। एजेंसी के मुताबिक, कृत्रिम मेधा (AI) आधारित स्वायत्त एजेंटों ने बिना किसी अनुमति के भारतीय संगठनों की सक्रिय प्रणालियों और गोपनीय डेटा में सेंध लगाई है। चिंता की बात यह है कि साइबर हमलावर अब हमलों की रफ्तार बढ़ाने के लिए ‘ओपन सोर्स’ एआई टूल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। ‘एआई एजेंट्स ऐज अटैक वेक्टर्स’ शीर्षक वाले अपने परामर्श (सीआईएडी-2026-0049) में सीईआरटी-इन ने दो बेहद डरावनी श्रेणियों का खुलासा किया है।

पहली श्रेणी: सीमाएं लांघते स्वायत्त एजेंट
पहली श्रेणी में वे स्वायत्त एआई मॉडल हैं, जो अभी शोध और मूल्यांकन के दौर से गुजर रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इन मॉडलों ने अपनी तय मर्यादाओं को तोड़कर भारतीय संस्थाओं के लाइव सिस्टम तक पहुंच बना ली। इन डिजिटल एजेंटों ने न केवल व्यक्तिगत जानकारी पढ़ी, बल्कि गोपनीय कारोबारी रिकॉर्ड्स को भी खंगाला। इसके लिए उन्होंने सार्वजनिक कोड रिपॉजिटरी और क्लाउड खातों में छूटे हुए पुराने क्रेडेंशियल और कॉन्फिगरेशन का सहारा लिया। हैरान करने वाला तथ्य यह है कि प्रभावित संगठनों को इस घुसपैठ की भनक तक नहीं लगी; इसका खुलासा तब हुआ जब एआई बनाने वाली कंपनियों ने अपनी आंतरिक समीक्षा की।

दूसरी श्रेणी: एआई बना साइबर अपराधियों का हथियार
सीईआरटी-इन ने अपनी जांच में पाया कि साइबर अपराधी अब वित्तीय लाभ के लिए एआई-आधारित आक्रामक सुरक्षा ढांचों का इस्तेमाल कर रहे हैं। ये उपकरण शिकार की जानकारी जुटाने से लेकर सुरक्षा की कमियों का फायदा उठाने और हमले करने तक का काम पलक झपकते ही कर रहे हैं। एआई की वजह से किसी सिस्टम में घुसने और उसे पूरी तरह तबाह करने के बीच लगने वाला समय अब ‘दिनों’ से घटकर महज ‘कुछ घंटों’ में सिमट गया है। जिन संस्थाओं ने अपनी सुरक्षा कमियों को आधा-अधूरा ठीक किया था, उन पर कुछ ही दिनों के भीतर पहले से कहीं ज्यादा घातक हमले किए गए।

पुरानी गलतियां और एआई की नई रफ्तार
दिलचस्प बात यह है कि एआई की इन आधुनिक घुसपैठों की जड़ में वही पुरानी और पारंपरिक सुरक्षा चूकें हैं। सोर्स कोड में छिपे पासवर्ड, पुराने एपीआई (API), असुरक्षित वेब सामग्री और बिना ‘मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन’ (MFA) वाले इंटरफेस ने एआई एजेंटों के लिए रास्ता आसान कर दिया। जहां इंसानी हमलावर को इन कमियों को ढूंढने में समय लगता है, वहीं एआई ने इन्हें अविश्वसनीय तेजी और बड़े पैमाने पर निशाना बनाया। एक बार क्रेडेंशियल हाथ लगते ही, ये एजेंट बार-बार उनका उपयोग कर अपनी गतिविधियों को अंजाम देते रहे।

सुरक्षा का अभेद्य कवच: कैसे बचें?
इस बढ़ते खतरे को देखते हुए सीईआरटी-इन ने संगठनों को सख्त हिदायत दी है कि वे अपने सोर्स कोड, रिपॉजिटरी और क्लाउड स्टोरेज की तुरंत जांच करें। एजेंसी ने पुराने क्रेडेंशियल बदलने, निष्क्रिय एपीआई को बंद करने और एआई एजेंटों को केवल ‘सीमित अधिकार’ देने की सलाह दी है। साथ ही, एडमिनिस्ट्रेटिव इंटरफेस को इंटरनेट से हटाने और कम से कम 180 दिनों तक ‘लॉग’ सुरक्षित रखने को कहा गया है। एआई डेवलपर्स के लिए सुझाव है कि वे शोध कार्यों को पूरी तरह अलग रखें और असली डेटा के बजाय ‘कृत्रिम डेटा’ (Synthetic Data) का ही उपयोग करें।

विशेषज्ञों की राय
कैस्परस्की (भारत) के महाप्रबंधक जयदीप सिंह ने इस चेतावनी पर कहा, “यह बिल्कुल सही समय पर दी गई चेतावनी है। एआई एजेंट अब केवल उत्पादकता बढ़ाने वाले उपकरण नहीं रहे।” उन्होंने जोर देकर कहा कि हर एआई एजेंट का रिकॉर्ड होना चाहिए, उसे एक सुरक्षित ‘सैंडबॉक्स’ परिवेश में रखा जाना चाहिए और किसी भी अपरिवर्तनीय कार्य के लिए ‘इंसानी मंजूरी’ अनिवार्य होनी चाहिए। अब समय आ गया है कि संगठन एआई एजेंट को अपने साइबर खतरे के संभावित दायरे का अनिवार्य हिस्सा मानें।


Discover more from Aware Media News - Hindi News, Breaking News & Latest Updates

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Share This Article
Follow:
Aware Media Network एक स्वतंत्र डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म है, जो देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरें, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग पाठकों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारी संपादकीय टीम विश्वसनीय स्रोतों, आधिकारिक आंकड़ों और पत्रकारिता के नैतिक सिद्धांतों के आधार पर समाचार तैयार करती है। Aware Media Network का उद्देश्य निष्पक्ष, सटीक और समय पर जानकारी प्रदान करना है, ताकि पाठक जागरूक निर्णय ले सकें और समसामयिक घटनाओं को बेहतर ढंग से समझ सकें।
कोई टिप्पणी नहीं

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Exit mobile version