अब मैसेजिंग ऐप्स का इस्तेमाल सिम से होगा स्थायी रूप से जुड़ा, धोखाधड़ी पर लगेगी लगाम!
नई दिल्ली: साइबर धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों से निपटने के लिए सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। सोमवार को जारी एक नए निर्देश में, मैसेजिंग ऐप्स के इस्तेमाल के लिए ‘सिम-डिवाइस बाइंडिंग’ को अनिवार्य कर दिया गया है। इसका मतलब है कि अब आप अपने फोन में सक्रिय सिम कार्ड से जुड़े बिना इन ऐप्स का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे। सरकार का मानना है कि यह कदम सीमा पार से होने वाली डिजिटल धोखाधड़ी को रोकने में महत्वपूर्ण साबित होगा, जिसका फायदा उठाकर अपराधी बड़े पैमाने पर लोगों को चूना लगा रहे हैं।
22,800 करोड़ रुपये के पार पहुंचा साइबर धोखाधड़ी का आंकड़ा!
सरकार ने चिंता जताई है कि 2024 में ही साइबर धोखाधड़ी से होने वाले नुकसान का अनुमान 22,800 करोड़ रुपये से अधिक लगाया गया है। ऐसे में, इस नई सुरक्षा प्रणाली को लागू करना अत्यंत आवश्यक हो गया है।
क्या है ‘सिम बाइंडिंग’ और कैसे करेगा काम?
‘सिम बाइंडिंग’ एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें आपका मैसेजिंग ऐप यह सुनिश्चित करता है कि आपके डिवाइस में पंजीकृत सिम कार्ड सक्रिय और चालू हालत में है। यदि आप सिम को हटाते हैं, बदलते हैं या वह निष्क्रिय हो जाता है, तो ऐप काम करना बंद कर देगा।
रोमिंग पर हैं तो चिंता न करें!
संचार मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह निर्देश उन मामलों पर लागू नहीं होगा जहां सिम कार्ड हैंडसेट में मौजूद है और उपयोगकर्ता रोमिंग पर है।
सुरक्षा में एक मजबूत कड़ी
मंत्रालय का कहना है कि ‘सिम बाइंडिंग’ निर्देश एक गंभीर सुरक्षा खामी को दूर करने के लिए उठाया गया कदम है। वर्तमान में, कई बार सिम कार्ड को हटाए जाने, निष्क्रिय किए जाने या विदेश ले जाए जाने के बाद भी इंस्टेंट मैसेजिंग और कॉलिंग ऐप पर अकाउंट सक्रिय रहते हैं। इससे गुमनाम तरीके से घोटाले, दूर बैठे अपराधियों द्वारा डिजिटल धोखाधड़ी और भारतीय नंबरों का इस्तेमाल कर सरकारी पहचान छिपाना संभव हो जाता है।
डिजिटल भारत में नागरिकों के विश्वास की रक्षा
दूरसंचार विभाग के नियमों के तहत, ये निर्देश दूरसंचार पहचानकर्ताओं के दुरुपयोग को रोकने, पता लगाने की क्षमता सुनिश्चित करने और भारत के डिजिटल परिवेश में नागरिकों के विश्वास की रक्षा करने के लिए एक आवश्यक उपाय हैं।
बैंकिंग ऐप्स की तरह अब मैसेजिंग ऐप्स भी होंगे सुरक्षित
बैंकिंग और भुगतान ऐप में ‘डिवाइस बाइंडिंग’ और स्वचालित सत्र ‘लॉगआउट’ की सुविधा पहले से ही व्यापक रूप से उपयोग की जाती है ताकि किसी भी अनधिकृत डिवाइस से खातों में सेंधमारी या दुरुपयोग को रोका जा सके। अब इसी उद्देश्य से इस सुरक्षा प्रणाली को ऐप-आधारित संचार मंचों तक बढ़ाया गया है, जो आज के समय में ‘साइबर धोखाधड़ी के केंद्र’ बन गए हैं।
व्हाट्सएप, सिग्नल, टेलीग्राम भी दायरे में
पिछले सप्ताह ही, सरकार ने व्हाट्सएप, सिग्नल, टेलीग्राम जैसे ऐप-आधारित संचार सेवाओं के लिए यह सुनिश्चित करने हेतु निर्देश जारी किए थे कि ये सेवाएं उपयोगकर्ता के सक्रिय सिम कार्ड से लगातार जुड़ी रहें।
Discover more from Aware Media News - Hindi News, Breaking News & Latest Updates
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
