जीएसटी की रफ्तार में थमी, फिर भी खपत का दम बरकरार
नवंबर महीने में माल एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह में सालाना आधार पर मात्र 0.7 प्रतिशत की मामूली बढ़त देखी गई, जो पिछले एक साल का सबसे निचला स्तर है। कुल 1.70 लाख करोड़ रुपये का संग्रह, जहां एक ओर चिंता का विषय हो सकता है, वहीं दूसरी ओर यह खपत में निरंतर जारी सुधार की ओर इशारा करता है। यह जानकारी सोमवार को जारी सरकारी आंकड़ों से सामने आई है।
यह उल्लेखनीय है कि सितंबर में सरकार ने जीएसटी की पांच और 18 प्रतिशत की केवल दो मुख्य कर दरें लागू की थीं, हालांकि विलासिता और हानिकारक वस्तुओं के लिए 40 प्रतिशत की विशेष दर भी तय की गई है। इन कर दरों में कटौती और त्योहारी मौसम में हुई जबरदस्त खरीदारी ने अक्टूबर में जीएसटी संग्रह को बढ़ाया था। ऐसे में, नवंबर के आंकड़े संकेत देते हैं कि त्योहारी सीजन के समाप्त होने के बावजूद खपत में तेजी बनी हुई है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, नवंबर में कुल जीएसटी संग्रह (बिना उपकर के) 1.70 लाख करोड़ रुपये था, जो पिछले साल के समान महीने के 1.69 लाख करोड़ रुपये से थोड़ा अधिक है। हालांकि, यह अक्टूबर के 1.96 लाख करोड़ रुपये के संग्रह से काफी कम है, जिसमें क्षतिपूर्ति उपकर भी शामिल थे। उपकर को शामिल करने पर नवंबर का कुल कर संग्रह 1.74 लाख करोड़ रुपये रहा, जो नवंबर, 2024 के 1.82 लाख करोड़ रुपये से 4.22 प्रतिशत कम है। जीएसटी की नई व्यवस्था के तहत, क्षतिपूर्ति उपकर अब केवल तंबाकू और पान मसाला उत्पादों पर लागू होता है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, नवंबर के जीएसटी संग्रह की गणना में उपकर को शामिल नहीं किया गया था। एक सूत्र ने बताया कि कंपनियों द्वारा दाखिल जीएसटी रिटर्न में कर-योग्य आपूर्ति का मूल्य सालाना आधार पर बढ़ने से एक सकारात्मक संकेत मिलता है। “बढ़ी हुई खपत दर्शाती है कि जीएसटी कटौती का असर सकारात्मक है। इसी वजह से हमें भरोसा है कि यह कर सुधार न केवल वर्तमान में टिकाऊ रहेगा, बल्कि आने वाले समय में भी इसका अर्थव्यवस्था पर कई गुना बड़ा सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा,” सूत्र ने जोड़ा।
नवंबर में घरेलू राजस्व 2.3 प्रतिशत घटकर 1.24 लाख करोड़ रुपये रहा, जबकि आयात से राजस्व 10.2 प्रतिशत बढ़कर 45,976 करोड़ रुपये हो गया। इस अवधि में रिफंड में चार प्रतिशत की गिरावट के साथ 18,196 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। रिफंड को समायोजित करने के बाद, शुद्ध जीएसटी संग्रह 1.52 लाख करोड़ रुपये रहा, जो सालाना आधार पर 1.3 प्रतिशत अधिक है।
रेटिंग एजेंसी इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने संभावना जताई है कि अधिकांश उत्पादों पर कर दरों में कटौती के प्रभाव को खपत में वृद्धि द्वारा निष्प्रभावी किया जा सकता है। उन्होंने कहा, “ऐसा प्रतीत होता है कि चालू वित्त वर्ष में कर संग्रह बजट अनुमान से कम रहेगा। हालांकि, सरकार को अपेक्षा से अधिक गैर-कर राजस्व प्राप्त होने की संभावना है, जो इस कमी के एक हिस्से की भरपाई कर देगा।”
डेलॉयट इंडिया के साझेदार एम. एस. मणि ने विभिन्न राज्यों में कर संग्रह में व्यापक अंतर पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “ऐसे में, यह महत्वपूर्ण है कि अलग-अलग क्षेत्रों के कारणों का विश्लेषण किया जाए, ताकि गिरावट के कारणों को समझा जा सके और जीएसटी वसूली बढ़ाने के लिए उपयुक्त नीतिगत कदम उठाए जा सकें।”
कर विशेषज्ञ विवेक जालान ने जीएसटी संग्रह में कमजोरी के लिए खपत में उतनी वृद्धि न होने, कर दरों में कमी और रिफंड में वृद्धि जैसे कारकों को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने जोर देकर कहा, “ऐसे में, वित्त वर्ष के शेष महीनों में खपत बढ़ाना आवश्यक होगा।”
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