**’मिठाई की दुकान में रहकर भूखा क्यों रहूं?’ गोविंदा का सनसनीखेज खुलासा—अफेयर्स को बताया ‘प्रेम’, बेवफाई पर दिया चौंकाने वाला तर्क**
बॉलीवुड के ‘हीरो नंबर 1’ गोविंदा एक बार फिर अपनी बेबाकी के कारण सुर्खियों के केंद्र में हैं। 62 वर्षीय अभिनेता ने हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान अपनी निजी जिंदगी, पर्दे के पीछे की केमिस्ट्री और शादी के बाद वफादारी जैसे संवेदनशील मुद्दों पर ऐसी बातें कहीं, जिन्होंने सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है। जब उनसे कथित अफेयर्स को लेकर तीखा सवाल पूछा गया, तो गोविंदा ने इसे ‘धोखा’ मानने से साफ इनकार कर दिया। उन्होंने अपने पुराने दिनों को याद करते हुए बताया कि वह 33-34 साल की उम्र तक खुद को बेहद ‘शरीफ’ समझते थे, लेकिन इसके बाद उन्होंने जो उदाहरण दिया, उसने सबका ध्यान खींच लिया।
गोविंदा ने चुटीले अंदाज में कहा, “अगर आप मिठाई की दुकान में हैं और वहां से भूखे ही बाहर निकल गए, तो इससे ज्यादा दुखद और क्या होगा?” इस बयान ने न केवल वहां मौजूद लोगों को ठहाके लगाने पर मजबूर किया, बल्कि उनके पुराने रिश्तों की चर्चाओं को फिर से हवा दे दी। उन्होंने स्वीकार किया कि वह अपनी जिंदगी के एक लंबे दौर तक बहुत सीधे-सादे रहे। गोविंदा ने कहा, “मैं 33-34 की उम्र तक इतना शरीफ रहा हूं कि आज मुझे खुद पर शर्म आती है कि मैं इतना ज्यादा शरीफ क्यों था?” जब उनसे पूछा गया कि उस उम्र के बाद ऐसा क्या बदला, तो उन्होंने फिर से वही ‘मिठाई की दुकान’ वाली मिसाल दोहराई। दिलचस्प बात यह रही कि उन्होंने इसे अपनी पत्नी से ‘बेवफाई’ मानने से इनकार कर दिया। उनका तर्क था, “वह बेईमानी नहीं, बल्कि प्रेम है।” यानी गोविंदा अपने पुराने आकर्षणों को ‘चीटिंग’ के बजाय ‘प्रेम’ के चश्मे से देखते हैं।
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अभिनेता ने माना कि रिश्तों और पारिवारिक ताने-बाने की जटिलताओं को समझने में उन्हें काफी समय लगा। उनके अनुसार, पुरुष अक्सर अनजाने में ऐसे फैसले ले लेते हैं जिनका गहरा अर्थ उन्हें बाद में समझ आता है, जबकि महिलाएं अक्सर परिवार को ध्यान में रखकर कदम उठाती हैं। गोविंदा ने स्वीकार किया कि 21 से 34 साल की उम्र के बीच उन्हें खुद इस बात का अहसास नहीं था कि उनके आसपास के रिश्तों का स्वरूप क्या है। आज वह अपने शुरुआती करियर और उन अनुभवों को एक बिल्कुल अलग और परिपक्व नजरिए से देखते हैं।
गोविंदा के स्टारडम और उनकी हीरोइनों के साथ उनकी जादुई केमिस्ट्री का जिक्र किए बिना उनकी कहानी अधूरी है। 90 के दशक में रवीना टंडन जैसी अभिनेत्रियों के साथ उनकी जोड़ी ने बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचाया था। अभिनेता ने खुलासा किया कि वह जानबूझकर अपनी लीडिंग लेडी के साथ एक गहरा ‘रोमांटिक कनेक्शन’ बनाने की कोशिश करते थे, क्योंकि उनका मानना था कि पर्दे पर केमिस्ट्री तभी दिखती है जब कलाकारों के बीच असली जुड़ाव हो। जब उनसे शूटिंग के बाहर की ‘रासलीला’ और हीरोइनों से मिलने-जुलने पर सवाल हुआ, तो उन्होंने हंसकर कहा कि पैक-अप के बाद उनके पास इतना समय ही नहीं बचता था कि वह निजी तौर पर मिल सकें।
स्क्रीन केमिस्ट्री पर बात करते हुए उन्होंने दावा किया कि उनकी फिल्मों में दिखने वाला प्यार महज एक्टिंग नहीं था। उन्होंने कहा, “प्रेम तो असली ही हुआ करता है।” गोविंदा ने यह भी कहा कि उनकी महिला को-स्टार्स जब उनके साथ काम करने के अनुभव साझा करती हैं, तो वे काफी भावुक हो जाती हैं। उन्होंने इसे ‘प्यार के आंसुओं’ से जोड़ते हुए कहा कि ऐसी भावनाओं को खरीदा नहीं जा सकता। साथ ही, उन्होंने यह स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी किसी सह-कलाकार पर दबाव नहीं बनाया। उनके लिए सेट का माहौल ऐसा रखना जरूरी था जहां हीरोइनें सहज महसूस करें और उनका मूड खराब न हो। व्यस्त शेड्यूल के कारण वह अक्सर काम खत्म होते ही घर की ओर रुख करते थे।
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इंटरव्यू में रवीना टंडन के उस चर्चित बयान का भी जिक्र आया, जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर सुनीता आहूजा (गोविंदा की पत्नी) नहीं होतीं, तो वह गोविंदा से शादी कर लेतीं। ‘दूल्हे राजा’ और ‘आंटी नंबर 1’ जैसी फिल्मों में साथ काम करने वाली रवीना के इस बयान पर गोविंदा ने बेहद मजाकिया प्रतिक्रिया दी। इसके बाद उन्होंने अपनी मां और पत्नी सुनीता से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा सुनाया। उन्होंने बताया कि जब भी सुनीता उनसे कोई शिकायत करती थीं, तो उनकी मां उन्हें यह कहकर समझाती थीं कि सुनीता की वजह से ही गोविंदा कई अन्य हीरोइनों से दूर रहते हैं और सीधे घर चले आते हैं।
गोविंदा और सुनीता की शादीशुदा जिंदगी हमेशा से चर्चा का विषय रही है। हालांकि उनके अफेयर्स की खबरें आती रहीं, लेकिन गोविंदा ने इस इंटरव्यू में उन सभी चर्चाओं को अपने अनोखे नजरिए से परिभाषित किया। उन्होंने शादी और वफादारी के पारंपरिक ढांचे पर सवाल उठाते हुए कहा कि केवल शादीशुदा होना इस बात की गारंटी नहीं है कि इंसान हमेशा वफादार रहेगा। हालांकि उन्होंने बेवफाई की बात सीधे तौर पर नहीं मानी, लेकिन ‘आकर्षण’ और ‘प्रेम’ को लेकर अपनी एक अलग परिभाषा जरूर सामने रखी।
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90 के दशक के चुलबुले और रोमांटिक हीरो गोविंदा आज जब पीछे मुड़कर देखते हैं, तो उनकी बातें केवल फिल्मों तक सीमित नहीं रहतीं। उन्होंने अपने करियर के साथ-साथ उन निजी संबंधों की भी झलक दी है, जो लंबे समय से गॉसिप का हिस्सा रहे हैं। यही कारण है कि उनका यह हल्का-फुल्का इंटरव्यू भी अब उनकी निजी जिंदगी के पुराने पन्नों को पलटने का जरिया बन गया है।
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