भारत-ईयू साझेदारी: असीमित संभावनाओं और रणनीतिक विश्वास का एक नया सुनहरा अध्याय
नई दिल्ली: भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच का रिश्ता अब केवल कूटनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक असीमित, महत्वाकांक्षी और भविष्योन्मुखी साझेदारी में बदल चुका है। यूरोपीय संघ के राजदूत हर्वे डेल्फिन ने संबंधों की इस नई गहराई को रेखांकित करते हुए कहा कि दोनों पक्षों ने आपसी तालमेल को एक ऐसे गुणात्मक और रणनीतिक स्तर पर पहुंचा दिया है, जो पहले कभी नहीं देखा गया।
एक विशेष कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डेल्फिन ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के वैश्विक संदेश—“यह युद्ध का युग नहीं है”—का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत का यह रुख यूरोप के बुनियादी मूल्यों और उसकी पहचान के साथ गहराई से मेल खाता है। करीब साढ़े तीन महीने पहले हुए भारत-ईयू शिखर सम्मेलन को एक ‘ऐतिहासिक मील का पत्थर’ बताते हुए उन्होंने कहा कि इसमें प्रतीकात्मकता और सार्थकता का जो संगम दिखा, उसके परिणाम बेहद दूरगामी होंगे।
राजदूत डेल्फिन के अनुसार, “हमने अपने संबंधों को पूरी तरह से नए धरातल पर खड़ा किया है। यह प्रगति दोनों पक्षों के नेतृत्व के बीच अटूट राजनीतिक विश्वास और प्रतिबद्धता के बिना संभव नहीं थी।” उन्होंने शिखर सम्मेलन की प्रमुख उपलब्धियों को गिनाते हुए अगले पांच वर्षों के ‘संयुक्त रणनीतिक एजेंडे’, महत्वाकांक्षी ‘मुक्त व्यापार समझौते’ (FTA) की वार्ता, सुरक्षा एवं रक्षा साझेदारी और आवागमन के व्यापक ढांचे को अंतिम रूप देने पर जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत और ईयू वैश्विक स्थिरता और समृद्धि के लिए एक-दूसरे के सबसे भरोसेमंद साथी हैं।
आर्थिक मोर्चे पर, दोनों देशों के बीच होने वाले मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को “सभी व्यापारिक सौदों की जननी” के रूप में देखा जा रहा है। राजदूत ने विश्वास जताया कि इस समझौते के लागू होने के बाद द्विपक्षीय व्यापार अगले कुछ वर्षों में दोगुना हो जाएगा। वर्तमान में ईयू वस्तुओं के व्यापार में भारत का सबसे बड़ा साझेदार है, जिसका वित्त वर्ष 2024-25 में कुल वस्तु व्यापार लगभग 136 अरब डॉलर रहा।
आंकड़ों की मजबूती को दर्शाते हुए उन्होंने बताया कि लगभग 6,000 यूरोपीय कंपनियां वर्तमान में भारत में सक्रिय हैं, जो करीब 60 लाख लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा कर रही हैं। अंत में, रूस-यूक्रेन युद्ध से होने वाली मानवीय और आर्थिक क्षति पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने फिर दोहराया कि शांति के लिए पीएम मोदी का विजन ही आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है और यही यूरोप की भी विचारधारा है।
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