आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26: वैश्विक चुनौतियों के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था की ‘दमदार’ साख, जानें क्या कहते हैं आंकड़े
केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को संसद के पटल पर ‘आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26’ पेश किया, जो भारतीय अर्थव्यवस्था की बढ़ती ताकत और वैश्विक मंच पर उसके दृढ़ कदमों की कहानी बयां करता है। सर्वेक्षण के मुताबिक, भारत का बाह्य क्षेत्र (External Sector) आज पहले से कहीं अधिक मजबूत है। मजबूत निर्यात, लचीले सेवा व्यापार और विस्तृत व्यापार नेटवर्क के दम पर भारत ने वैश्विक एकीकरण में अपनी पैठ गहरी की है। यह न केवल हमारी बढ़ती प्रतिस्पर्धात्मकता को दर्शाता है, बल्कि बदलती वैश्विक मांग के अनुरूप खुद को ढालने की भारत की अद्भुत क्षमता का भी प्रमाण है।
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देश की चालू खाता संरचना (Current Account Structure) में एक सकारात्मक संतुलन दिखाई दे रहा है, जहां सेवाओं और निजी हस्तांतरणों में बढ़ते अधिशेष (Surplus) ने माल व्यापार घाटे को बखूबी संभाला है। आंकड़ों पर गौर करें तो वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही में चालू खाता घाटा (CAD) सिमटकर महज 15 अरब अमेरिकी डॉलर (जीडीपी का 0.8 प्रतिशत) रह गया है। यह पिछले वित्त वर्ष (2025) की समान अवधि के 25.3 अरब डॉलर (जीडीपी का 1.3 प्रतिशत) के मुकाबले एक बड़ी सुधार गाथा है।
खास बात यह है कि वित्त वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही में भारत की आर्थिक स्थिति न्यूजीलैंड, ब्राजील, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और कनाडा जैसे विकसित देशों की तुलना में काफी बेहतर रही। आर्थिक सर्वेक्षण इस बात पर भी मुहर लगाता है कि भारत दुनिया में प्रेषण (Remittance) प्राप्त करने वाला सबसे बड़ा देश बना हुआ है। वित्त वर्ष 2025 में यह प्रवाह 135.4 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, जिसने विदेशी मुद्रा भंडार को स्थिरता प्रदान की। प्रेषण में स्किल्ड और प्रोफेशनल भारतीय श्रमिकों का बढ़ता योगदान साफ तौर पर वैश्विक बाजार में भारत की प्रतिभा का लोहा मनवा रहा है।
वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद, भारत निवेशकों के लिए पसंदीदा ठिकाना बना हुआ है। वित्त वर्ष 2025 में भारत ने सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 18.5 प्रतिशत सकल निवेश आकर्षित किया। UNCTAD के आंकड़े बताते हैं कि प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के मामले में भारत ने न केवल दक्षिण एशिया में अपना शीर्ष स्थान बरकरार रखा है, बल्कि इंडोनेशिया और वियतनाम जैसे प्रतिस्पर्धी देशों को भी पीछे छोड़ दिया है।
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वर्ष 2024 में ‘ग्रीनफील्ड निवेश’ की घोषणाओं में भारत दुनिया में चौथे स्थान पर रहा, जिसमें 1,000 से अधिक महत्वपूर्ण परियोजनाएं शामिल हैं। इतना ही नहीं, 2020-24 के बीच भारत 114 अरब डॉलर के निवेश के साथ ‘ग्रीनफील्ड डिजिटल निवेश’ के लिए दुनिया का सबसे बड़ा गंतव्य बनकर उभरा है। अप्रैल-नवंबर 2025 के दौरान सकल एफडीआई प्रवाह बढ़कर 64.7 अरब डॉलर हो गया, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि में 55.8 अरब डॉलर था। यह उछाल वैश्विक सुस्ती के बीच भारतीय डिजिटल अर्थव्यवस्था की मजबूती और विदेशी निवेशकों के अटूट विश्वास का प्रतीक है।
वहीं, विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) के पैटर्न में उतार-चढ़ाव के बावजूद भारतीय बाजार की चमक फीकी नहीं पड़ी है। हालांकि वैश्विक वित्तीय परिवर्तनों के कारण एफपीआई प्रवाह में अस्थिरता रही, लेकिन लंबी अवधि के लिए विदेशी निवेशकों का नजरिया भारत के प्रति बेहद सकारात्मक बना हुआ है। अल्पकालिक निवेश भले ही उच्च मूल्यांकन और वैश्विक अनिश्चितता से प्रभावित हों, लेकिन आवक की तीव्र वापसी यह स्पष्ट करती है कि दुनिया भारत की विकास यात्रा में साझीदार बनने के लिए उत्सुक है।
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