भारत-रूस शिखर बैठक: द्विपक्षीय संबंधों को नई उड़ान, निवेश और व्यापार में मजबूती की ओर
नई दिल्ली: भारत और रूस ने शुक्रवार को अपने अधिकारियों को निवेश संवर्धन एवं संरक्षण पर आपसी लाभकारी समझौते की दिशा में बातचीत में तेजी लाने का स्पष्ट निर्देश दिया। यह महत्वपूर्ण निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत की राजकीय यात्रा पर आए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच नई दिल्ली में आयोजित शिखर बैठक के दौरान लिया गया। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय व्यापार को संतुलित और टिकाऊ बनाने के साथ-साथ ऊर्जा क्षेत्र में मौजूदा और भविष्य के सहयोग पर भी गहन विचार-विमर्श किया।
बैठक के उपरांत जारी किए गए संयुक्त बयान में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि दोनों नेताओं ने भारत और यूरेशियाई आर्थिक संघ (ईएईयू) के बीच मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को लेकर जारी प्रयासों की सराहना की और इसे और गति देने पर सहमति जताई। संयुक्त बयान में स्पष्ट रूप से कहा गया, “उन्होंने दोनों पक्षों को निवेश संवर्धन एवं संरक्षण पर परस्पर लाभकारी समझौते के लिए प्रयास तेज करने का भी निर्देश दिया।”
यह उल्लेखनीय है कि भारत और ईएईयू ने हाल ही में नई दिल्ली में मुक्त व्यापार समझौते को लेकर बातचीत का पहला दौर संपन्न किया था। भारत और रूस, आर्मेनिया, बेलारूस, कजाकिस्तान और किर्गिस्तान जैसे पांच देशों वाले इस समूह ने 20 अगस्त को इस समझौते के लिए संदर्भ शर्तों पर हस्ताक्षर किए थे।
संयुक्त बयान के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन ने भारत से रूस को निर्यात बढ़ाकर द्विपक्षीय व्यापार को संतुलित और टिकाऊ ढंग से बढ़ाने के लक्ष्य पर एकमत व्यक्त किया। इस दिशा में, दोनों पक्षों ने शुल्क और गैर-शुल्क व्यापार बाधाओं को दूर करने, लॉजिस्टिक संबंधी अड़चनों को समाप्त करने, संपर्क बढ़ाने, भुगतान व्यवस्था को सुगम बनाने और बीमा-पुनर्बीमा के मुद्दों का परस्पर स्वीकार्य समाधान खोजने पर जोर दिया।
बयान में इस बात की भी पुष्टि की गई, “रूस और भारत ने बिना बाधा द्विपक्षीय व्यापार की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय मुद्राओं के उपयोग से निपटान प्रणालियों को संयुक्त रूप से विकसित करना जारी रखने पर सहमति जताई है।”
ऊर्जा क्षेत्र में व्यापक सहयोग को दोनों देशों ने अपनी विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बताया। दोनों देशों ने तेल एवं तेल उत्पाद, तेल शोधन एवं पेट्रोकेमिकल तकनीक, तेल क्षेत्र सेवाएं, अपस्ट्रीम तकनीक और संबंधित बुनियादी ढांचा, एलएनजी और एलपीजी से जुड़ा बुनियादी ढांचा जैसे विभिन्न क्षेत्रों में भारतीय और रूसी कंपनियों के बीच मौजूदा एवं संभावित सहयोग के महत्व को स्वीकार किया। यह बैठक भारत और रूस के बीच आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई है।
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