भारत-अमेरिका व्यापार डील: ‘अच्छी खबर’ का इंतजार, किसानों के हितों पर जोर
नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने उम्मीद जताई है कि जल्द ही ‘अच्छी खबर’ सुनाई देगी, बशर्ते यह समझौता निष्पक्ष, न्यायसंगत और संतुलित हो। यह जानकारी पीटीआई की एक रिपोर्ट में सामने आई है।
मार्च से चल रही इस व्यापार वार्ता के अब तक छह दौर पूरे हो चुके हैं, लेकिन कई मोर्चों पर गतिरोध बना हुआ है। अमेरिका की ओर से भारत के कृषि, डेयरी और आनुवंशिक रूप से संशोधित (जीएम) फसलों तक पहुंच की मांग को लेकर ये बाधाएं उत्पन्न हो रही हैं।
किसानों और मछुआरों के हित सर्वोपरि
इंडो-अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स द्वारा आयोजित भारत-अमेरिका आर्थिक शिखर सम्मेलन में बोलते हुए, गोयल ने स्पष्ट किया कि भारत किसी भी समझौते में अपने किसानों और मछुआरों के हितों को प्राथमिकता देगा। उन्होंने कहा, "व्यापार समझौते के लिए बातचीत एक प्रक्रिया है और एक राष्ट्र के रूप में भारत को किसानों, मछुआरों और लघु उद्योगों के हितों को देखना होगा।" उन्होंने दोहराया, "जब समझौता उचित, समानता वाला और संतुलित हो जाएगा, तो आपको अच्छी खबर सुनने को मिल जाएगी।"
एलपीजी सौदे से बढ़ी गर्माहट
यह बयान ऐसे समय में आया है जब एक दिन पहले ही केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने घोषणा की थी कि भारतीय सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों – आईओसी, बीपीसीएल और एचपीसीएल – ने अमेरिका से तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) आयात करने के लिए एक साल के समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब रूस से तेल आयात पर भारत की निर्भरता एक अन्य मुद्दा रही है, जिसके चलते पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाया था, जिससे कुल टैरिफ 50% हो गया था।
रुकावटों के बीच नई राह?
इन व्यापार वार्ताओं में अमेरिकी मांगें और भारत की अपनी घरेलू चिंताओं के बीच एक संतुलन साधने का प्रयास जारी है। एलपीजी सौदे जैसी नई घोषणाएं दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों में एक नई दिशा का संकेत दे सकती हैं, भले ही व्यापार समझौते की राह अभी भी कूटनीतिक और आर्थिक दांव-पेच से भरी हो।
(स्रोत: पीटीआई)
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