रुपये को अंतरराष्ट्रीय मंच पर मजबूती: आरबीआई के नए कदम
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, सीमा पार व्यापार में भारतीय रुपये (आईएनआर) के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए कई उपायों की घोषणा की है। इन पहलों का उद्देश्य भारत की वित्तीय संप्रभुता को मजबूत करना और अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता को कम करना है।
क्या हैं नए उपाय?
- भूटान, नेपाल और श्रीलंका को ऋण सुविधा: अब भारतीय बैंक भूटान, नेपाल और श्रीलंका के गैर-निवासियों को द्विपक्षीय व्यापार लेनदेन के लिए भारतीय रुपये में ऋण दे सकेंगे। यह इन देशों के साथ व्यापार को और अधिक सुगम बनाएगा।
- पारदर्शी संदर्भ दरें: आरबीआई प्रमुख व्यापारिक भागीदारों की मुद्राओं के लिए पारदर्शी संदर्भ दरें स्थापित करने का प्रस्ताव रखा है, जिससे भारतीय रुपया-आधारित लेनदेन को और अधिक सुविधा मिलेगी।
- विशेष रुपया वास्ट्रो खाता (एसआरवीए) का विस्तार: कॉरपोरेट बॉन्ड और वाणिज्यिक पत्रों में निवेश की अनुमति देकर एसआरवीए शेष राशि के उपयोग को व्यापक बनाया गया है। एसआरवीए खाता विदेशी बैंकों को भारतीय बैंकों के साथ खोलकर सीधे भारतीय रुपये में अंतरराष्ट्रीय व्यापार के निपटान की सुविधा प्रदान करता है।
इन उपायों के क्या हैं फायदे?
इन उपायों से कई महत्वपूर्ण लाभ मिलने की उम्मीद है:
- डॉलर पर निर्भरता में कमी: ये कदम अमेरिकी डॉलर पर भारत की निर्भरता को कम करेंगे, जिससे अर्थव्यवस्था को अप्रत्याशित विनिमय दर में उतार-चढ़ाव और मुद्रा संकट से बचाया जा सकेगा।
- विनिमय दर स्थिरता: विदेशी मुद्रा पर निर्भरता कम होने से विनिमय दरों में स्थिरता आएगी।
- चालू खाता घाटे पर नियंत्रण: ये पहल चालू खाता घाटे को एक आरामदायक स्तर पर बनाए रखने में मदद करेंगी।
- आर्थिक मजबूती: आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने विश्वास जताया कि भारत का बाह्य क्षेत्र मजबूत बना हुआ है और केंद्रीय बैंक बाह्य दायित्वों को आसानी से पूरा करने में सक्षम है। वे रुपये की गतिविधियों पर कड़ी नजर रख रहे हैं और आवश्यकतानुसार उचित कार्रवाई करेंगे।
आर्थिक वृद्धि और मुद्रास्फीति के अनुमान में सुधार
इन उपायों के अलावा, आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष 2025-26 के लिए अपने वृद्धि अनुमान को 6.8 प्रतिशत कर दिया है, जो पहले 6.5 प्रतिशत था। वहीं, मुद्रास्फीति के अनुमान को घटाकर 2.6 प्रतिशत कर दिया गया है, जो पहले 3.1 प्रतिशत था। यह सुधार सामान्य से बेहतर मानसून और जीएसटी दरों के युक्तिसंगत होने की उम्मीदों पर आधारित है।
आरबीआई गवर्नर ने कहा कि वैश्विक आर्थिक परिदृश्य के तेजी से बदलने के बावजूद, घरेलू मोर्चे पर महत्वपूर्ण घटनाक्रमों ने भारत की वृद्धि-मुद्रास्फीति की स्थिति को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण को मजबूत किया है। अच्छे मानसून और जीएसटी दरों के युक्तिसंगत होने से न केवल मुद्रास्फीति पर नरमी का प्रभाव पड़ेगा, बल्कि उपभोग और आर्थिक वृद्धि को भी बढ़ावा मिलेगा। हालांकि, अमेरिकी शुल्कों के कारण निर्यात में थोड़ी नरमी की उम्मीद है।
यह स्पष्ट है कि आरबीआई भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और उसे वैश्विक वित्तीय परिदृश्य में अधिक लचीला बनाने के लिए सक्रिय रूप से कदम उठा रहा है।
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