10% से अधिक की विकास दर: ‘विकसित भारत’ के संकल्प को सिद्ध करेगा तकनीक और नवाचार
बेंगलुरु: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को भारत की आर्थिक संभावनाओं पर एक बुलंद और अटूट भरोसा जताया। आईआईटी मद्रास पूर्व छात्र संघ (IIT Madras Alumni Association) द्वारा आयोजित एक विशेष परिचर्चा में उन्होंने बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि भारत के लिए 10 प्रतिशत से अधिक की आर्थिक वृद्धि दर हासिल करना पूरी तरह मुमकिन है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल उत्साह बढ़ाने वाला बयान नहीं, बल्कि एक यथार्थवादी लक्ष्य है, जिसे सामूहिक प्रयासों से प्राप्त किया जा सकता है।
वित्त मंत्री ने जोर देकर कहा कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ से ‘विकसित भारत’ तक का सफर तय करने के लिए हमें हर क्षेत्र में अत्याधुनिक तकनीक और नवाचार (Innovation) को अपनाना होगा। उन्होंने 2015 के बाद से देश में पनपे स्टार्टअप्स के उभार की सराहना करते हुए कहा कि आने वाले समय में ये स्टार्टअप्स भारतीय अर्थव्यवस्था के सबसे मजबूत स्तंभ साबित होंगे।
नकारात्मकता को पीछे छोड़, सकारात्मकता की ओर बढ़े देश
सीतारमण ने उन लोगों को भी कड़ा संदेश दिया जो भारत की प्रगति को लेकर संशय में रहते हैं। उन्होंने कहा, “हमारे यहां नकारात्मक बातें करने वालों की कमी नहीं है। कुछ लोग भारत की विफलता में परोक्ष खुशी ढूंढते हैं, लेकिन हम ऐसी सोच को कतई बर्दाश्त नहीं कर सकते। हमें ऐसे लोगों को सकारात्मक सोचने और देश की प्रगति का हिस्सा बनने के लिए प्रेरित करना होगा।”
खेतों में तकनीक का कमाल: ड्रोन से लेकर स्मार्ट खाद वितरण तक
कृषि क्षेत्र में हो रहे बदलावों का जिक्र करते हुए वित्त मंत्री ने बताया कि कैसे तकनीक ने उत्पादकता और बाजार के बीच की दूरी को खत्म कर दिया है। उन्होंने फसल कटाई और जमीन की तैयारी में तकनीकी हस्तक्षेप का उदाहरण दिया। विशेष रूप से, ड्रोन के जरिए भूखंडों के सटीक मानचित्रण (Mapping) की उन्होंने सराहना की, जो काम पहले मैन्युअल तरीके से किया जाता था।
उर्वरक वितरण में पारदर्शिता लाने के लिए उन्होंने ‘पॉइंट-ऑफ-सेल’ (POS) मशीनों का उदाहरण दिया, जो वितरण में होने वाली चोरी को रोकने में क्रांतिकारी साबित हो रही हैं। वर्तमान में प्रायोगिक परीक्षण से गुजर रही यह प्रणाली किसान, उसकी भूमि और फसल का पूरा डेटा रखती है। यह तकनीक किसानों को वैज्ञानिक आधार पर बताती है कि उनकी मिट्टी की सेहत के अनुसार कितनी खाद पर्याप्त होगी। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अंतिम निर्णय और विकल्प हमेशा किसान के पास ही रहेगा, तकनीक केवल उन्हें सही राह दिखाने और संसाधनों के दुरुपयोग को रोकने का माध्यम बनेगी।
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