(तस्वीरों के साथ)
अजय मसंद
नागोया, 24 सितंबर: भारतीय निशानेबाजी के इतिहास में आज एक सुनहरा पन्ना और जुड़ गया, जब अनंतजीत सिंह नरूका और परिनाज धालीवाल की जोड़ी ने एशियाई खेलों की स्कीट मिश्रित टीम स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर नया कीर्तिमान स्थापित किया। यह पहली बार है जब भारत ने एशियाई खेलों की मिश्रित टीम स्कीट स्पर्धा में कोई पदक अपने नाम किया है। इस उपलब्धि के साथ ही भारतीय स्कीट टीम ने मात्र 48 घंटों के भीतर तीन पदक जीतकर एक ऐतिहासिक ‘हैटट्रिक’ पूरी की।
यह पदक भारतीय निशानेबाजी दल के लिए किसी मरहम से कम नहीं था, क्योंकि इससे पहले 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में भारत को भारी निराशा झेलनी पड़ी थी। पुरुषों की इस व्यक्तिगत स्पर्धा में कोई भी भारतीय फाइनल तक नहीं पहुँच सका और टीम इवेंट में भी हाथ खाली रहे। ऐसे में तेज हवाओं और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बीच अनंतजीत और परिनाज का यह कांस्य पदक सोने से भी ज्यादा कीमती महसूस हो रहा है।
भारतीय स्कीट टीम का दबदबा इस कदर रहा कि बुधवार को जहां अनंतजीत, भवतेग सिंह गिल और मिराज अहमद खान ने पुरुष टीम स्पर्धा में कांस्य जीता, वहीं परिनाज, राइजा ढिल्लों और महेश्वरी चौहान की तिकड़ी ने भी कांस्य पर कब्जा जमाया। अनंतजीत और परिनाज की इस जीत ने सुनिश्चित कर दिया कि इन खेलों की स्कीट की तीनों टीम श्रेणियों में भारतीय तिरंगा शान से लहराए।
चुनौतियों भरा सफर और रोमांचक फाइनल
सफलता की यह राह आसान नहीं थी। क्वालीफिकेशन राउंड में भारतीय जोड़ी ने 138 अंक (अनंतजीत 70/75, परिनाज 68/75) हासिल कर चौथे स्थान के साथ फाइनल में जगह बनाई थी। उस वक्त कतर 145 अंकों के साथ शीर्ष पर था, जबकि दक्षिण कोरिया और चीन क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर थे। लेकिन फाइनल की जंग शुरू होते ही पुराने आंकड़े पीछे छूट गए। दबाव में बिखरते हुए कतर सबसे पहले बाहर हो गया, जिससे भारत का पदक पक्का हो गया।
मुकाबले के बीच में चलती तेज हवाओं ने निशानेबाजों की परीक्षा ली। भारत ने शुरुआत में 24 में से 21 सटीक निशाने लगाए। दूसरे दौर में अनंतजीत ने शानदार एकाग्रता दिखाई और केवल एक चूक के साथ भारत का स्कोर 44 तक पहुँचाया। यह स्कोर कांस्य पदक के लिए तो पर्याप्त था, लेकिन स्वर्ण की रेस में बने रहने के लिए थोड़ा कम रह गया। अंत में चीन (52 अंक) ने स्वर्ण और दक्षिण कोरिया (51 अंक) ने रजत जीता।
बलिदान और जज्बे की अनूठी दास्तान
पटियाला की 24 वर्षीय परिनाज धालीवाल के लिए यह यादगार लम्हा है। उन्होंने इस खेल के लिए विदेश में उच्च शिक्षा के अवसर को ठुकरा दिया था। हांगझोउ एशियाई खेलों की कसक को पीछे छोड़ते हुए परिनाज ने इस जीत का श्रेय टीम वर्क को दिया। उन्होंने कहा, “हम आक्रामक थे और बस एक-दूसरे को खेल में बने रहने के लिए प्रेरित करते रहे।”
वहीं, जयपुर के 28 वर्षीय अनंतजीत सिंह नरूका के लिए यह कांस्य पेरिस ओलंपिक के चौथे स्थान के दर्द को कम करने जैसा है। पेरिस में पदक से महज एक कदम दूर रहने वाले अनंतजीत ने भावुक होकर कहा, “यह पदक मेरे लिए सबसे ऊपर है। ओलंपिक में चौथे स्थान का कोई मतलब नहीं रह जाता अगर आप पोडियम पर खड़े न हों। आज हमने संघर्ष किया और अपना स्थान पक्का किया।”
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