चेन्नई, 8 नवंबर: डब्ल्यूटीए 250 चेन्नई ओपन के खिताबी मुकाबले में रविवार को भारत की वैष्णवी अडकर और ऋतुजा भोसले की जोड़ी को खिताबी जंग में हार का सामना करना पड़ा। स्विट्जरलैंड की सिमोना वाल्टर और नाइमा करामोको की जोड़ी ने एकतरफा मुकाबले में भारतीय जोड़ी को 6-2, 6-0 से शिकस्त दी। हालांकि, इस हार के बावजूद वैष्णवी और ऋतुजा ने भारतीय महिला टेनिस के इतिहास में अपना नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज करा लिया है।
वे डब्ल्यूटीए टूर स्तर के युगल फाइनल में जगह बनाने वाली पहली ऑल-इंडियन (पूर्ण भारतीय) जोड़ी बन गई हैं। खिताबी मुकाबले में हमारी भारतीय जोड़ी स्विस खिलाड़ियों के आक्रामक खेल और उनके बेहतरीन कोर्ट कोऑर्डिनेशन का तोड़ नहीं ढूंढ सकी। मैच के दौरान करामोको ने नेट पर अपने जादुई खेल से भारतीय खिलाड़ियों पर लगातार दबाव बनाए रखा, तो वहीं वाल्टर ने बेसलाइन से दमदार शॉट्स खेलकर उनका शानदार साथ निभाया।
मैच के दौरान भारतीय जोड़ी की कई सहज गलतियां और अहम मौकों पर अंक न जुटा पाना उनकी हार का मुख्य कारण बना। स्विस जोड़ी वाल्टर और करामोको ने मुकाबले की शुरुआत से ही अपने तेवर आक्रामक रखे। वाल्टर ने बेसलाइन से, विशेषकर अपने बैकहैंड शॉट्स से कहर ढाया, जबकि करामोको ने नेट पर अपनी जबरदस्त फुर्ती और सटीक शॉटमेकिंग से भारतीय खिलाड़ियों को पूरी तरह बैकफुट पर धकेल दिया।
मैच के पहले ही चरण में वाल्टर के एक शानदार फोरहैंड विनर ने स्विस जोड़ी को पहला ब्रेक प्वाइंट दिला दिया। इसके तुरंत बाद ऋतुजा का रिटर्न शॉट बेसलाइन के बाहर चला गया और इसी के साथ भारतीय जोड़ी की सर्विस टूट गई। स्विस खिलाड़ियों ने इस शुरुआती बढ़त के बाद भारतीय जोड़ी पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया।
इसके बाद करामोको ने अपनी सर्विस बचाते हुए स्कोर को 3-0 कर दिया। फिर क्या था, वाल्टर ने दो भारतीय खिलाड़ियों के बीच से एक करारा बैकहैंड विनर जमाया और अपने शानदार फोरहैंड शॉट से वैष्णवी को पूरी तरह चकमा दे दिया। इस तरह स्विस जोड़ी ने दूसरा ब्रेक पॉइंट भी भुना लिया और स्कोर को 4-0 तक पहुंचा दिया।
भारतीय जोड़ी ने पांचवें गेम में आखिरकार वापसी की उम्मीद जगाते हुए वाल्टर की सर्विस तोड़ी और अपना खाता खोला, लेकिन इसके बाद स्विस खिलाड़ियों ने उन्हें कोई भी मौका नहीं दिया। करामोको नेट पर छाई रहीं और वाल्टर ने बिना कोई गलती किए पहला सेट 6-2 से अपने नाम कर लिया। दूसरे सेट में भी मुकाबले की पटकथा में कोई बदलाव नहीं आया।
ऋतुजा के एक डबल फॉल्ट और लगातार होती आ रही गलतियों का पूरा फायदा उठाते हुए स्विस जोड़ी ने दूसरे सेट में भी झटपट शुरुआती बढ़त बना ली। करामोको ने नेट पर भारतीय खिलाड़ियों के हर एक रिटर्न को शानदार तरीके से नाकाम किया। दूसरी ओर, वैष्णवी भी अपनी सर्विस को बचाने में नाकामयाब रहीं।
एक और डबल फॉल्ट के बाद जैसे ही उनकी सर्विस टूटी, भारतीय जोड़ी की मैच में वापसी की रही-सही उम्मीदें भी लगभग दम तोड़ गईं। अंततः स्विस जोड़ी ने दूसरा सेट 6-0 से अपने नाम करते हुए ट्रॉफी पर शान से कब्जा जमा लिया। हालांकि इस फाइनल मुकाबले में हार मिली, लेकिन वैष्णवी अडकर और ऋतुजा भोसले का यह पूरा चेन्नई ओपन सफर भारतीय महिला टेनिस के लिए एक ऐतिहासिक और गौरवशाली उपलब्धि बन गया है।
इन दोनों खिलाड़ियों ने डब्ल्यूटीए टूर स्तर के युगल फाइनल में कदम रखने वाली पहली पूर्ण भारतीय जोड़ी बनकर जो इतिहास रचा है, वह आने वाले समय में देश की हर महिला टेनिस खिलाड़ी के लिए प्रेरणास्त्रोत और उत्साह बढ़ाने वाला साबित होगा।
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