पाकिस्तान की ओर से भारतीय विमानों के लिए अपना हवाई रास्ता बंद किए जाने का सबसे बड़ा खामियाजा एयर इंडिया को भुगतना पड़ रहा है। एयर इंडिया के तत्कालीन CEO कैम्पबेल विल्सन ने अनुमान जताया था कि यदि यह पाबंदी लंबी खिंची, तो कंपनी को सालाना करीब 5,000 करोड़ रुपये का करारा झटका लग सकता है। अब एयर इंडिया के मौजूदा CEO टेवोल्डे ने भी इस बात की पुष्टि की है कि इन प्रतिबंधों का सीधा और भारी असर उनकी एयरलाइन पर पड़ रहा है, और प्रतिस्पर्धी कंपनियों के मुकाबले उन्हें कहीं ज्यादा चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
- आइए जानते हैं, पाकिस्तान ने आखिर अपना एयरस्पेस क्यों बंद किया है?
- लंबा रूट अपनाने से किसी एयरलाइन का खर्च आसमान क्यों छूने लगता है?
- आखिर एयर इंडिया को ₹5,000 करोड़ का भारी नुकसान कैसे हो रहा है?
- दूसरी विदेशी एयरलाइंस को एयर इंडिया जितनी भारी परेशानी क्यों नहीं झेलनी पड़ रही?
- आसमान छूते हवाई ईंधन (ATF) के दामों ने संकट को और गहरा किया है
- आखिर एयर इंडिया की इस समस्या का कोई स्थायी समाधान कब निकलेगा?
अब बड़ा सवाल यह है कि आखिर सिर्फ एक एयरस्पेस बंद होने से किसी एयरलाइन को इतना भारी-भरकम नुकसान कैसे हो सकता है? और यह संकट सिर्फ एक कंपनी तक ही क्यों सीमित है?
आइए जानते हैं, पाकिस्तान ने आखिर अपना एयरस्पेस क्यों बंद किया है?
इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए उस दर्दनाक आतंकी हमले से हुई थी, जिसमें 26 बेकसूर लोगों की जान चली गई थी। इस कायराना हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में खटास और तनाव काफी बढ़ गया, जिसके चलते 24 अप्रैल 2025 को पाकिस्तान ने अपने आसमान को भारतीय विमानों के लिए पूरी तरह बंद कर दिया। इसके जवाब में भारत ने भी अपने एयरस्पेस का इस्तेमाल पाकिस्तानी विमानों के लिए प्रतिबंधित कर दिया। पाकिस्तान ने इस पाबंदी को बार-बार आगे बढ़ाते हुए अब इसकी मियाद 24 नवंबर 2026 तक कर दी है।
इस एक फैसले ने भारतीय एयरलाइंस के लिए यूरोप और अमेरिका का सफर बेहद दुरूह बना दिया है। अब विमानों को पाकिस्तान के ऊपर से गुजरने के बजाय लंबे चक्कर काटकर जाना पड़ रहा है, जिससे समय की बर्बादी के साथ-साथ आर्थिक बोझ भी लगातार बढ़ता जा रहा है। इसे एक बेहद आसान मिसाल से समझिए।
कल्पना कीजिए कि आपको दिल्ली से लंदन जाना है। सामान्य दिनों में आप सीधी उड़ान से कम समय में वहां पहुंच जाते हैं। लेकिन यदि वही सीधा रास्ता ब्लॉक कर दिया जाए, तो आपको घूमकर जाना होगा। ऐसे में सफर का समय भी बढ़ेगा और गाड़ी का ईंधन भी ज्यादा जलेगा। विमानों के साथ भी बिल्कुल यही स्थिति बन गई है।
लंबा रूट अपनाने से किसी एयरलाइन का खर्च आसमान क्यों छूने लगता है?
किसी भी एयरलाइन के ऑपरेशनल खर्च में सबसे बड़ा हिस्सा एविएशन फ्यूल यानी ईंधन का होता है। विमान हवा में जितनी ज्यादा देर तक रहेगा, उसका ईंधन उतना ही अधिक खर्च होगा। पाकिस्तान का एयरस्पेस बंद होने के बाद से भारतीय विमानों को हजारों किलोमीटर का अतिरिक्त फेरा लेना पड़ रहा है, जिसका असर निम्नलिखित स्तरों पर साफ दिखाई देता है:
- ईंधन की रिकॉर्ड खपत: लंबी दूरी तय करने के कारण विमानों को अधिक ईंधन की आवश्यकता होती है, जिससे हर एक उड़ान की लागत काफी बढ़ जाती है.
- उड़ान के समय में इजाफा: विमान के हवा में ज्यादा देर रहने से क्रू मेंबर्स की ड्यूटी ऑवर्स, एयरक्राफ्ट के यूटिलाइजेशन और अन्य ऑपरेशनल खर्चों पर सीधा असर पड़ता है.
- अतिरिक्त स्टॉपेज की मजबूरी: कई लंबी दूरी की उड़ानों को बीच रास्ते में ईंधन भरवाने के लिए रुकना पड़ता है, जिससे लैंडिंग फीस, एयरपोर्ट और ग्राउंड हैंडलिंग के खर्च और भी बढ़ जाते हैं.
- विमान की उपलब्धता में कमी: जब एक ही विमान किसी रूट पर जरूरत से ज्यादा समय बिताता है, तो वह उसी दिन दूसरी उड़ान के लिए कम उपलब्ध हो पाता है, जिससे पूरी एयरलाइन का फ्लाइट शेड्यूल चरमरा जाता है.
सितंबर 2026 में ‘बिजनेस स्टैंडर्ड’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली से शिकागो जाने वाली एयर इंडिया की उड़ान पहले पाकिस्तान के ऊपर से गुजरते हुए लगभग 12,500 किलोमीटर की दूरी तय करती थी. लेकिन वैकल्पिक और लंबा रूट अपनाए जाने के बाद अब यह दूरी बढ़कर करीब 15,000 किलोमीटर हो गई है यानी सीधे तौर पर 2,500 किलोमीटर की अतिरिक्त उड़ान! इसका सीधा असर सिर्फ यात्रियों के सफर के वक्त पर नहीं, बल्कि एयरलाइन के पूरे बिजनेस मॉडल पर पड़ रहा है.
आखिर एयर इंडिया को ₹5,000 करोड़ का भारी नुकसान कैसे हो रहा है?
एअर इंडिया के CEO टेवोल्डे का यह दावा है कि पाकिस्तानी एयरस्पेस पर लगी पाबंदियों का जख्म दूसरी एयरलाइंस के मुकाबले उनकी कंपनी को ज्यादा गहरा मिला है। इसकी सबसे बड़ी वजह भारत की भौगोलिक स्थिति और एयर इंडिया का विशाल अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क है:
- भारत से यूरोप और उत्तरी अमेरिका जाने वाले तमाम विमानों के लिए पाकिस्तान का हवाई मार्ग सबसे छोटा और सुगम रास्ता माना जाता था। उदाहरण के लिए, दिल्ली से पेरिस, लंदन, फ्रैंकफर्ट और अमेरिका के कई बड़े शहरों की उड़ानें पाकिस्तान के रास्ते बेहद कम समय में पूरी हो जाती थीं।
- लेकिन एयरस्पेस बंद होने के बाद भारतीय विमानों के लिए उस रास्ते से गुजरना पूरी तरह प्रतिबंधित है। ऐसे में उन्हें मजबूरन दक्षिण की तरफ मुड़कर अरब सागर और ओमान के रास्ते एक बेहद लंबा चक्कर काटना पड़ रहा है। यही वजह है कि एयर इंडिया की अमेरिका और यूरोप जाने वाली फ्लाइट्स सबसे ज्यादा प्रभावित हुई हैं।
- वैश्विक एविएशन डेटा फर्म ‘Flightradar24’ के अनुसार, पाकिस्तान का एयरस्पेस बंद होने के बाद एयर इंडिया की उत्तरी अमेरिका जाने वाली कई उड़ानों के रास्तों में बदलाव करना पड़ा, जिससे कुछ उड़ानों का कुल सफर 3 से 6 घंटे तक लंबा हो गया।
- एयर इंडिया के तत्कालीन CEO कैम्पबेल विल्सन ने पहले ही सरकार को यह जानकारी दी थी कि पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र के बंद होने से कंपनी को भारी वित्तीय संकट से गुजरना पड़ रहा है। इसके जवाब में एयरलाइन ने अपने खर्चों का आकलन कर करीब 5,000 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान जताया था।
- हालांकि, अक्टूबर 2025 में कैम्पबेल विल्सन ने यह भी साझा किया था कि उस समय तक एयर इंडिया को लगभग 4,000 करोड़ रुपये का सीधा वित्तीय झटका लग चुका था। यानी शुरुआती अनुमान 5,000 करोड़ रुपये का था और वास्तविक असर करीब 4,000 करोड़ रुपये तक आंका गया।
पाकिस्तान के साथ उपजे तनाव का असर सिर्फ इंटरनेशनल फ्लाइट्स तक ही सीमित नहीं था, बल्कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद देश के कई प्रमुख एयरपोर्ट्स पर भी उड़ानों का संचालन बुरी तरह प्रभावित हुआ था। एयर इंडिया के तत्कालीन CEO कैम्पबेल विल्सन के आंकड़ों के मुताबिक, उस संवेदनशील दौर में कंपनी की उड़ानें देश के 9 बड़े एयरपोर्ट्स (जैसे- श्रीनगर, लेह, जम्मू, जोधपुर, अमृतसर, भुज, जामनगर और चंडीगढ़ आदि) पर प्रभावित हुई थीं। शुरुआती रिपोर्ट्स के अनुसार, उस दौरान करीब 1,000 उड़ानें रद्द करनी पड़ी थीं और लगभग 70,000 से 75,000 यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा था.
दूसरी विदेशी एयरलाइंस को एयर इंडिया जितनी भारी परेशानी क्यों नहीं झेलनी पड़ रही?
- पाकिस्तान ने यह प्रतिबंध विशेष रूप से सिर्फ भारतीय विमानों पर लगाया है, विदेशी एयरलाइंस पर नहीं। यही वजह है कि ब्रिटिश एयरवेज, लुफ्थांसा, कतर एयरवेज और अमीरात जैसी अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस बेधड़क पाकिस्तान के ऊपर से उड़ान भर रही हैं (हालांकि उन्हें अन्य देशों के नियमों का पालन करना होता है)।
- मिसाल के तौर पर, लंदन से दिल्ली आने वाली ब्रिटिश एयरवेज की फ्लाइट पाकिस्तान के आसमान से होकर आसानी से आ सकती है, लेकिन एयर इंडिया के विमान को उसी रास्ते से आने की सख्त मनाही है। इस वजह से विदेशी एयरलाइंस कम दूरी तय करके अपना कीमती समय और ईंधन दोनों बचा रही हैं, जबकि एयर इंडिया को लंबा और खर्चीला रास्ता चुनना पड़ रहा है।
- एयर इंडिया की मुसीबतें सिर्फ पाकिस्तान तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में जारी लगातार भू-राजनीतिक तनाव ने भी आग में घी का काम किया है। यह क्षेत्र भारत से यूरोप जाने वाले विमानों के लिए बेहद अहम गलियारा है। यहां तनाव बढ़ने पर अक्सर हवाई रास्ते बंद करने पड़ते हैं या रूट बदलने पड़ते हैं, जिसका असर वैश्विक स्तर पर सभी एयरलाइंस पर पड़ता है.
साफ है कि एयर इंडिया एक तरफ पाकिस्तान का एयरस्पेस बंद होने की मार झेल रही है, तो दूसरी तरफ मिडिल ईस्ट के अशांत माहौल का खामियाजा भी भुगत रही है। यही मुख्य वजह है कि विदेशी प्रतिद्वंद्वी एयरलाइंस के मुकाबले एयर इंडिया को आज ज्यादा बड़े संकट से जूझना पड़ रहा है।
आसमान छूते हवाई ईंधन (ATF) के दामों ने संकट को और गहरा किया है
विमानों में इस्तेमाल होने वाले ईंधन को एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) कहा जाता है, जो किसी भी एयरलाइन के बजट का सबसे बड़ा हिस्सा होता है। जब एटीएफ के दाम बढ़ते हैं, तो फ्लाइट्स ऑपरेट करने की लागत सीधे बढ़ जाती है। वर्तमान में एयर इंडिया के सामने दोहरी मार पड़ रही है—एक तरफ पाकिस्तान का रास्ता बंद होने से विमानों को लंबा फेरा लेना पड़ रहा है, और दूसरी तरफ महंगे ईंधन के कारण उन्हें हर एक लीटर के लिए ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है। यानी विमान ज्यादा ईंधन फूंक रहे हैं और उस महंगे ईंधन का भारी-भरकम बिल भी कंपनी की जेब पर भारी पड़ रहा है।
आखिर एयर इंडिया की इस समस्या का कोई स्थायी समाधान कब निकलेगा?
फिलहाल एयर इंडिया और अन्य विमानन कंपनियां इस भारी संकट से उबरने के लिए नए और बेहतर विकल्प तलाशने में जुटी हैं। कंपनियों ने सरकार के समक्ष अपने सुझाव रखे हैं कि उड़ानों के रास्तों में रणनीतिक बदलाव किए जाएं और फ्लाइट शेड्यूल तथा पूरे नेटवर्क को इस तरह डिजाइन किया जाए कि कम से कम आर्थिक नुकसान हो। एयर इंडिया ने भी सरकार के साथ कई दौर की उच्चस्तरीय बैठकें की हैं ताकि बढ़े हुए ऑपरेशनल खर्चों को कम किया जा सके और पैसेंजर्स को कम से कम परेशानी हो।
जब तक पाकिस्तान का एयरस्पेस भारतीय उड़ानों के लिए बंद रहता है, तब तक एयर इंडिया को कई अंतरराष्ट्रीय रूट्स पर लंबे रास्ते ही अपनाने होंगे, जिससे ईंधन का खर्च और सफर का वक्त बढ़ता रहेगा। विदेशी एयरलाइंस को पाकिस्तान के ऊपर से उड़ान भरने की छूट होने के कारण उन्हें कुछ खास रूट्स पर स्पष्ट बढ़त हासिल है। हालांकि, मिडिल ईस्ट का तनाव और महंगे ईंधन की चुनौती अकेली एयर इंडिया की नहीं, बल्कि आज वैश्विक स्तर पर कई बड़ी एयरलाइंस के लिए सिरदर्द बनी हुई है।
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