पीएम-कुसुम का नया अवतार: नवजीवन की ओर, लक्ष्य की ओर रफ्तार!

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PM-KUSUM scheme | पीएम-कुसुम योजना को मिलेगा दूसरा जीवनदान! सरकार फिर बढ़ाएगी समय-सीमा, लक्ष्य अभी भी दूर

पीएम-कुसुम योजना: लक्ष्यों की ओर धीमी प्रगति, समय-सीमा में संभावित विस्तार

केंद्र सरकार अपनी महत्वपूर्ण पीएम-कुसुम योजना की समय-सीमा को एक बार फिर बढ़ाने पर विचार कर सकती है। यह निर्णय इसलिए लिया जा रहा है क्योंकि योजना के दो मुख्य घटक अभी तक अपने निर्धारित लक्ष्यों का 50 प्रतिशत भी हासिल नहीं कर पाए हैं। यह जानकारी सरकारी सूत्रों से प्राप्त हुई है।

प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (पीएम-कुसुम) योजना की शुरुआत 2019 में की गई थी। इसका मूल उद्देश्य 2022 तक 30,800 मेगावाट सौर क्षमता स्थापित करना था। इस योजना के लिए कार्यान्वयन एजेंसियों के सेवा शुल्क सहित कुल 34,422 करोड़ रुपये की केंद्रीय वित्तीय सहायता का प्रावधान किया गया था।

वैश्विक महामारी के कारण योजना के कार्यान्वयन पर पड़े प्रभाव को देखते हुए, केंद्र सरकार ने पहले ही पीएम-कुसुम योजना की समय-सीमा को मार्च 2026 तक बढ़ा दिया था और लक्ष्य को संशोधित कर 34,800 मेगावाट कर दिया था।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, निर्धारित लक्ष्यों की प्रभावी प्राप्ति सुनिश्चित करने के लिए, पीएम-कुसुम के कार्यान्वयन की समय-सीमा में एक और विस्तार की उम्मीद है। यह इस योजना का दूसरा विस्तार होगा।

आधिकारिक आंकड़ों से पता चलता है कि अभी तक योजना के किसी भी घटक ने अपने 100 प्रतिशत लक्ष्य को पूरा नहीं किया है। हालांकि, योजना का घटक ‘ख’, जो मार्च 2026 तक लागू रहेगा, 9 सितंबर तक अपने लक्ष्य का 71 प्रतिशत हासिल करने में सफल रहा है। अन्य घटकों की प्रगति थोड़ी धीमी रही है: घटक ‘क’ ने केवल 6.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है, जबकि घटक ‘ग’ – व्यक्तिगत पंप का सौरीकरण (आईपीएस) और घटक ‘ग’ – फीडर स्तरीय सौरीकरण (एफएलएस) ने क्रमशः 16.5 प्रतिशत और 25.5 प्रतिशत की वृद्धि दिखाई है।

नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) के अनुसार, घटक ‘क’ छोटे सौर ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना के माध्यम से 10,000 मेगावाट सौर क्षमता स्थापित करने से संबंधित है। घटक ‘ख’ का लक्ष्य 14 लाख ऑफ-ग्रिड एकल सौर ऊर्जा चालित कृषि पंपों की स्थापना है, और घटक ‘ग’ 35 लाख ग्रिड से जुड़े कृषि पंपों के सौरीकरण पर केंद्रित है।

वर्तमान स्थिति के अनुसार, घटक ‘क’ के तहत 650.49 मेगावाट क्षमता स्थापित की गई है। वहीं, घटक ‘ख’ के तहत 12.72 लाख से अधिक ऑफ-ग्रिड सौर पंपों को स्वीकृति मिली है, जिनमें से 9.03 लाख पंप सफलतापूर्वक स्थापित किए जा चुके हैं।


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