बजट के दिन चांदी की कीमतों में भारी गिरावट, एक हफ्ते में कीमत गिरी ₹1.34 लाख, बाजार में दहशत

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बजट के दिन चांदी की कीमतों में भारी गिरावट, एक हफ्ते में कीमत गिरी ₹1.34 लाख, बाजार में दहशत

नई दिल्ली:

केंद्रीय बजट के दिन चांदी की कीमतों में भारी गिरावट देखने को मिली। 1 फरवरी 2026 को हाजिर बाजार में चांदी की कीमत में भारी गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों और व्यापारियों में घबराहट फैल गई।

सप्ताह की शुरुआत में चांदी की कीमत करीब थी ₹4,00,000 प्रति किलोग्राम था। लेकिन बजट के दिन यह लगभग गिर गया ₹2,65,600 प्रति किलोग्राम लेकिन पहुंच गये. यानी महज एक हफ्ते में चांदी की कीमत अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गई. ₹1,34,400 प्रति किलोग्राम यह टूट गया है।

चांदी की कीमत में क्यों आई गिरावट?

विशेषज्ञों के मुताबिक इस गिरावट का सबसे बड़ा कारण निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली (मुनाफा बुकिंग) है। जिन निवेशकों ने कम कीमत पर चांदी खरीदी थी, उन्होंने ऊंचे स्तर पर बिकवाली शुरू कर दी।

इसके अलावा बजट पूर्व अनिश्चितता और वैश्विक आर्थिक स्थिति से भी कीमती धातुओं पर दबाव रहा। डॉलर के मजबूत होने और बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी और सोने की कीमतों पर भी पड़ा।

घरेलू बाजार पर असर

चांदी की कीमतों में अचानक गिरावट से स्थानीय बाजारों में दहशत का माहौल बन गया। कई व्यापारियों ने घाटे से बचने के लिए अपने स्टॉक बेचना शुरू कर दिया।

ज्वैलर्स और सराफा व्यापारियों के मुताबिक, इस समय उपभोक्ता खरीदारी धीमी हो गई है क्योंकि लोग कीमतों में स्थिरता का इंतजार कर रहे हैं।

इस गिरावट से सबसे ज्यादा नुकसान छोटे निवेशकों को हुआ है, जिन्होंने ऊंचे भाव पर चांदी खरीदी थी।

सोने पर भी दबाव

चांदी के साथ-साथ सोने की कीमतों में भी कमजोरी देखी गई। हालांकि सोने में गिरावट चांदी जितनी तेज नहीं थी, लेकिन दोनों धातुएं वैश्विक संकेतों से प्रभावित थीं।

विशेषज्ञों का कहना है कि चांदी की कीमत में अधिक उतार-चढ़ाव रहता है क्योंकि इसमें निवेश के साथ-साथ औद्योगिक मांग भी शामिल होती है।

निवेशकों को क्या करना चाहिए?

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों को घबराकर फैसले नहीं लेने चाहिए. कीमतों में उतार-चढ़ाव कमोडिटी बाजार का एक सामान्य हिस्सा है।

जो लोग नई खरीदारी करना चाहते हैं उन्हें कीमतों के स्थिर होने का इंतजार करना चाहिए। छोटी अवधि के व्यापारियों को स्टॉप लॉस के साथ व्यापार करने की सलाह दी जा रही है।

आगे क्या रहेगा रुझान?

बजट में सर्राफा सेक्टर के लिए कोई बड़ा ऐलान नहीं हुआ, जिससे बाजार का सेंटीमेंट कमजोर रहा.

अब निवेशकों की नजर अंतरराष्ट्रीय महंगाई के आंकड़ों, ब्याज दरों और डॉलर की चाल पर है. इन्हीं कारकों के आधार पर चांदी और सोने की कीमतों की दिशा तय होगी।

निष्कर्ष

एक हफ्ते में चांदी की कीमतों में 1.34 लाख रुपये प्रति किलोग्राम की गिरावट ने बाजार को चौंका दिया है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना ​​है कि यह गिरावट अस्थायी हो सकती है और आने वाले दिनों में कीमतें धीरे-धीरे ठीक हो सकती हैं।

निवेशकों को सलाह है कि वे बाजार की गतिविधियों पर नजर रखें और सोच-समझकर निवेश करें।


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