मां बनने का अहसास हर महिला के लिए दुनिया का सबसे खूबसूरत और जादुई अनुभव होता है। यह एक ऐसा सपना है, जिसे हर स्त्री अपनी आंखों में संजोती है। हालांकि, प्रेग्नेंसी का यह सफर जितना सुखद है, उतना ही चुनौतियों भरा भी होता है। मूड स्विंग्स, बढ़ता वजन और बदन दर्द जैसी समस्याएं इस दौरान आम हैं, लेकिन इन सबके बावजूद महिलाएं अपनी जिम्मेदारियों को बखूबी निभाती हैं। आज की आत्मनिर्भर और वर्किंग महिलाएं घर से लेकर दफ्तर तक के काम के लिए खुद ड्राइविंग करना पसंद करती हैं। पर जैसे-जैसे गर्भावस्था अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंचती है, एक बड़ा सवाल खड़ा हो जाता है— क्या प्रेग्नेंसी के नौवें महीने में कार चलाना सुरक्षित है?
क्या आखिरी महीने में ड्राइविंग करना सही है?
स्त्री रोग विशेषज्ञों (Gynecologists) के अनुसार, प्रेग्नेंसी के आखिरी महीने में ड्राइविंग करना सुरक्षित नहीं माना जाता। इसका मुख्य कारण इस दौरान शरीर में होने वाले भारी बदलाव हैं। पेट का आकार बढ़ जाने से उठने-बैठने और चलने-फिरने में काफी असहजता होने लगती है, जो ड्राइविंग के दौरान घातक हो सकती है।
इन खतरों को न करें नजरअंदाज
अंतिम महीनों में ड्राइविंग करने से कई तरह के जोखिम बढ़ जाते हैं:
- जल्द थकान महसूस होना और पेट में खिंचाव।
- अचानक तेज दर्द या लेबर पेन शुरू होने का डर।
- इमरजेंसी की स्थिति में ड्राइविंग सीट पर होना जोखिम भरा हो सकता है।
डॉक्टर सलाह देते हैं कि यदि ड्राइविंग करना बेहद अनिवार्य हो, तो ये सावधानियां जरूर बरतें:
- केवल कम दूरी के लिए ही ड्राइव करें।
- सीट को थोड़ा पीछे खिसका लें ताकि पेट पर दबाव न पड़े।
- सीट बेल्ट का इस्तेमाल सही तरीके से करें।
- कोशिश करें कि अकेले ड्राइव न करें, कोई साथ हो तो बेहतर है।
- जरा सी भी तकलीफ होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें, क्योंकि छोटी सी चूक बड़े संकट का कारण बन सकती है।
शुरुआती महीनों में ड्राइविंग का गणित
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रेग्नेंसी के शुरुआती महीनों में ड्राइविंग करना सुरक्षित है, बशर्ते आप सावधानी बरतें। ड्राइविंग के दौरान इन बातों का विशेष ध्यान रखें:
- सीट बेल्ट हमेशा लगाएं।
- लैप बेल्ट को पेट के ऊपर नहीं, बल्कि नीचे के हिस्से में रखें।
- शोल्डर बेल्ट कंधे के ठीक ऊपर से जानी चाहिए।
- स्टीयरिंग और पेट के बीच पर्याप्त दूरी बनाए रखें।
- लंबे सफर पर जाने से बचें।
- अगर चक्कर, कमजोरी या थकान महसूस हो, तो भूलकर भी गाड़ी न चलाएं।
हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी में बरतें विशेष सावधानी
यदि आपकी प्रेग्नेंसी ‘हाई-रिस्क’ श्रेणी में आती है, जैसे:
- हाई ब्लड प्रेशर की समस्या।
- जेस्टेशनल डायबिटीज।
- पहले से चल रही कोई मेडिकल कॉम्प्लिकेशन।
ऐसी स्थिति में स्टीयरिंग थामने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह लेना अनिवार्य है। हर महिला की शारीरिक स्थिति अलग होती है, इसलिए किसी और को देखकर निर्णय न लें। प्रेग्नेंसी के आखिरी दौर में ड्राइविंग करना एक बड़ा जोखिम हो सकता है, इसलिए अपनी और अपने आने वाले नन्हे मेहमान की सुरक्षा को प्राथमिकता दें।
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