नयी दिल्ली, तीन नवंबर। देश में रबी फसलों की बुवाई इस बार सुस्त शुरुआत का सामना कर रही है और यह पिछले साल की रफ्तार से काफी पीछे चल रही है। कृषि मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 30 अक्टूबर तक कुल 37.56 लाख हेक्टेयर में ही रबी फसलों की बुवाई हो पाई है, जो पिछले साल की इसी अवधि के 69.02 लाख हेक्टेयर के मुकाबले 46 प्रतिशत कम है।
रबी की सबसे प्रमुख फसल गेहूं की बुवाई पर इसका सबसे ज्यादा असर दिखा है। अब तक इसकी बुवाई केवल 19,000 हेक्टेयर में सिमट कर रह गई है, जबकि पिछले साल इसी अवधि तक 3.34 लाख हेक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी। इस पिछड़ने की मुख्य वजह खेतों की मिट्टी में पर्याप्त नमी का अभाव बताया जा रहा है। गौरतलब है कि गेहूं की बुवाई आमतौर पर अक्टूबर-नवंबर में शुरू होती है और मार्च-अप्रैल में इसकी कटाई की जाती है।
फसल वर्ष 2025-26 (जुलाई-जून) के दौरान जहां गेहूं की कुल बुवाई 336 लाख हेक्टेयर में हुई थी, वहीं इस बार शुरुआती आंकड़े चिंता बढ़ा रहे हैं। साप्ताहिक रिपोर्ट के मुताबिक, दलहन फसलों का रकबा भी 19.56 लाख हेक्टेयर से लुढ़क कर 9.45 लाख हेक्टेयर पर आ गया है। इसमें प्रमुख रूप से चने का रकबा 14.35 लाख हेक्टेयर से घटकर महज 5.90 लाख हेक्टेयर रह गया है।
तिलहन फसलों के मोर्चे पर भी तस्वीर कुछ ऐसी ही है। इनकी बुवाई पिछले साल के 38.62 लाख हेक्टेयर के मुकाबले घटकर 20.97 लाख हेक्टेयर रह गई है। विशेष रूप से सरसों और राई का रकबा 38.07 लाख हेक्टेयर से गिरकर 20.50 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया है। हालांकि, मोटे अनाजों ने कुछ राहत दी है जिनकी बुवाई 3.78 लाख हेक्टेयर में हुई है, जो पिछले साल के 4.22 लाख हेक्टेयर से केवल मामूली रूप से कम है।
इसके अलावा, सर्दियों में बोए जाने वाले धान का रकबा पिछले साल के 3.29 लाख हेक्टेयर के मुकाबले इस बार 3.16 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि बुवाई में इस देरी के पीछे मुख्य कारण जून-सितंबर के दौरान मानसून में 13 प्रतिशत की कमी रहा है। इसके चलते बुवाई के मुहाने पर खेतों की मिट्टी में प्राकृतिक नमी काफी कम हो गई, साथ ही सिंचाई के लिए पानी की सीमित उपलब्धता ने मुश्किलों को और बढ़ा दिया है।
देश के प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्यों में जलाशयों और नहरों का जलस्तर सामान्य से नीचे चल रहा है, जबकि गेहूं की अच्छी फसल के लिए शुरुआती दौर में कई बार सिंचाई की आवश्यकता होती है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि खरीफ फसलों की कटाई के तुरंत बाद खेतों में बची हुई नमी का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करते हुए रबी फसलों की बुवाई में तेजी लाई जाए।
मंत्री ने यह भी सलाह दी कि जिन क्षेत्रों में सिंचाई के पानी की कमी है, वहां के किसानों को कम पानी और कम लागत में तैयार होने वाली फसलों जैसे चना, सरसों, मसूर और मोटे अनाजों की खेती के लिए प्रेरित किया जाए। इसके साथ ही, उन्होंने बदलते तापमान को देखते हुए कृषि वैज्ञानिकों द्वारा तैयार किए गए जलवायु-अनुकूल और गर्मी सहन करने वाले बीजों को किसानों तक जल्द पहुंचाने के निर्देश दिए। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि रबी सीजन के लिए यूरिया, डीएपी, एमओपी और एनपीके उर्वरकों का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है।
राहत की बात यह है कि देश में प्रमाणित बीजों का भी पर्याप्त भंडार उपलब्ध है और राज्य सरकारों के साथ मिलकर जिला स्तर तक इनकी सप्लाई चेन को दुरुस्त किया जा रहा है। मंत्रालय के अनुसार, मौजूदा समय में मंडियों के रुझान काफी उत्साहजनक हैं। धान, गेहूं, मक्का, चना, मसूर, अरहर, सोयाबीन और सरसों जैसी प्रमुख फसलों के बाजार भाव उनके न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से काफी ऊपर चल रहे हैं, जिससे किसानों को उनकी उपज का बेहतर मुनाफा मिलने की पूरी उम्मीद है।
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