**ऊर्जा संकट के बीच भारत का सुरक्षा कवच बनी एसईसीएल: वैश्विक चुनौतियों के बीच कोयला आपूर्ति के लिए पूरी तरह तैयार**
कोल इंडिया लिमिटेड की दिग्गज इकाई, साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) बदलते वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य के बीच भारत की बिजली जरूरतों को पूरा करने के लिए एक मजबूत ढाल बनकर उभरी है। कंपनी के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक (सीएमडी) हरीश दुहान ने सोमवार को विश्वास जताया कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे रणनीतिक मार्गों पर बढ़ते तनाव के कारण आयातित कोयले व गैस की बढ़ती कीमतों के बावजूद, देश की कोयला मांग को निर्बाध रूप से पूरा किया जाएगा।
वैश्विक अस्थिरता का परोक्ष दबाव भारतीय ऊर्जा क्षेत्र पर महसूस किया जा रहा है, लेकिन एसईसीएल अपनी सुदृढ़ परिचालन क्षमता से इसे संतुलित कर रही है। ‘पीटीआई-भाषा’ से चर्चा के दौरान दुहान ने बताया कि चालू वित्त वर्ष 2024-25 में मार्च के मध्य तक कंपनी ने लगभग 16.5 करोड़ टन कोयले का उत्पादन और 16.9 करोड़ टन से अधिक का प्रेषण कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। इससे एनटीपीसी, राजस्थान (आरवीयूएनएल) और मध्य प्रदेश (एमपीपीजीसीएल) जैसे प्रमुख बिजली उत्पादकों को कोयले की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित हुई है।
भविष्य की तैयारियों पर रोशनी डालते हुए दुहान ने कहा कि कंपनी के पास वर्तमान में 2.3 करोड़ टन कोयले का विशाल भंडार मौजूद है, जो मांग में अचानक उछाल आने पर ‘बफर’ का काम करेगा। इसके अलावा, 1.2 करोड़ टन कोयला ऐसा है जिसे तत्काल खनन के जरिए निकाला जा सकता है। खनन के लिए पर्याप्त भूमि की उपलब्धता और पहले से सक्रिय खनन व परिवहन अनुबंधों के कारण उत्पादन की गति को बनाए रखना आसान हो गया है। साथ ही, बिजली संयंत्रों के पास उपलब्ध पर्याप्त स्टॉक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को स्थिरता प्रदान कर रहा है।
एसईसीएल की इस सफलता के पीछे उसकी मेगा परियोजनाएं रीढ़ की हड्डी साबित हो रही हैं। ‘दीपका मेगा’ खान इस साल 3.5 करोड़ टन उत्पादन के पार जाकर अपने ऐतिहासिक शिखर की ओर बढ़ रही है। वहीं, एशिया की सबसे बड़ी कोयला खदान ‘गेवरा’ ने 5 करोड़ टन का जादुई आंकड़ा पार कर लिया है, जबकि ‘कुसमुंडा’ खान भी इस वर्ष 3 करोड़ टन से अधिक उत्पादन की दहलीज पर है।
आपूर्ति तंत्र को और धार देने के लिए एसईसीएल ‘रेक लोडिंग’ बढ़ाने और भारतीय रेलवे के साथ तालमेल बिठाकर कोयला निकासी को तेज कर रही है। हरीश दुहान ने स्पष्ट किया कि इन रणनीतिक उपायों के जरिए एसईसीएल न केवल बिजली संयंत्रों को प्राथमिकता के आधार पर कोयला पहुँचा रही है, बल्कि भारत की ‘ऊर्जा सुरक्षा’ को सुरक्षित करने के अपने संकल्प पर भी अडिग है। प्रतिकूल वैश्विक परिस्थितियों में भी देश के अंधेरे को दूर रखने के लिए कंपनी पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
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