विश्व शिक्षक दिवस: भारत में शिक्षकों की फौज, पर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की राह में चुनौतियां!
विश्व शिक्षक दिवस के इस खास मौके पर, भारत में शिक्षा क्षेत्र से जुड़ी एक अहम खबर सामने आई है। 2024-25 के आंकड़ों के अनुसार, देश में शिक्षकों की संख्या पहली बार 1 करोड़ के पार, यानि 1.01 करोड़ तक पहुंच गई है। यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन (यूडीआईएसई) प्लस की ताजा रिपोर्ट इस बड़ी उपलब्धि को उजागर करती है।
रिपोर्ट बताती है कि भारत में कुल 24.69 करोड़ छात्र शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, और उन्हें पढ़ाने के लिए 14.71 लाख स्कूलों में शिक्षकों की यह विशाल फौज तैनात है। इनमें से 10.13 लाख स्कूल सरकारी संस्थानों के हैं। हालांकि, शिक्षकों की संख्या में यह वृद्धि निश्चित रूप से राहत भरी है, लेकिन एक सच्चाई यह भी है कि देश में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। आज भी कई ऐसे स्कूल हैं जहाँ एक ही शिक्षक को कई विषयों का भार संभालना पड़ता है।
140 देशों की कुल आबादी से ज़्यादा भारत में शिक्षक!
शिक्षकों की संख्या का यह आंकड़ा जहाँ एक ओर संतोषजनक है, वहीं एक दूसरा पहलू भी है जो चौंकाने वाला है। भारत में जितने शिक्षक हैं, उतनी आबादी तो दुनिया के लगभग 140 देशों की कुल जनसंख्या से भी कम है।
एक करोड़ से कम आबादी वाले देश, जिनसे ज़्यादा भारत में शिक्षक:
- ग्रीस – 9,938,840
- टोगो – 9,721,610
- हंगरी – 9,632,290
- इजराइल – 9,517,180
- ऑस्ट्रिया – 9,113,570
- बेलोरूस – 8,997,600
- स्विट्जरलैंड – 8,967,410
- सेरा लिओन – 8,819,790
- लाओस – 7,873,050
- तुर्कमेनिस्तान – 7,618,850
- लीबिया – 7,458,560
- हांगकांग – 7,396,080
- किर्गिजस्तान – 7,295,030
यह तुलना दर्शाती है कि भारत में शिक्षा के क्षेत्र में मानव संसाधन की कितनी बड़ी उपलब्धता है। अब यह सरकारों और नीति निर्माताओं की जिम्मेदारी है कि वे इस मानव शक्ति का सही उपयोग कर देश के कोने-कोने में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचा सकें।
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