झारखंड के मेडिकल छात्रों का इंतजार: पड़ोसी राज्यों से पीछे, सीटें बढ़ाने की मांग तेज!
झारखंड के युवा जो डॉक्टर बनने का सपना संजोए NEET UG परीक्षा में सफल हुए हैं, वे मेडिकल कॉलेज में दाखिले के लिए सीटों की संख्या बढ़ने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। अफसोस की बात यह है कि अपने ही प्रदेश में अवसर सीमित हैं, जबकि पड़ोसी राज्य बिहार ने सीटों में बंपर वृद्धि कर ली है। झारखंड में सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस सीटों की संख्या जहां जस की तस बनी हुई है, वहीं बिहार ने 430 नई सीटें जोड़कर अपने छात्रों को बड़ी राहत दी है।
1055 सीटों पर मची है जद्दोजहद
फिलहाल, झारखंड के सरकारी मेडिकल कॉलेजों (देवघर एम्स को मिलाकर) में कुल 1,055 एमबीबीएस सीटें उपलब्ध हैं। इनमें से राज्य कोटे के तहत 563 सीटें आती हैं, और इस वर्ष इनमें कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। इसके विपरीत, बिहार में 430 नई सीटें जुड़ने के बाद कुल सीटों का आंकड़ा 3,170 तक पहुंच गया है। बिहार में सरकारी और निजी दोनों मेडिकल कॉलेजों में नए सत्र (2025-26) से इन बढ़ी हुई सीटों पर दाखिला शुरू होगा।
प्रदेश के छात्रों को पलायन को मजबूर
बिहार के पटना मेडिकल कॉलेज में सीटों का विस्तार हुआ है, जहां पहले 150 सीटें थीं, अब ये बढ़कर 250 हो गई हैं। वहीं, झारखंड में हर साल करीब 3,000 छात्र मेडिकल प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण करते हैं। सीटों की इस भारी कमी के चलते, बड़ी संख्या में मेधावी छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए राज्य से बाहर जाना पड़ता है।
रिम्स में सीटों के विस्तार की आस
राज्य के सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल संस्थान, रिम्स (रांची) में फिलहाल 180 एमबीबीएस सीटें हैं। इन्हें बढ़ाकर 250 करने की प्रक्रिया चल रही है, लेकिन इस पर अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। रिम्स प्रशासन नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) को प्रस्ताव भेजने की तैयारी कर रहा है, जिसे राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से आगे बढ़ाया जाएगा।
निजी मेडिकल कॉलेजों से थोड़ी उम्मीद
झारखंड के निजी मेडिकल कॉलेजों ने छात्रों को कुछ राहत दी है। मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) ने इस वर्ष नेताजी सुभाष मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, जमशेदपुर को पहली बार 100 सीटों पर नामांकन की अनुमति दी है। इसके अलावा, मणिपाल-टाटा मेडिकल कॉलेज, जमशेदपुर में भी सीटों की संख्या बढ़ाकर 150 कर दी गई है।
सीमित अवसर, असीमित प्रतिस्पर्धा
इन बढ़ोतरी के बाद, झारखंड में सरकारी और निजी कॉलेजों को मिलाकर कुल एमबीबीएस सीटों की संख्या 1,205 हो गई है। हालांकि, बिहार जैसे पड़ोसी राज्यों की तुलना में यह संख्या अब भी बहुत कम है। यही कारण है कि राज्य के हजारों प्रतिभाशाली मेडिकल अभ्यर्थी या तो दूसरे राज्यों का रुख करने को मजबूर हैं, या फिर प्रदेश में उपलब्ध सीमित सीटों के लिए कड़े मुकाबले का सामना कर रहे हैं।
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