चुनाव का तांडव: कुर्सी की दौड़ में रिश्तेदारी का खेल!

By
Aware Media Network
Aware Media Network एक स्वतंत्र डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म है, जो देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरें, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग पाठकों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारी...
- News Desk
3 Min Read
बेटा-बहू-पत्नी व रिश्तेदार, विधानसभा चुनाव में "अपनों" को सेट करने में जुटे सभी दल

बिहार चुनाव 2025: परिवारवाद की जड़ें, जो हर चुनाव में गहरी होती दिखती हैं

बिहार की राजनीति का एक ऐसा पहलू है जिस पर बार-बार उंगली उठाई जाती है, लेकिन जड़ें उसकी लगातार मजबूत होती रहती हैं – वह है परिवारवाद। हर चुनाव की गहमागहमी के बीच “परिवारवाद खत्म करो” के नारों की गूंज सुनाई देती है, पर जब बात आती है टिकट वितरण की, तो नेता सबसे पहले अपने घर-परिवार वालों की ओर ही देखते हैं। इस बार भी यह सिलसिला जारी है, और लगभग हर पार्टी में पिता, पुत्र, पत्नी या अन्य रिश्तेदार चुनावी मैदान में उतरने के लिए तैयार हैं।

राजद ने भी नहीं छोड़ा कोई कसर

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने भी अपने परिवार के सदस्यों को निराश नहीं किया है। संदेश से विधायक किरण देवी की जगह उनके बेटे दीपू सिंह को टिकट दिया गया है। वहीं, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने गौराबौराम से विधायक स्वर्णा सिंह की जगह उनके पति सुजीत सिंह को चुनावी मैदान में उतारा है। पूर्व सांसद अजय निषाद की पत्नी रमा निषाद औराई से उम्मीदवार बनाई गई हैं। ऐसा लगता है कि कांग्रेस, जदयू, लोजपा, हम, किसी भी दल ने अपने “परिजनों” को खाली हाथ नहीं लौटाया है।

जदयू से इन पारिवारिक चेहरों को मिला मौका

जनता दल (यूनाइटेड) में भी अशोक राम के बेटे अतिरेक को टिकट मिला है। भाजपा में, गोपाल नारायण सिंह के बेटे त्रिविक्रम उम्मीदवार हैं, और रालोमो प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा की पत्नी स्नेहलता भी चुनावी मैदान में हैं। यहां तक कि जनसुराज ने भी आरसीपी सिंह की बेटी लता को टिकट देने में संकोच नहीं किया। जीतन राम मांझी की बहू और समधन दोनों ही एनडीए के बैनर तले चुनाव लड़ रही हैं।

बीजेपी की पहली लिस्ट में ही 11 राजनीतिक परिवार

भाजपा की पहली सूची में ही ऐसे 11 उम्मीदवार हैं, जिनका संबंध किसी न किसी राजनीतिक परिवार से है। राजद में भी, लगभग दर्जनभर उम्मीदवार नेताओं के बेटे या रिश्तेदार हैं। यह स्थिति स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि बिहार की राजनीति में “घर की विरासत” अब भी टिकट पाने का सबसे बड़ा जरिया है, और जनता हर बार इस तथ्य को जानते हुए भी इसे नजरअंदाज कर देती है।


Discover more from Aware Media News - Hindi News, Breaking News & Latest Updates

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Share This Article
Follow:
Aware Media Network एक स्वतंत्र डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म है, जो देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरें, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग पाठकों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारी संपादकीय टीम विश्वसनीय स्रोतों, आधिकारिक आंकड़ों और पत्रकारिता के नैतिक सिद्धांतों के आधार पर समाचार तैयार करती है। Aware Media Network का उद्देश्य निष्पक्ष, सटीक और समय पर जानकारी प्रदान करना है, ताकि पाठक जागरूक निर्णय ले सकें और समसामयिक घटनाओं को बेहतर ढंग से समझ सकें।
कोई टिप्पणी नहीं

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Exit mobile version