बिहार का चुनावी संग्राम: NDA का ‘संकल्प पत्र’ – वादों का अंबार या सिर्फ जुमले?
पटना: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के रणभेरी बज चुकी है, और इसी के साथ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने अपना ‘संकल्प पत्र’ जारी कर जनता के सामने अपने वादों का पिटारा खोल दिया है। इस घोषणा पत्र में एक करोड़ नौकरियों, महिलाओं को दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता, किसानों के लिए ₹9,000 सालाना मदद और अतिपिछड़े वर्गों को ₹10 लाख की सहायता जैसी कई महत्वाकांक्षी घोषणाएं शामिल हैं।
रोजगार, सशक्तिकरण और विकास पर फोकस:
एनडीए का यह ‘संकल्प पत्र’ बिहार की जनता को लुभाने के लिए रोजगार, महिला सशक्तिकरण, कृषि और बुनियादी ढांचे को केंद्र में रखता है। पार्टी ने सरकार बनने पर बिहार में एक करोड़ नौकरियां देने का बड़ा वादा किया है। इसके अलावा, महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए ₹2 लाख तक की वित्तीय सहायता देने की योजना और एक करोड़ महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
अतिपिछड़े वर्गों को साधने की कोशिश:
गठबंधन ने अतिपिछड़ा वर्ग (EBC) के सामाजिक और आर्थिक उत्थान पर भी विशेष ध्यान केंद्रित किया है। तांती, ततमा, निषाद, मल्लाह, केवट, गंगोता, बिंद, नोनिया, तेली, तमोली, बढ़ई, धानुक, लोहाड़, कुम्हार, नाई, शिल्पकार, ठठेरा, माली, चंद्रवंशी, हलवाई, कानू, दांगी, तुरहा, अमात, केवर्त, राजवंशी, गड़ेरिया जैसे समूहों को ₹10 लाख की सहायता देने का वादा किया गया है। साथ ही, सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति गठित की जाएगी, जो अतिपिछड़े वर्ग की विभिन्न जातियों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति का आकलन कर उनके सशक्तिकरण के लिए सुझाव देगी।
किसानों के लिए ‘कर्पूरी ठाकुर किसान सम्मान निधि’:
किसानों को भी लुभाने का कोई मौका नहीं छोड़ा गया है। ‘कर्पूरी ठाकुर किसान सम्मान निधि’ योजना के तहत हर किसान को हर साल ₹3,000 की तीन किश्तों में कुल ₹9,000 की सहायता देने का वादा किया गया है। इसके अलावा, कृषि क्षेत्र को मजबूती देने के लिए ₹1 लाख करोड़ रुपये का निवेश करने की भी घोषणा की गई है।
मत्स्यपालकों और दुग्ध उत्पादन पर भी ध्यान:
‘जुब्बा सहनी मत्स्य पालक सहायता योजना’ के तहत प्रत्येक मत्स्य पालक को ₹4,500 की दो किश्तों में कुल ₹9,000 की सहायता मिलेगी। वहीं, दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए ‘बिहार दूध मिशन’ शुरू करने का भी ऐलान किया गया है, जिसके तहत हर प्रखंड में चिलिंग और प्रोसेसिंग सेंटर स्थापित किए जाएंगे।
बुनियादी ढांचे को मिलेगी नई उड़ान:
एनडीए ने राज्य के बुनियादी ढांचे के विकास के लिए भी कई बड़े वादे किए हैं। अगले कार्यकाल में 7 नए एक्सप्रेसवे बनाने, 3,600 किलोमीटर रेल ट्रैक का आधुनिकीकरण करने और ‘अमृत भारत एक्सप्रेस’ व ‘नमो रैपिड रेल सेवा’ का विस्तार बिहार के कई जिलों तक करने की बात कही गई है।
चुनावी मैदान में ‘इंडिया’ गठबंधन की छाप:
दिलचस्प बात यह है कि इंडिया गठबंधन ने भी अपना घोषणा पत्र पहले ही जारी कर दिया है, जिसमें तेजस्वी यादव ने युवाओं को रोजगार देने पर विशेष जोर दिया था। अब एनडीए के संकल्प पत्र में भी रोजगार और महिला सशक्तिकरण को प्रमुख मुद्दा बनाए जाने से यह साफ है कि यह चुनाव रोजगार के इर्द-गिर्द ही लड़ा जाएगा।
वादों पर जनता का भरोसा: एक बड़ा सवाल?
लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या बीजेपी और एनडीए के इन वादों पर बिहार की जनता भरोसा करेगी? यह सवाल इसलिए उठ रहे हैं, क्योंकि देश के अलग-अलग हिस्सों में बीते विधानसभा चुनावों और लोकसभा चुनावों में बीजेपी ने कई ऐसे वादे किए थे जो ‘हवा हवाई’ साबित हुए।
बीजेपी के अन पूरे वादे: एक बानगी
- 2014 के लोकसभा चुनाव में देश में हर साल 2 करोड़ नौकरी देने का वादा पूरा नहीं हुआ।
- 2019 के लोकसभा चुनाव घोषणापत्र में किसानों की आय 2022 तक दोगुनी करने का वादा भी अधूरा रहा।
- दिल्ली विधानसभा चुनाव में महिलाओं को मासिक ₹2,500 की सहायता, गर्भवती महिलाओं को ₹21,000 की सहायता, 300 यूनिट मुफ्त बिजली, यमुना नदी के किनारे विकास और अवैध कॉलोनियों के लोगों को स्वामित्व का अधिकार जैसे वादे भी खटाई में पड़ गए।
महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और हरियाणा समेत कई जगहों पर बीजेपी ने लोकलुभावन वादे करके सरकार तो बना ली, लेकिन जनता से किए कई वादे अभी तक पूरे नहीं हुए हैं। ऐसे में, बिहार की जनता यह देखेगी कि क्या एनडीए का ‘संकल्प पत्र’ सिर्फ जुमलों का पुलिंदा है या वाकई बिहार के विकास के लिए एक ठोस खाका।
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