विधायक अखाड़ा: 130 पर दाग, 90% धनकुबेर, सिर्फ 12% महिलाएं

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जीते 243 विधायकों में से 130 पर आपराधिक मामले, 90 फीसदी करोड़पति, सिर्फ 12 प्रतिशत महिलाएं जीतीं

बिहार विधानसभा चुनाव 2025: करोड़पति विधायकों का दबदबा, आपराधिक पृष्ठभूमि वाले नेताओं की संख्या में कमी

पटना: ‘एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) और ‘बिहार इलेक्शन वॉच’ द्वारा जारी एक विस्तृत रिपोर्ट ने बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों पर प्रकाश डाला है, जिसमें विधायकों की संपत्ति, शिक्षा, आयु और आपराधिक पृष्ठभूमि जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं का विश्लेषण किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, इस बार के चुनाव परिणाम कई मायनों में चौंकाने वाले हैं।

करोड़पति विधायकों का बोलबाला:
रिपोर्ट का सबसे प्रमुख निष्कर्ष यह है कि इस बार जीते हुए 90 प्रतिशत विधायक करोड़पति हैं। इनकी औसत घोषित संपत्ति 9.02 करोड़ रुपये है, जो बिहार के विधायकों की आर्थिक हैसियत को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि राजनीतिक गलियारों में धनबल का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है।

आपराधिक मामलों में गिरावट:
हालांकि 53 प्रतिशत यानी 130 विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं, लेकिन यह संख्या पिछले चुनाव की तुलना में थोड़ी कम हुई है। 2020 के विधानसभा चुनाव में 68 प्रतिशत विधायकों ने आपराधिक मामले घोषित किए थे, जबकि इस बार यह आंकड़ा 42 प्रतिशत (102 विधायक) तक पहुंच गया है। गंभीर आपराधिक मामलों की बात करें तो 102 (42 प्रतिशत) विधायकों ने ऐसे मामले घोषित किए हैं, जबकि 2020 में यह संख्या 123 (51 प्रतिशत) थी। खास तौर पर, छह विधायकों के खिलाफ हत्या से संबंधित मामले दर्ज हैं, और 19 विधायकों पर हत्या के प्रयास जैसे गंभीर आरोप हैं। महिलाओं के खिलाफ अत्याचार के नौ मामले भी विजेताओं ने अपने हलफनामों में स्वीकार किए हैं।

शिक्षा का स्तर:
शिक्षा के मामले में, 35 प्रतिशत विजेताओं ने अपनी योग्यता पांचवीं से बारहवीं तक बताई है, जबकि 60 प्रतिशत स्नातक या इससे अधिक शिक्षित हैं। यह दर्शाता है कि बिहार विधानसभा में शिक्षित प्रतिनिधियों की संख्या बढ़ रही है। पांच विजेताओं ने डिप्लोमा किया है और सात ने स्वयं को साक्षर बताया है।

आयु वर्ग और महिला प्रतिनिधित्व:
आयु वर्ग के अनुसार, 25 से 40 वर्ष के 38 विजेता (16 प्रतिशत), 41 से 60 वर्ष के 143 विजेता (59 प्रतिशत), और 61 से 80 वर्ष के 62 विजेता (26 प्रतिशत) हैं। राज्य की 243 सदस्यीय विधानसभा में इस बार केवल 29 (12 प्रतिशत) महिला उम्मीदवार विजयी हुई हैं, जबकि पिछले विधानसभा में यह संख्या 11 प्रतिशत थी। महिला प्रतिनिधित्व में मामूली वृद्धि हुई है, लेकिन यह अभी भी एक चिंता का विषय है।

पार्टी-वार विश्लेषण:
विभिन्न पार्टियों की बात करें तो बीजेपी के 89 विजेताओं में 43 (48 प्रतिशत), जेडीयू के 85 में 23 (27 प्रतिशत), आरजेडी के 25 में 14 (56 प्रतिशत), एलजेपी के 19 में 10 (53 प्रतिशत), कांग्रेस के छह में तीन (50 प्रतिशत), और एआईएमआईएम के पांच में चार (80 प्रतिशत) विधायकों ने गंभीर आपराधिक मामले घोषित किए हैं। राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) के चार में एक (25 प्रतिशत), सीपीआई (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन के दो में एक (50 प्रतिशत), सीपीएम के एकमात्र विजेता, इंडियन इन्क्लूसिव पार्टी के एक विजेता और बीएसपी के एक विजेता ने भी गंभीर आपराधिक मामले घोषित किए हैं।

कुल मिलाकर, यह रिपोर्ट बिहार के राजनीतिक परिदृश्य की एक झलक प्रस्तुत करती है, जहां धनबल का प्रभाव स्पष्ट है, लेकिन आपराधिक पृष्ठभूमि वाले नेताओं की संख्या में आंशिक कमी आई है। हालांकि, महिला प्रतिनिधित्व में अभी भी काफी सुधार की गुंजाइश है।


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