Alpha Movie Review: आलिया और शर्वरी के विस्फोटक एक्शन ने पर्दे पर लगाई आग!

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Alpha Movie Review: आलिया और शर्वरी के विस्फोटक एक्शन ने पर्दे पर लगाई आग!
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यशराज फिल्म्स (YRF) के धाकड़ स्पाई यूनिवर्स में जब पहली बार महिला प्रधान एक्शन फिल्म ‘अल्फा’ का ऐलान हुआ, तो सिने-प्रेमियों के बीच एक अलग ही रोमांच दौड़ गया था। ‘टाइगर’, ‘पठान’ और ‘वॉर’ जैसी दिग्गज फ्रैंचाइजी की सफलता के बाद आलिया भट्ट और शरवरी का इस मिशन की कमान संभालना किसी बड़े दांव से कम नहीं था। कई बदलावों और लंबे इंतज़ार के बाद आखिरकार यह फिल्म पर्दे पर उतर चुकी है। कागजों पर ‘ब्लॉकबस्टर’ दिखने वाली यह फिल्म क्या दर्शकों की उम्मीदों पर खरी उतरी? आइए, इस मिशन का गहराई से विश्लेषण करते हैं।

 

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मूवी रिव्यू: ‘अल्फा’ (Alpha)

कलाकार: आलिया भट्ट, शरवरी, बॉबी देओल, अनिल कपूर, दिव्येंदु भट्टाचार्य और ऋतिक रोशन (कैमियो)

निर्देशक: शिव रवैल

फ्रेंचाइजी: YRF स्पाई यूनिवर्स

रेटिंग: 2.5/5 स्टार

कहानी (स्पॉइलर अलर्ट)

फिल्म की बिसात फतेह सिंह लखावत (बॉबी देओल) बिछाता है, जो क्रूरता की सारी हदें पार कर चुका है। वह सीता (आलिया भट्ट) का अपहरण कर उसे जज्बातों से दूर एक ‘लैब रैट’ की तरह पालता है। लखावत सीता पर ‘अल्फा ड्रग’ का परीक्षण करता है, जो सैनिकों के जख्मों को तुरंत भरने और उन्हें सुपर-ह्यूमन बनाने की ताकत रखता है। इस प्रयोग के बाद सीता एक ऐसी ‘किलिंग मशीन’ में तब्दील हो जाती है, जिसे रोक पाना नामुमकिन है।

कहानी में नया मोड़ दुर्गा (शरवरी) की एंट्री के साथ आता है। दुर्गा न केवल सीता के भीतर की तबाही को शांत करती है, बल्कि उससे एक मजबूत रिश्ता भी बनाती है। सफर के दौरान दोनों के हाथ लखावत के काले साम्राज्यों का एक ऐसा राज लगता है जो सब कुछ बदल देता है। क्या ये दोनों जांबाज महिलाएं मिलकर लखावत के जुल्मों का अंत कर पाती हैं? फिल्म का पूरा रोमांच इसी सवाल के इर्द-गिर्द घूमता है।

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अभिनय और परफॉर्मेंस

आलिया भट्ट: पूरी फिल्म का भार आलिया के कंधों पर है। इसमें कोई दोराय नहीं कि वह बेहतरीन अदाकारा हैं, लेकिन फिल्म के शुरुआती हिस्सों में उन्हें एक ‘रफ-टफ’ एक्शन स्टार के रूप में स्वीकार कर पाना दर्शकों के लिए थोड़ा चुनौतीपूर्ण होता है। हालांकि, क्लाइमेक्स तक आते-आते उनका एक्शन अवतार पूरी तरह निखर जाता है, फिर भी उनके किरदार की गहराई में कुछ कमी खलती है।

शरवरी: शरवरी को आलिया की तुलना में स्क्रीन टाइम कम मिला है, जो थोड़ा निराश करता है। इसके बावजूद, वह जितने समय भी पर्दे पर रहीं, अपनी अमिट छाप छोड़ने में कामयाब रहीं। उनके एक्शन मूव्स बेहद उग्र और प्रभावशाली हैं।

बॉबी देओल: ‘एनिमल’ के बाद बॉबी देओल ने एक बार फिर खूंखार विलेन के रूप में अपनी धाक जमाई है। फतेह सिंह लखावत के किरदार में वह डरावने और दमदार नजर आए हैं। उनका स्क्रीन प्रेजेंस फिल्म के रोमांच को बढ़ाता है।

अनिल कपूर और दिव्येंदु: रॉ (RAW) चीफ के रूप में अनिल कपूर ने फिल्म में इमोशनल टच दिया है। उनके चेहरे पर एक मजबूर पिता का दर्द साफ झलकता है। वहीं, साइंटिस्ट के छोटे से रोल में दिव्येंदु भट्टाचार्य अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हैं, हालांकि उनके किरदार को थोड़ा और विस्तार दिया जा सकता था।

ऋतिक रोशन (सरप्राइज पैकेज): फिल्म का असली मास्टरस्ट्रोक ‘वॉर’ के कबीर (ऋतिक रोशन) की एंट्री है। उनकी झलक मिलते ही सिनेमाघर तालियों से गूंज उठता है। ‘अल्फा’ गर्ल्स के साथ मिलकर उनका एक्शन करना फिल्म का सबसे यादगार हिस्सा है।

निर्देशन, विजुअल्स और म्यूजिक

‘द रेलवे मेन’ से अपनी पहचान बनाने वाले शिव रवैल ने बड़े बजट के एक्शन जॉनर में प्रभावशाली शुरुआत की है। उन्हें एक्शन कोरियोग्राफी की गहरी समझ है। ‘शेकी कैमरावर्क’ और लो-एंगल शॉट्स के जरिए उन्होंने स्क्रीन पर जो विजुअल जादू रचा है, वह औसत पटकथा को काफी सहारा देता है।

फिल्म में कम संवादों का इस्तेमाल कर कहानी को एक्शन के जरिए आगे बढ़ाया गया है, जो इसे वास्तविकता के करीब ले जाता है। बैकग्राउंड स्कोर फिल्म की जान है, जो खासकर गन-फाइट सीन्स के दौरान रोमांच को चरम पर पहुंचा देता है।

आखिरी फैसला

बॉलीवुड की पहली महिला-प्रधान स्पाई फिल्म के तौर पर ‘अल्फा’ एक सराहनीय और साहसपूर्ण कदम है। भव्यता, विजुअल्स और कलाकारों की मेहनत फिल्म में साफ दिखाई देती है।

हालांकि, इन सबके बीच फिल्म एक ऐसी दमदार और रूह को छू लेने वाली कहानी बुनने में पीछे रह गई, जो दर्शकों के दिल में लंबे समय तक टिक सके। धमाकों और कैमियो के शोर में फिल्म की मौलिकता कहीं दब सी गई है। ‘अल्फा’ एक अच्छा प्रयास तो है, लेकिन यह उस ऊंचे स्तर तक नहीं पहुंच पाई जिसकी उम्मीद स्पाई यूनिवर्स से की जाती है। कुल मिलाकर, यह एक बार देखी जाने वाली औसत एक्शन फिल्म है।


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