‘ही-मैन’ धर्मेंद्र की विशाल विरासत: कौन होगा वारिस?
नई दिल्ली: बॉलीवुड के सदाबहार अभिनेता धर्मेंद्र, जिनका 24 नवंबर, 2025 को 89 वर्ष की आयु में निधन हो गया, आज हमारे बीच भले ही न हों, लेकिन उनसे जुड़ी यादें, किस्से और उनकी जीवन भर की कमाई करोड़ों दिलों में जीवित है। उनके जाने से देओल परिवार के साथ-साथ देशभर के करोड़ों फैंस गहरे सदमे में हैं।
संपत्ति का लेखा-जोखा: 450 करोड़ की दौलत
धर्मेंद्र की कुल संपत्ति लगभग 450 करोड़ रुपये बताई जा रही है। उनके दो अलग-अलग परिवार हैं, जिनमें बच्चों और पोते-पोतियों की एक बड़ी संख्या शामिल है।
- पहला परिवार: पत्नी प्रकाश कौर, बड़े बेटे सनी देओल, छोटे बेटे बॉबी देओल, और दो बेटियां अजिता व विजेता।
- दूसरा परिवार: पत्नी हेमा मालिनी, और दो बेटियां ईशा देओल व अहाना देओल।
इसके अतिरिक्त, धर्मेंद्र के 13 पोते-पोतियां भी हैं। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि इतनी विशाल संपत्ति का वारिस कौन होगा।
क्या ईशा और अहाना को मिलेगा बराबर का हिस्सा?
सूत्रों के अनुसार, धर्मेंद्र की दूसरी पत्नी हेमा मालिनी से हुई बेटियां, ईशा और अहाना देओल को भी संपत्ति में हिस्सा मिलेगा। कहा जा रहा है कि सनी देओल स्वयं चाहते हैं कि उनकी सौतेली बहनों को पिता की संपत्ति से वंचित न रखा जाए और उन्हें बराबर का हिस्सा मिले।
फर्स्ट पोस्ट के सूत्रों का दावा है कि संपत्ति को लेकर देओल परिवार में किसी भी तरह का विवाद नहीं चल रहा है। धर्मेंद्र हमेशा चाहते थे कि दोनों परिवारों के बच्चे एकजुट रहें। सनी देओल फिलहाल अपने पिता के निधन के शोक में हैं और किसी भी बयान से बचना चाहते हैं, लेकिन वह अपने पिता की इच्छा का सम्मान करते हैं और ईशा व अहाना को परिवार का हिस्सा मानते हैं।
विरासत का वितरण: 6 बच्चे या 13 नाती-पोते?
विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, धर्मेंद्र की 450 करोड़ रुपये की संपत्ति उनके सभी 6 बच्चों में समान रूप से बांटी जाएगी। कुछ अन्य मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया जा रहा है कि धर्मेंद्र चाहते थे कि उनकी संपत्ति उनके 13 पोते-पोतियों में बांटी जाए।
हालांकि, परिवार की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन करीबी सूत्रों का कहना है कि बंटवारा शांति और आपसी सहमति से ही होगा, क्योंकि देओल परिवार हमेशा से एकजुट रहा है और किसी भी तरह का विवाद नहीं चाहता।
भतीजों के नाम की पुश्तैनी जमीन
धर्मेंद्र का अपने पैतृक गांव डांगो से गहरा जुड़ाव था। उन्होंने न केवल परिवार के प्रति जिम्मेदारी निभाई, बल्कि गांव के चाचा-भतीजों पर भी खूब प्यार लुटाया। उन्होंने अपनी पुश्तैनी जमीन का एक बड़ा हिस्सा अपने भतीजों के नाम कर दिया था। धर्मेंद्र का जन्म भले ही नसराली में हुआ था, लेकिन उनका अपनापन और भावनात्मक रिश्ता हमेशा डांगो गांव से रहा। उनकी 95 वर्षीय चाची प्रीतम कौर आज भी गांव में रहती हैं और परिवार के इस स्नेह को याद करती हैं।
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