अनुपम खेर का आलोचकों पर ‘1000 करोड़ी’ प्रहार: बोले- “प्रोपेगैंडा कहने वालों को जनता ने जड़ा करारा तमाचा”
बॉलीवुड के मंझे हुए अभिनेता अनुपम खेर अपनी बेबाकी के लिए मशहूर हैं। हाल ही में उन्होंने उन आलोचकों की जमकर क्लास लगाई है जो उनकी फिल्मों को ‘प्रोपेगैंडा’ (एजेंडा आधारित) का टैग देते हैं। एक विशेष बातचीत में अभिनेता ने स्पष्ट किया कि अब वह ऐसे आरोपों को पूरी तरह नजरअंदाज करते हैं, क्योंकि बॉक्स ऑफिस पर फिल्म को मिलने वाला प्यार और उसकी कमाई खुद सच्चाई बयां कर देती है। खेर ने अपनी हालिया ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘धुरंधर’ की सफलता का जिक्र करते हुए इसे विरोधियों के दावों पर एक जोरदार पलटवार बताया है।
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इंडिया टुडे को दिए इंटरव्यू में अनुपम खेर ने तर्क दिया कि जब दर्शक किसी फिल्म को सिर-आंखों पर बिठाते हैं, तो ‘प्रोपेगैंडा’ जैसे खोखले दावे बेअसर हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि ‘धुरंधर’ की करीब 1,000 करोड़ रुपये की बंपर कमाई ही आलोचकों के लिए सबसे बड़ा जवाब है। अपनी फिल्मों को लेकर हो रहे शोर पर अभिनेता ने दो टूक कहा कि वह अब उन लोगों को अहमियत नहीं देते जो उनकी कला को किसी एजेंडे का हिस्सा बताते हैं।
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71 वर्षीय अभिनेता ने तीखा प्रहार करते हुए कहा, “मैंने उन लोगों पर प्रतिक्रिया देना छोड़ दिया है जो हर चीज को प्रोपेगैंडा कहते हैं। वे दुनिया के सबसे बड़े पाखंडी हैं। ये वे लोग हैं जो फाइव-स्टार होटलों में बैठकर शैंपेन पीते हैं और भारत की गरीबी पर लेक्चर देते हैं। मुझे उनकी रत्ती भर परवाह नहीं है।” खेर ने याद दिलाया कि ‘द कश्मीर फाइल्स’ और ‘धुरंधर’ जैसी फिल्मों को बदनाम करने की कोशिश की गई, लेकिन उनकी व्यावसायिक सफलता ने सबका मुंह बंद कर दिया।
उन्होंने आगे तंज कसते हुए कहा, “समस्या यह है कि इन लोगों को समझ नहीं आता कि मेरे साथ क्या किया जाए। मैं कोई क्रूसेडर नहीं, बल्कि एक ऐसा कलाकार हूं जो लोगों से जुड़ना पसंद करता है। उन्होंने मेरी फिल्मों को प्रोपेगैंडा कहा, लेकिन जनता ने उन्हें 1000 करोड़ का बिजनेस कराके करारा तमाचा जड़ा है। मजेदार बात यह है कि जब फिल्म हिट हो जाती है, तो ये लोग नया राग अलापने लगते हैं कि निर्माताओं ने पैसा वापस क्यों नहीं किया।”
प्रोपेगैंडा के लेबल को खारिज करते हुए खेर ने एक दिलचस्प तर्क दिया। उन्होंने कहा कि अगर सिर्फ एजेंडा ही सफलता की गारंटी होता, तो हर ऐसी फिल्म ब्लॉकबस्टर होती। “हम डकैतों पर फिल्म बनाते हैं और वह सुपरहिट हो जाती है, तब उसे कोई एजेंडा नहीं कहता। अगर प्रोपेगैंडा से ही फिल्में चलतीं, तो विवेक ओबेरॉय की ‘पीएम नरेंद्र मोदी’ बायोपिक को भी सुपरहिट होना चाहिए था, लेकिन दर्शकों ने उसे नहीं अपनाया। अगर यह फॉर्मूला इतना ही आसान होता, तो हर बड़ा डायरेक्टर या प्रोड्यूसर सिर्फ तथाकथित प्रोपेगैंडा फिल्में ही बनाता।”
अभिनेता ने जोर देते हुए कहा, “इस तर्क के हिसाब से तो चोटी के निर्देशकों की हर फिल्म सुपर-डुपर हिट होनी चाहिए थी। सच्चाई यह है कि फिल्म तभी चलती है जब दर्शक उससे जुड़ते हैं।” ‘खोसला का घोसला’ फेम अभिनेता ने अपनी बात खत्म करते हुए कहा कि दर्शक विचारधारा नहीं, बल्कि भावनाओं (इमोशंस) को देखकर सिनेमाघर जाते हैं। फिल्म की अंतिम सफलता केवल इस बात पर टिकी है कि वह दर्शकों के दिल को छूती है या नहीं।
वर्क फ्रंट पर अनुपम खेर:
अनुपम खेर जल्द ही ‘श्री राम भूमि’ में मुख्य भूमिका निभाते नजर आएंगे। इस फिल्म का निर्देशन कामाख्या नारायण सिंह ने किया है, जो हाल ही में ‘द केरला स्टोरी 2’ के निर्देशन के लिए चर्चा में रहे थे। फिल्म में ऋत्विक भौमिक और अमृता खानविलकर भी अहम भूमिकाओं में हैं। इस बड़े प्रोजेक्ट को अनुया चौहान कुडेचा, रितेश कुडेचा और गिरीश जौहर सहित कई दिग्गज निर्माताओं का समर्थन प्राप्त है। इसके अलावा, खेर अपनी कल्ट क्लासिक फिल्म के सीक्वल ‘खोसला का घोसला 2’ को लेकर भी सुर्खियों में हैं।
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