जावेद अख्तर के बयान पर मचा बवाल: देवबंद में तालिबान मंत्री के स्वागत पर उठाए सवाल, सोशल मीडिया पर हुए ट्रोल
गीतकार, पटकथा लेखक और शायर जावेद अख्तर इस वक्त सोशल मीडिया पर जबरदस्त तरीके से ट्रोल हो रहे हैं। वजह है उनका एक बयान, जो उन्होंने अफगानिस्तान के विदेश मंत्री आमिर Khan Muttaqi पर दिया है। दरअसल, उन्हें आमिर Khan Muttaqi को दिया गया भव्य स्वागत पसंद नहीं आया और उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर इसका गुस्सा निकाला।
उन्होंने ट्वीट किया, “दुनिया के सबसे खूंखार आतंकवादी समूह तालिबान के प्रतिनिधि को हर तरह के आतंकवादियों के ख़िलाफ़ मंच पर बोलने वालों द्वारा दिए गए सम्मान और स्वागत को देखकर मेरा सिर शर्म से झुक जाता है।”
उन्होंने आगे लिखा, “देवबंद को भी शर्म आनी चाहिए कि उसने अपने इस्लामिक हीरो का इतना सम्मानपूर्वक स्वागत किया, जो उन लोगों में से एक है जिन्होंने लड़कियों की शिक्षा पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है। मेरे भारतीय भाइयों और बहनों!!! हमारे साथ क्या हो रहा है?”
देवबंद ने किया आमिर Khan Muttaqi का भव्य स्वागत
आपको बता दें कि शनिवार को देवबंद मदरसा ने आमिर Khan Muttaqi का भव्य स्वागत किया था, जिसके लिए व्यापक व्यवस्थाएं की गई थीं। तालिबान नेता का स्वागत करने के लिए 15 प्रमुख उलेमाओं (इस्लामी विद्वानों) की सूची जारी की गई थी, और उनकी यात्रा के दिन पूरे क्षेत्र में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था लागू थी।
अफगानिस्तान के नेता पर फूल भी बरसाए गए
मदरसे के रेक्टर मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी ने स्वागत समारोह की निगरानी की और वरिष्ठ विद्वानों के साथ अफगान मंत्री का अभिवादन किया। इसके अतिरिक्त, अफगानिस्तान के नेता पर फूल भी बरसाए गए थे और कई छात्र उनके दल के साथ सेल्फी लेने के लिए भी बेकरार नजर आए।
जावेद अख्तर की बातें लोगों को पसंद नहीं आईं
लेकिन जावेद अख्तर की यह बात कुछ लोगों को पसंद नहीं आई और वे उन्हें जबरदस्त ढंग से ट्रोल करने लगे। एक यूजर ने लिखा, ‘आपने ही तो लिखा था शोले में कि लोहा लोहे को काटता है।’ तो एक ने लिखा, ‘क्या यह सिर्फ तालिबान के बारे में है? हम अपने ही देश में महिलाओं के मस्जिदों में प्रवेश पर लगे प्रतिबंधों पर सवाल क्यों नहीं उठाते? अक्सर यही जवाब सुनने को मिलता है, ‘यह हमारी परंपरा है।’
‘परंपरा कब तक उत्पीड़न का बहाना बनी रहेगी’
‘लेकिन परंपरा कब तक उत्पीड़न का बहाना बनी रहेगी? 1866 में स्थापित देवबंद का इतिहास देखिए, यह मदरसा आज भी उसी विचारधारा पर आधारित है जिसने कभी तालिबान को प्रेरित किया था। लेकिन क्या हम सचमुच इस सच्चाई से आँखें मूंद सकते हैं? कुछ लोग तर्क देते हैं कि यह सब भू-राजनीति और निहित स्वार्थों का मामला है। ठीक है, लेकिन क्या स्वार्थों के नाम पर मानवता को कुचलना कभी जायज है?’
‘मुस्लिम महिलाओं को मस्जिदों में प्रवेश नहीं करने दिया गया’
तो वहीं एक ने लिखा, ‘आपको शर्म से सिर झुकाने का मन नहीं हुआ जब मुस्लिम महिलाओं को मस्जिदों में प्रवेश नहीं करने दिया गया, उन्हें बहुविवाह, बाल विवाह, खतना, तीन तलाक, मिस्यार निकाह और निकाह हलाला जैसी कुप्रथाओं का सामना करना पड़ा, जब छोटी लड़कियों की शादी अमीर अरबों से कर दी गई, जब बांग्लादेश या पश्चिम बंगाल में हिंदुओं का नरसंहार हुआ?’ कुल मिलाकर, इस वक्त जबरदस्त ढंग से जावेद अख्तर ट्रोल हो रहे हैं और लोग उनकी जमकर आलोचना कर रहे हैं।
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