मनोरंजन की दुनिया में तहलका: ‘धुरंधर’ के ‘ए’ सर्टिफिकेट और रिकॉर्ड-तोड़ रनटाइम ने मचाया शोर
लेखक: शशांक मणि पांडेय
अपडेट: बुधवार, 3 दिसंबर, 2025, 13:21 [IST]
‘धुरंधर’ का ‘ए’ सर्टिफिकेट: रणवीर सिंह के करियर में पहली बार, केवल 18+ दर्शक ही देख पाएंगे!
रणवीर सिंह की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘धुरंधर’ 5 दिसंबर को सिनेमाघरों में दस्तक देने के लिए पूरी तरह तैयार है। सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) द्वारा इसे ‘ए’ (एडल्ट) सर्टिफिकेट मिलने से यह फिल्म अब रणवीर के 15 साल लंबे करियर की पहली ‘ए’ रेटेड फिल्म बन गई है। इसका मतलब है कि केवल 18 वर्ष से अधिक आयु के दर्शक ही इस रोमांचक कहानी का अनुभव कर पाएंगे। खास बात यह है कि फिल्म दो हिस्सों में रिलीज होगी, और सेंसर बोर्ड ने कुछ अहम कट्स भी सुझाए हैं।
लंबी अवधि और तीव्र हिंसा: ‘धुरंधर’ बनी चर्चा का केंद्र
फिल्म के ट्रेलर में दिखाई गई तीव्र हिंसा को देखते हुए ‘ए’ सर्टिफिकेट की उम्मीद पहले से ही लगाई जा रही थी। लेकिन ‘धुरंधर’ की अवधि भी आजकल चर्चाओं में है। इसका फाइनल कट 214.01 मिनट, यानी 3 घंटे 34 मिनट 01 सेकंड का है, जो इसे पिछले 17 वर्षों की सबसे लंबी भारतीय फिल्मों में से एक बनाता है। इस महाकाव्य ने ‘जोधा-अकबर’ (214 मिनट) को मात्र एक सेकंड से पीछे छोड़ते हुए यह अनूठा रिकॉर्ड अपने नाम किया है। फिल्म की यह असाधारण लंबाई निश्चित रूप से इसके भव्य पैमाने और व्यापक कहानी की ओर इशारा करती है।
CBFC के सुझाव: ‘धुरंधर’ में हुए महत्वपूर्ण बदलाव
सेंसर बोर्ड ने फिल्म को हरी झंडी देने से पहले कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए। सबसे पहले, फिल्म की शुरुआत में एक विस्तृत वॉयसओवर जोड़ने और उसकी अवधि बढ़ाने का निर्देश दिया गया। इसके अतिरिक्त, जहां-जहां भी ड्रग्स या धूम्रपान के दृश्य दिखाए गए थे, वहां ‘नो स्मोकिंग’ और ‘से नो टू ड्रग्स’ जैसी चेतावनी जारी करने का आदेश दिया गया। शुरुआत के कुछ हिंसक दृश्यों को हटाकर उनकी जगह वैकल्पिक शॉट्स लगाए गए।
फिल्म के दूसरे हाफ में भी कुछ तीव्र हिंसक दृश्यों को छोटा किया गया। साथ ही, एक मंत्री के किरदार का नाम बदला गया और एक आपत्तिजनक शब्द को म्यूट कर दिया गया। फिल्म के अंत में क्रेडिट्स के दौरान कुछ अतिरिक्त गाने और दृश्य भी जोड़े गए, ताकि फिल्म का अनुभव अधिक संतुलित और संपूर्ण लगे।
मेजर मोहित शर्मा विवाद पर सेंसर बोर्ड का स्पष्टीकरण
फिल्म के मेजर मोहित शर्मा के जीवन से प्रेरित होने के आरोपों पर, उनके माता-पिता ने दिल्ली हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की थी। कोर्ट के निर्देश पर CBFC ने फिल्म की गहन जांच की और स्पष्ट किया कि इसका मेजर मोहित शर्मा के जीवन, मिशन या किसी भी वास्तविक घटना से कोई संबंध नहीं है। फिल्म निर्माता भी अपने डिस्क्लेमर में यही बात दोहराते हैं और इसे पूर्णतः काल्पनिक बताते हैं।
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