अभिनय के महारथी संजय मिश्रा: 62वें जन्मदिन पर जानिए उनके जीवन की अनमोल दास्तां
हिंदी सिनेमा के गलियारों में गिने-चुने ही ऐसे कलाकार हुए हैं जिन्होंने अपनी दमदार अदाकारी से, चाहे वो संजीदा किरदार हों या फिर हास्य, दर्शकों के दिलों में एक खास मुकाम बनाया है। ऐसे ही एक बेमिसाल फनकार हैं संजय मिश्रा। हर भाव, हर पल को अपनी अभिनय क्षमता से जीवंत कर देने वाले संजय मिश्रा, आज यानी 6 अक्तूबर को अपना 62वां जन्मदिन मना रहे हैं। तो आइए, इस खास मौके पर जानते हैं उनके जीवन से जुड़ी कुछ ऐसी बातें जो यकीनन आपको भी रोचक लगेंगी…
जन्म और आरंभिक जीवन: दरभंगा से दिल्ली तक का सफर
06 अक्तूबर 1963 को बिहार के दरभंगा की पावन धरती पर संजय मिश्रा का जन्म हुआ। उनके पिता प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो में एक सरकारी अधिकारी थे। पिता के स्थानांतरण के साथ ही उनका परिवार बनारस आ बसा, और फिर दिल्ली। दिल्ली में ही संजय मिश्रा ने प्रतिष्ठित नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में दाखिला लिया। यहां तीन साल तक अभिनय की बारिकियों को सीखने के बाद, उन्होंने अपने अभिनय का परचम लहराने का निर्णय लिया।
गुमनामी का दौर: जब ‘राजपाल यादव’ समझा गया
साल 1995 में फिल्म ‘ओह डार्लिंग ये है इंडिया’ से संजय मिश्रा ने हिंदी फिल्म जगत में अपनी पहली दस्तक दी। इसके बाद ‘दिल से’, ‘फिर भी दिल है हिंदुस्तानी’, ‘राजकुमार’, ‘सत्या’, ‘अलबेला’, ‘साथिया’ जैसी कई फिल्मों में उन्होंने अपने अभिनय का जलवा बिखेरा। लेकिन, एक ऐसा भी दौर आया जब इतनी फिल्मों में काम करने के बावजूद संजय मिश्रा की पहचान नहीं थी। उन्होंने एक इंटरव्यू में साझा किया था कि लोग उन्हें पहचानते तक नहीं थे। एक बार तो एक शख्स ने उन्हें राजपाल यादव समझ लिया और उनकी फिल्म ‘भूल भुलैया’ का जिक्र किया। इस किस्से ने संजय मिश्रा को उस वक्त की अपनी गुमनामी का अहसास कराया।
एक अनूठा कमबैक: ढाबे से फिर सिल्वर स्क्रीन तक
जीवन की एक ऐसी घड़ी आई जब संजय मिश्रा ने अभिनय से किनारा कर लिया और ऋषिकेश में एक ढाबे पर खाना बनाने का काम करने लगे। यह बात भी उन्होंने खुद बताई थी। एक गंभीर बीमारी से जूझने के बाद, जैसे-तैसे वह ठीक हुए, लेकिन इसी बीच उनके पिता का निधन हो गया। इस गहरे सदमे ने उन्हें तोड़ दिया और उन्होंने परिवार के साथ-साथ अभिनय को भी अलविदा कह दिया। ऋषिकेश में उन्होंने पैसे कमाने के लिए एक ढाबे पर काम शुरू कर दिया।
लेकिन, किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। फिल्म निर्देशक रोहित शेट्टी ने उन्हें खोज निकाला और ‘ऑल द बेस्ट’ फिल्म से संजय मिश्रा ने एक दमदार वापसी की। इस फिल्म ने उनके करियर को एक नई दिशा दी और वे एक बार फिर दर्शकों के दिलों में छा गए। उन्होंने कलात्मक फिल्मों के साथ-साथ व्यावसायिक फिल्मों में भी अपनी अमिट छाप छोड़ी है, और आज तक वे 205 से भी अधिक फिल्मों में अपने अभिनय का लोहा मनवा चुके हैं।
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