इंडिपेंडेंट फिल्मों का सफर: धर्मशाला में किरण राव के बेबाक विचार
धर्मशाला: भारत में स्वतंत्र सिनेमा का सफर हमेशा से कांटों भरा रहा है। कहानी की गहराई हो या अभिनय की बारीकियां, इन फिल्मों को निर्माण के बाद सही श्रोताओं तक पहुँचाना एक टेढ़ी खीर है। इसी अहम मुद्दे पर जानी-मानी फिल्मकार किरण राव ने 14वें धर्मशाला इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (डीआईएफएफ) के मंच से अपने विचार साझा किए।
किरण राव ने स्वीकार किया कि हाल के वर्षों में डिजिटल मंचों ने फिल्मों को व्यापक दर्शकों तक पहुँचाने का मार्ग प्रशस्त किया है, पर सिनेमा हॉल में जाकर फिल्म देखने का अनुभव आज भी अतुलनीय है।
उन्होंने बताया कि फिल्म निर्माण और वितरण के क्षेत्र में कई बड़े परिवर्तन हुए हैं, लेकिन वर्तमान परिदृश्य में भी कई बाधाएं मौजूद हैं।
अपने संबोधन की शुरुआत भारत की ऑस्कर हेतु भेजी गई फिल्म ‘होमबाउंड’ का उल्लेख करते हुए, किरण राव ने कहा कि दर्शकों की पसंद में अभूतपूर्व बदलाव आया है।
पूर्व में जहाँ दर्शक मुख्य रूप से बड़े सितारों और पारंपरिक कथाओं तक ही सीमित थे, वहीं आज वे अनूठी कहानियों और अलग हटकर बनी फिल्मों में भी गहरी रुचि ले रहे हैं। इस बदलाव का एक प्रमुख कारण विभिन्न स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स हैं, जो फिल्मों को दर्शकों के घरों तक पहुँचाने में सहायक सिद्ध हो रहे हैं। यह परिवर्तन स्वतंत्र फिल्मों के लिए एक शुभ संकेत है, क्योंकि अब उनकी कहानियों को देखने वाले दर्शकों की संख्या में इजाफा हो रहा है।
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