भारत-ईयू संबंधों का नया उदय: ‘सभी समझौतों की जननी’ के साथ रणनीतिक साझेदारी में आया ऐतिहासिक मोड़
भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के रिश्तों में एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने अपनी ऐतिहासिक तीन दिवसीय राजकीय यात्रा का सफलतापूर्वक समापन किया। इस कूटनीतिक दौरे का सबसे बड़ा हासिल रहा—13 महत्वपूर्ण समझौते, जिन्होंने भारत-ईयू रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती प्रदान की है। इनमें बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौता (FTA) और एक अभूतपूर्व रक्षा सहयोग शामिल है। विदेश मंत्रालय ने ‘एक्स’ पर जानकारी साझा करते हुए इस यात्रा को ‘अत्यंत सफल’ बताया, जिसमें कोस्टा और वॉन डेर लेयेन के प्रस्थान के साथ ही दोनों शक्तियों के बीच सहयोग की एक नई लकीर खींच दी गई है।
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मंत्रालय की पोस्ट के अनुसार, यह यात्रा भारतीय कूटनीति के लिए मील का पत्थर साबित हुई है। ईयू के इन दोनों शीर्ष नेताओं की मौजूदगी में हुए 13 समझौतों ने भारत-ईयू साझेदारी की गहराई और व्यापकता को एक नया विस्तार दिया है। इन समझौतों का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा, क्योंकि इससे भारतीय वस्तुओं और सेवाओं के लिए यूरोप के विशाल बाज़ार के द्वार पूरी तरह खुल जाएंगे। मंत्रालय ने जोर देकर कहा कि ये निष्कर्ष न केवल बाज़ार तक पहुंच बढ़ाएंगे, बल्कि देश में बड़े पैमाने पर रोज़गार और नए अवसर पैदा करेंगे, जो अंततः जन-जन की प्रगति का आधार बनेंगे। विशेष रूप से, दोनों पक्षों ने मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर बातचीत पूरी कर एक ऐसे ऐतिहासिक दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसे विशेषज्ञ “सभी समझौतों की जननी” कह रहे हैं।
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यह समझौता भारत की सबसे रणनीतिक और आधुनिक आर्थिक साझेदारियों में से एक है। इसे 21वीं सदी की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए एक नियम-आधारित ढांचे के रूप में विकसित किया गया है, जो दुनिया की दूसरी और चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच एक गहरा एकीकरण सुनिश्चित करेगा। आर्थिक मोर्चे के साथ-साथ, दोनों पक्षों ने एक ऐतिहासिक ‘सुरक्षा एवं रक्षा साझेदारी’ समझौते पर भी मुहर लगाई है। यह ईयू के साथ भारत का पहला व्यापक रक्षा ढांचा है, जिसके तहत रणनीतिक और वैश्विक सुरक्षा मुद्दों पर सहयोग को और प्रगाढ़ किया जाएगा। इस हस्ताक्षर के साथ ही भारत, जापान और दक्षिण कोरिया के बाद यूरोपीय संघ के साथ ऐसा रक्षा समझौता करने वाला तीसरा एशियाई देश बन गया है। इस भव्य यात्रा के दौरान व्यापार, रक्षा, स्वच्छ ऊर्जा, विज्ञान, आवागमन और आपदा प्रबंधन जैसे विविध क्षेत्रों को कवर करने वाले कुल 13 समझौतों ने भविष्य की एक सशक्त साझेदारी की नींव रख दी है।
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