हजारों छात्रों और युवाओं के जोश के बीच राहुल गांधी ने एक बेहद गहरे विषय को छेड़ा। उन्होंने सीधा संवाद करते हुए कहा, “मैं आज आपसे आपके दर्द, आपके डेटा और आपकी दौलत के बारे में बात करना चाहता हूं।” उन्होंने जोर देकर कहा कि हिंदुस्तान के 40 करोड़ युवा ही इस देश की असली शक्ति हैं। उनके अनुसार, 21वीं सदी में भारत की प्रगति के दो ही मुख्य स्तंभ होंगे: युवाओं की असीम ऊर्जा और उनका डेटा। राहुल गांधी ने एक महत्वपूर्ण सूत्र साझा किया— ‘युवा + डेटा = 21वीं सदी की इकॉनमी’। उन्होंने स्पष्ट किया कि डेटा के बिना आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का कोई अस्तित्व नहीं है; डेटा से AI का निर्माण संभव है, लेकिन AI कभी डेटा पैदा नहीं कर सकता।
युवा शक्ति का जिक्र करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि भारत के 40 करोड़ युवाओं की क्षमता का मुकाबला अमेरिका, चीन या रूस जैसा कोई भी देश नहीं कर सकता। लेकिन विडंबना यह है कि आज भारत में रोजगार के तमाम दरवाजे बंद नजर आ रहे हैं। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज के दौर में शैक्षणिक प्रमाण पत्रों का मूल्य गिरता जा रहा है, क्योंकि ये डिग्रियां अब युवाओं को नौकरी की गारंटी नहीं दे पा रही हैं।
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