
- हिंद-प्रशांत की सुरक्षा: चुनौतियों पर ‘महामंथन’
- रणनीतिक तालमेल: अभ्यासों से बढ़ेगी ताकत
- कूटनीतिक सक्रियता: अमेरिकी सांसदों और रक्षा सचिव की बैठक
- तकनीकी और औद्योगिक मोर्चे पर साझेदारी
- युद्ध अभ्यास 2026: मैदान में कौशल का प्रदर्शन
- महाजन रेंज पहुंचे अमेरिकी राजदूत: भरोसे की नई इबारत
- साझा विजन पर सर्जियो गोर का अनुभव
हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र के तेजी से बदलते सुरक्षा समीकरणों के बीच भारत और अमेरिका ने अपने सैन्य रिश्तों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का संकल्प लिया है। नई दिल्ली में सोमवार को हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में दोनों देशों ने रक्षा क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग को और अधिक सशक्त बनाने पर विस्तृत चर्चा की। आईएएनएस के अनुसार, यह महत्वपूर्ण संवाद भारतीय थलसेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ और अमेरिकी सेना प्रशांत (USARPAC) के डिप्टी कमांडिंग जनरल लेफ्टिनेंट जनरल जोएल बी. वोवेल के बीच संपन्न हुआ।
हिंद-प्रशांत की सुरक्षा: चुनौतियों पर ‘महामंथन’
भारतीय थलसेना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ के माध्यम से इस रणनीतिक मुलाकात की जानकारी दी। 28 सितंबर को हुई इस बैठक में दोनों सैन्य दिग्गजों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में उभरती सुरक्षा चुनौतियों का बारीकी से विश्लेषण किया। चर्चा का मुख्य केंद्र भविष्य की सुरक्षा स्थितियों को देखते हुए भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग के नए द्वार खोलना और साझा हितों को मजबूती प्रदान करना रहा।
रणनीतिक तालमेल: अभ्यासों से बढ़ेगी ताकत
बैठक में दोनों सेनाओं के बीच ‘इंटरऑपरेबिलिटी’ यानी आपसी सामंजस्य को बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया। भारतीय थलसेना के अनुसार, ‘युद्ध अभ्यास’ जैसे सफल सैन्य आयोजनों ने यह साबित कर दिया है कि दोनों सेनाएं संयुक्त अभियानों के लिए पूरी तरह तैयार हैं। यह तालमेल न केवल सैन्य कौशल को बढ़ाता है, बल्कि वैश्विक स्तर पर दोनों देशों की मज़बूत सैन्य प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।
कूटनीतिक सक्रियता: अमेरिकी सांसदों और रक्षा सचिव की बैठक
रक्षा क्षेत्र में यह सक्रियता केवल सैन्य स्तर तक ही सीमित नहीं रही। सोमवार को ही रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने अमेरिकी संसद के एक द्विदलीय प्रतिनिधिमंडल के साथ अहम बैठक की, जिसका नेतृत्व अमेरिकी प्रतिनिधि ब्रायन मस्त कर रहे थे। इस दौरान भारत-अमेरिका की व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को प्रगाढ़ करने के साथ-साथ रक्षा औद्योगिक और तकनीकी सहयोग (iCET) के एजेंडे पर गंभीरता से बात की गई।
तकनीकी और औद्योगिक मोर्चे पर साझेदारी
रक्षा मंत्रालय ने इस मुलाकात के बारे में बताया कि चर्चा का मुख्य फोकस रक्षा उद्योग के बदलते आयामों पर था। दोनों देशों ने भविष्य की आधुनिक तकनीकों के क्षेत्र में मिलकर काम करने और रक्षा उत्पादन में एक-दूसरे का सहयोग करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाने पर सहमति जताई है।
युद्ध अभ्यास 2026: मैदान में कौशल का प्रदर्शन
पिछले सप्ताह ‘युद्ध अभ्यास 2026’ के तहत भारत और अमेरिका की सैन्य टुकड़ियों ने कठिन सामरिक परिस्थितियों में एक साथ पसीना बहाया। विभिन्न युद्धक प्लेटफॉर्म्स के जरिए किए गए इस संयुक्त प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य परिचालन प्रक्रियाओं की गहरी समझ विकसित करना और दोनों सेनाओं की युद्धक क्षमता को चरम पर ले जाना था।
महाजन रेंज पहुंचे अमेरिकी राजदूत: भरोसे की नई इबारत
राजस्थान की तपती रेत के बीच महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में सैन्य तैयारियों का जायजा लेने खुद अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर पहुंचे। उन्होंने संयुक्त प्रशिक्षण को भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी की मजबूती का प्रतीक बताया। राजदूत ने दोनों सेनाओं के बीच बढ़ते भरोसे और तत्परता की जमकर सराहना की।
साझा विजन पर सर्जियो गोर का अनुभव
अमेरिकी राजदूत ने सोशल मीडिया पर अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि भारतीय और अमेरिकी सैनिकों को एक साथ कंधे से कंधा मिलाकर प्रशिक्षण लेते देखना वाकई गौरवपूर्ण था। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह अभ्यास दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास, इंटरऑपरेबिलिटी और साझा रणनीतिक उद्देश्यों की अटूट कड़ी को दर्शाता है।
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The post हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत-अमेरिका का क्या है प्लान? दिल्ली में जनरल धीरज सेठ और US जनरल वोवेल ने की हाई लेवल मीटिंग appeared first on Aware Media.
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