E20 विवाद: कर्नाटक सरकार द्वारा हाल ही में इथेनॉल ब्लेंडिंग की एक बड़ी जांच कराई गई, जिसके तहत 7 जिलों से 14 सैंपल लैब में परीक्षण के लिए भेजे गए थे. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपने एक्स (ट्विटर) हैंडल पर एक पोस्ट साझा करते हुए तेल कंपनियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उनके मुताबिक, इन 14 में से 11 सैंपल ऐसे निकले जिनमें इथेनॉल की मात्रा निर्धारित 20 प्रतिशत से काफी अधिक पाई गई. यहाँ तक कि कुछ तेल नमूनों में तो यह मात्रा 32 प्रतिशत तक दर्ज की गई है. आइए गहराई से समझते हैं कि अगर इथेनॉल कंपनियों पर लग रहे ये संगीन आरोप सच साबित होते हैं, तो इससे आपकी प्यारी गाड़ी को कितना भारी नुकसान झेलना पड़ सकता है. साथ ही, यह भी जानते हैं कि क्या ऐसा करना किसी कानून का सीधा उल्लंघन है?
अगर E20 में 30 फीसद इथेनॉल का दावा सही, तो क्या कानून तोड़ रही तेल कंपनियां?
– E20 में 20 फीसद से ज्यादा इथेनॉल मिलाना नियमों और मानकों का उल्लंघन है
देशभर के पेट्रोल पंपों पर बिकने वाला ईंधन हमेशा भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के तय पैमानों के बिल्कुल अनुरूप होना चाहिए. यदि सरकार या बड़ी तेल कंपनियां कागजों पर 20% एथेनॉल (E20) का दावा कर अंदरखाने गुपचुप तरीके से 30% (E30) तक की मिलावट कर रही हैं, तो यह सीधे तौर पर कानून की खुली अवहेलना है. बिना किसी आधिकारिक सरकारी अनुमति के ऐसा करना आवश्यक वस्तु अधिनियम और पेट्रोलियम नियमों के अंतर्गत एक बेहद गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है.
– गाड़ियों की खराबी की आशंका और ग्राहकों के अधिकार का भी उल्लंघन है
गौरतलब है कि वर्तमान में भारतीय सड़कों पर दौड़ रही ज्यादातर गाड़ियां केवल E20 ईंधन की तकनीकी क्षमता के हिसाब से ही डिजाइन की गई हैं. ऐसे में, बिना किसी पूर्व सार्वजनिक चेतावनी या तकनीकी सुरक्षा जांच के 25% या 30% एथेनॉल युक्त पेट्रोल बेचना किसी भी वाहन के इंजन को अंदर से पूरी तरह बर्बाद कर सकता है. इस स्थिति में तेल कंपनियों और उनके डीलरों पर उपभोक्ता संरक्षण कानून (Consumer Protection Act) के तहत आम ग्राहकों के अधिकारों के हनन का सीधा और मजबूत मामला बनता है.
कोर्ट की सख्त नजर और कानूनी कार्रवाई
‘E20 को बताया 420’, राहुल गांधी का केंद्र पर हमला
राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर तीखा राजनीतिक हमला बोलते हुए ‘E20’ को नया नाम देकर ‘420’ करार दिया है. उन्होंने जोरदार आरोप लगाया कि महंगे पेट्रोल में 20% की तय सीमा से ज्यादा एथेनॉल मिलाकर सीधे तौर पर देश की आम जनता की जेब काटी जा रही है. उन्होंने अपने दावों में बताया कि IOCL के पेट्रोल में 31.2% और HPCL में 30.5% तक एथेनॉल की मिलावट पकड़ी गई है, जबकि BPCL, Nayara और Shell जैसी अन्य बड़ी कंपनियों ने भी तय सीमा को लांघ दिया है. राहुल के अनुसार, महंगे दामों पर अत्यधिक एथेनॉलयुक्त पेट्रोल मिलने से लोगों की गाड़ियां तेजी से खराब हो रही हैं और उनका माइलेज भी धड़ाम से गिर रहा है. उन्होंने सीधे तौर पर पीएम मोदी से सवाल किया कि आखिर देशवासियों की गाड़ियों की टंकियों में असल में क्या डाला जा रहा है और इन लापरवाह कंपनियों पर नकेल कसते हुए कार्रवाई कब की जाएगी.
IOCL ने किया आरोपों को खारिज
E20 फ्यूल के 5 फायदे
- 20% एथेनॉल का संतुलित मिश्रण होने की वजह से ईंधन बहुत ही साफ तरीके से जलता है, जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुँचाने वाली हानिकारक गैसों का उत्सर्जन काफी हद तक घट जाता है और हमारी आबोहवा सुरक्षित रहती है.
- विदेशों से आयात किए जाने वाले महंगे कच्चे तेल पर देश की निर्भरता में कमी आती है, जिससे भारत के अरबों रुपये की बेशकीमती विदेशी मुद्रा की भारी बचत होती है.
- एथेनॉल का मुख्य उत्पादन देश के भीतर ही गन्ने और अतिरिक्त खाद्यान्न से होने के कारण सीधे तौर पर हमारे अन्नदाता किसानों की आमदनी में उल्लेखनीय इजाफा होता है.
- विदेशों से तेल का आयात घटने और स्थानीय स्तर पर ही बायोफ्यूल तैयार होने से देश के घरेलू उद्योगों को मजबूती मिलती है और रोजगार के नए अवसर पैदा होते हैं.
- साधारण पेट्रोल में सही मात्रा में एथेनॉल मिलने से फ्यूल की ऑक्टेन रेटिंग में सुधार होता है, जिससे इंजन के भीतर कंबशन यानी दहन प्रक्रिया कहीं अधिक बेहतर हो जाती है.
20% से ज्यादा एथेनॉल के 5 नुकसान
- सामान्य पेट्रोल की तुलना में एथेनॉल के अंदर ऊर्जा का घनत्व कम होता है, जिसके परिणामस्वरूप गाड़ी के माइलेज में भारी गिरावट देखने को मिलती है.
- एथेनॉल अपनी मूल प्रकृति से काफी अधिक एसिडिक यानी संक्षारक होता है, जो गाड़ी के फ्यूल पाइप, रबर गैस्केट और एल्युमिनियम के नाज़ुक पुर्जों को तेजी से गलाने लगता है.
- एथेनॉल की यह फितरत होती है कि वह हवा से नमी और पानी को बहुत जल्दी सोख लेता है, जिससे गाड़ी की मुख्य फ्यूल टंकी के अंदर अंदरूनी जंग लगने का खतरा पैदा हो जाता है.
- टंकी में जंग लगने और लगातार कचरा जमने से गाड़ी के फ्यूल इंजेक्टर और थ्रोटल बॉडी पूरी तरह जाम हो जाते हैं, जिससे वाहन अचानक पिकअप छोड़ देता है और बार-बार झटके लेने लगता है.
- तय सीमा से अत्यधिक एथेनॉल पुराने और गैर-अनुकूल इंजनों के अंदरूनी हिस्सों को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर देता है, जिससे समय से पहले ही इंजन सीज होने का बड़ा जोखिम मंडराने लगता है.
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