FCRA Amendment Bill पर सरकार-विपक्ष आमने-सामने, गृह मंत्रालय बोला- ‘किसी समुदाय को निशाना नहीं, राष्ट्रीय सुरक्षा मुख्य मुद्दा’

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PEEYUSH UPADHYAY
पीयुष उपाध्याय एक अनुभवी समाचार संपादक हैं, जो Aware Media Network के लिए देश-दुनिया की प्रमुख खबरों, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग सुनिश्चित करते हैं। उनका अनुभव...
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विदेशी योगदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच मतभेद जारी हैं। विपक्ष और कुछ धार्मिक संगठनों का आरोप है कि प्रस्तावित बदलावों से अल्पसंख्यक, खासकर ईसाई संस्थानों पर असर पड़ सकता है। वहीं गृह मंत्रालय ने कहा है कि विधेयक का उद्देश्य चैरिटी को नियंत्रित करना नहीं, बल्कि विदेशी धन के प्रवाह में पारदर्शिता और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को संबोधित करना है।

JPC की पहली बैठक में गृह मंत्रालय की प्रस्तुति

FCRA Amendment Bill 2026 की जांच के लिए गठित 31 सदस्यीय संयुक्त संसदीय समिति (JPC) की पहली बैठक 18 सितंबर को हुई। समिति की अध्यक्षता बीजेपी सांसद संजय जायसवाल कर रहे हैं। गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने समिति के सामने विधेयक के प्रावधानों और सरकार के तर्कों पर जानकारी दी।

गृह सचिव गोविंद मोहन के नेतृत्व में अधिकारियों ने सांसदों के सवालों के जवाब दिए। मंत्रालय की ओर से कहा गया कि FCRA मूल रूप से राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा कानून है और प्रस्तावित संशोधनों के पीछे राष्ट्रीय हित, आंतरिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था से जुड़ी चिंताएं हैं।

सरकार का तर्क- विदेशी फंड के प्रवाह पर निगरानी जरूरी

गृह मंत्रालय ने समिति को बताया कि संशोधन चैरिटी गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए नहीं हैं। मंत्रालय के अनुसार, विदेशी धन भारत के “संप्रभु क्षेत्र” में प्रवेश करता है, इसलिए उसके प्रवाह और इस्तेमाल की निगरानी करना सरकार की जिम्मेदारी है। मंत्रालय ने यह भी बताया कि FCRA के तहत मिलने वाले विदेशी फंड का करीब 8 प्रतिशत हिस्सा धार्मिक उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल होता है।

सरकार पहले भी कह चुकी है कि प्रस्तावित बदलावों का उद्देश्य विदेशी योगदान के इस्तेमाल में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना है।

विपक्ष और ईसाई संगठनों की क्या आपत्ति है?

विपक्षी दलों और कुछ धार्मिक संगठनों ने विधेयक के कुछ प्रावधानों पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि नए प्रावधानों से विदेशी फंड प्राप्त करने वाले संस्थानों पर सरकारी निगरानी बढ़ सकती है और इससे वैध रूप से काम कर रहे ईसाई NGO तथा अल्पसंख्यक संस्थानों पर असर पड़ने की आशंका है।

विशेष चिंता उस प्रस्तावित व्यवस्था को लेकर भी है, जिसके तहत किसी संगठन का FCRA लाइसेंस समाप्त या रद्द होने की स्थिति में विदेशी योगदान से बनाई गई संपत्तियों के प्रबंधन और निपटारे के लिए एक नामित प्राधिकरण की भूमिका होगी।

निशिकांत दुबे ने उठाया विदेशी फंडिंग का मुद्दा

JPC बैठक में बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने विदेशी फंडिंग के ऐतिहासिक संदर्भ का मुद्दा उठाया। उन्होंने सवाल किया कि 1976 में FCRA कानून बनने से पहले विदेशी फंडिंग से जुड़े कई NGO पर कार्रवाई के बावजूद फोर्ड फाउंडेशन और रॉकफेलर फाउंडेशन जैसी संस्थाओं की भारत में गतिविधियों को किस तरह देखा गया।

दुबे का तर्क था कि विदेशी धन का इस्तेमाल राष्ट्रीय हित से जुड़े मामलों को प्रभावित करने के लिए नहीं होना चाहिए। यह उनका राजनीतिक और नीतिगत तर्क है, जिस पर समिति में आगे चर्चा होनी है।

पी. विल्सन ने फिर उठाया ईसाई संस्थानों का मुद्दा

वहीं, समिति के सदस्य और DMK सांसद पी. विल्सन ने कथित तौर पर यह सवाल दोहराया कि प्रस्तावित संशोधन का असर ईसाई संगठनों पर अधिक पड़ सकता है। विपक्ष की ओर से इस बात पर भी स्पष्टीकरण मांगा गया कि धार्मिक और सामाजिक संस्थानों पर नए नियम किस तरह लागू होंगे।

इससे पहले ईसाई संगठनों ने भी विधेयक को लेकर सरकार के सामने अपनी चिंताएं रखी थीं। राष्ट्रीय परिषद ऑफ चर्चेज इन इंडिया (NCCI) ने अगस्त में विधेयक को JPC के पास भेजे जाने के फैसले का स्वागत किया था और समिति के सामने अपनी बात रखने की इच्छा जताई थी।

शीतकालीन सत्र में रिपोर्ट आने की उम्मीद

JPC को विधेयक की विस्तृत समीक्षा करनी है। समिति के अध्यक्ष संजय जायसवाल ने रिपोर्ट शीतकालीन सत्र में पेश किए जाने की उम्मीद जताई है। अगली बैठक 29 सितंबर को प्रस्तावित है, जिसमें गृह मंत्रालय के साथ कानून मंत्रालय के अधिकारियों को भी बुलाया जा सकता है।

निष्कर्ष

FCRA Amendment Bill पर विवाद फिलहाल सरकार की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेशी फंड की निगरानी की दलील तथा विपक्ष व धार्मिक संगठनों की संस्थागत स्वतंत्रता और संभावित प्रभाव संबंधी चिंताओं के बीच है। अब JPC की सुनवाई और रिपोर्ट यह स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण होगी कि प्रस्तावित प्रावधानों में आगे क्या बदलाव किए जाते हैं।


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पीयुष उपाध्याय एक अनुभवी समाचार संपादक हैं, जो Aware Media Network के लिए देश-दुनिया की प्रमुख खबरों, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग सुनिश्चित करते हैं। उनका अनुभव पत्रकारिता में 7+ वर्षों का है और वे निष्पक्ष, भरोसेमंद और समय पर समाचार प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कई पुरस्कार और मान्यता प्राप्त की है, जिनमें 2022 में “Best Investigative Journalist” और 2021 में “Top 10 Editors in Uttarakhand” शामिल हैं।
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