चुनावी वादों पर सुप्रीम कोर्ट में फिर सुनवाई, राजनीतिक दलों की जवाबदेही की मांग

By
PEEYUSH UPADHYAY
पीयुष उपाध्याय एक अनुभवी समाचार संपादक हैं, जो Aware Media Network के लिए देश-दुनिया की प्रमुख खबरों, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग सुनिश्चित करते हैं। उनका अनुभव...
- Editor
6 Min Read

चुनाव के दौरान राजनीतिक दलों की ओर से किए जाने वाले वादों को लेकर 2022 में दाखिल जनहित याचिका एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट के सामने सुनवाई के लिए आने वाली है। याचिका में घोषणापत्र के वादों के लिए राजनीतिक दलों की जवाबदेही तय करने और चुनाव आयोग के स्तर पर स्पष्ट नियम बनाने की मांग की गई है।

2022 की PIL को लिस्ट करने पर सहमति

चुनावी घोषणापत्र और राजनीतिक दलों के वादों से जुड़े मामले में दाखिल 2022 की जनहित याचिका को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के लिए लिस्ट किए जाने की मांग की गई है।

बुधवार को वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय ने चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच के सामने मामले को लिस्ट करने का अनुरोध किया। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक अदालत ने मामले को लिस्ट करने पर सहमति जताई है। सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर 16 सितंबर 2026 की लिस्टिंग सूचनाएं भी उपलब्ध हैं।

घोषणापत्र के वादों को लेकर क्या है मांग?

याचिका में केंद्र सरकार और चुनाव आयोग से राजनीतिक दलों के चुनावी घोषणापत्र को लेकर नियम बनाने की मांग की गई है।

याचिकाकर्ता का तर्क है कि चुनावी घोषणापत्र में किसी राजनीतिक दल की सरकार बनने की स्थिति में उसकी योजनाओं और प्राथमिकताओं की जानकारी होती है। इसलिए याचिका में घोषणापत्र में किए गए वादों के लिए राजनीतिक दलों को जवाबदेह बनाने की व्यवस्था की मांग की गई है।

हालांकि, ये याचिकाकर्ता की दलीलें और मांगें हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इन मांगों को स्वीकार नहीं किया है।

वादे पूरे नहीं होने पर कार्रवाई की मांग

याचिका में चुनाव आयोग से उन राजनीतिक दलों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है, जो चुनावी घोषणापत्र में किए गए वादों को पूरा नहीं करते।

याचिकाकर्ता ने कार्रवाई के तौर पर चुनाव चिन्ह जब्त करने और राजनीतिक दल की मान्यता समाप्त करने जैसे कदमों का सुझाव दिया है। साथ ही याचिका में ऐसे बड़े चुनावी वादों से बचने की बात कही गई है, जिनसे सरकारी खजाने पर अत्यधिक वित्तीय बोझ पड़ सकता है।

वहीं, याचिका में यह भी कहा गया है कि हर चुनावी वादा गलत नहीं माना जा सकता। इसलिए याचिकाकर्ता ने इस विषय में स्पष्ट और निर्धारित नियम बनाने की जरूरत बताई है।

AAP के घोषणापत्र का भी किया गया उल्लेख

याचिका में आम आदमी पार्टी के 2013, 2015 और 2020 के चुनावी घोषणापत्रों का भी उल्लेख किया गया है। याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि इन घोषणापत्रों में जनलोकपाल बिल और स्वराज बिल से जुड़े वादे किए गए थे, लेकिन उन्हें लागू करने के लिए जरूरी कदम नहीं उठाए गए।

यह उल्लेख याचिकाकर्ता की ओर से अपने तर्क के समर्थन में किया गया है। किसी राजनीतिक दल द्वारा किए गए किसी विशेष वादे की पूर्ति या उसके क्रियान्वयन की स्थिति का अंतिम निर्धारण संबंधित रिकॉर्ड और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होगा।

घोषणापत्र को कानूनी रूप से लागू करने की दलील

याचिका में यह तर्क भी दिया गया है कि मतदाता चुनाव के दौरान राजनीतिक दलों के घोषणापत्र और उनमें किए गए वादों को ध्यान में रखकर अपना निर्णय ले सकते हैं।

इसी आधार पर याचिकाकर्ता ने मांग की है कि चुनाव जीतकर सरकार बनाने वाले दल के घोषणापत्र में किए गए वादों को कानूनी रूप से लागू करने योग्य बनाया जाए। इसके लिए कानून मंत्रालय को राजनीतिक दलों और उनके घोषणापत्रों से संबंधित कानून बनाने का निर्देश देने की मांग की गई है।

चुनाव आयोग के लिए भी नियम बनाने की मांग

याचिका में वैकल्पिक रूप से चुनाव आयोग से अपने संवैधानिक अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए राजनीतिक दलों के घोषणापत्र के लिए नियम बनाने की मांग की गई है।

इसमें घोषणापत्र में किए जाने वाले वादों, उनके वित्तीय प्रभाव और उन्हें लागू करने की जवाबदेही से जुड़े मानकों को निर्धारित करने की बात कही गई है।

अब सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर नजर

मामला दोबारा लिस्ट होने के बाद सुप्रीम कोर्ट के सामने चुनावी घोषणापत्र और राजनीतिक वादों से जुड़े कई कानूनी सवाल आ सकते हैं। इनमें राजनीतिक दलों की जवाबदेही, चुनाव आयोग की नियामक भूमिका और चुनावी वादों के वित्तीय प्रभाव जैसे मुद्दे शामिल हैं।

फिलहाल अदालत के समक्ष याचिका की मांगों पर अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। आगे की सुनवाई में केंद्र सरकार और चुनाव आयोग का रुख तथा अदालत की टिप्पणियां मामले की दिशा स्पष्ट कर सकती हैं।

निष्कर्ष

चुनावी घोषणापत्र में किए गए वादों को लेकर 2022 की जनहित याचिका एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के लिए लिस्ट होने जा रही है। याचिका में राजनीतिक दलों को घोषणापत्र के वादों के लिए जवाबदेह बनाने और चुनाव आयोग के स्तर पर स्पष्ट नियम तैयार करने की मांग की गई है। अब आगे की सुनवाई में अदालत इस मामले में उठाए गए कानूनी मुद्दों पर क्या रुख अपनाती है, इस पर नजर रहेगी।


Discover more from Aware Media News - Hindi News, Breaking News & Latest Updates

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Share This Article
Follow:
पीयुष उपाध्याय एक अनुभवी समाचार संपादक हैं, जो Aware Media Network के लिए देश-दुनिया की प्रमुख खबरों, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग सुनिश्चित करते हैं। उनका अनुभव पत्रकारिता में 7+ वर्षों का है और वे निष्पक्ष, भरोसेमंद और समय पर समाचार प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कई पुरस्कार और मान्यता प्राप्त की है, जिनमें 2022 में “Best Investigative Journalist” और 2021 में “Top 10 Editors in Uttarakhand” शामिल हैं।
कोई टिप्पणी नहीं

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Exit mobile version