पंजाब सरकार की आपत्ति बेअसर, जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा बने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के नए चीफ जस्टिस

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PEEYUSH UPADHYAY
पीयुष उपाध्याय एक अनुभवी समाचार संपादक हैं, जो Aware Media Network के लिए देश-दुनिया की प्रमुख खबरों, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग सुनिश्चित करते हैं। उनका अनुभव...
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के नए चीफ जस्टिस की नियुक्ति ने पंजाब और केंद्र सरकार के बीच पहले से चल रही खींचतान को एक बार फिर सामने ला दिया है। पंजाब सरकार ने प्रक्रिया पर सवाल उठाए, कैबिनेट में प्रस्ताव पारित किया, लेकिन विरोध के बावजूद जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा ने सोमवार को पद की शपथ ले ली।

विरोध के बीच शपथ ग्रहण

पंजाब सरकार की आपत्ति के बावजूद जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के 37वें चीफ जस्टिस के रूप में शपथ दिलाई गई। पंजाब राजभवन में सोमवार सुबह 9:30 बजे हुए समारोह में उन्होंने पदभार संभाला।

यह नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब मुख्यमंत्री भगवंत मान की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में केंद्र सरकार के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया गया था।

पंजाब सरकार ने क्यों जताई आपत्ति?

पंजाब सरकार का आरोप है कि जस्टिस मिश्रा की नियुक्ति से पहले राज्य की राय और सहमति को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया। वित्त मंत्री हरपाल चीमा ने कहा कि राज्य सरकार को अपनी राय देने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिला।

सरकार ने Memorandum of Procedure यानी MOP के पैरा 6 का हवाला देते हुए नियुक्ति की प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं। पंजाब का कहना है कि संवैधानिक व्यवस्था में राज्य की राय का सम्मान किया जाना चाहिए।

केंद्र ने आरोपों को किया खारिज

केंद्र की ओर से भारत सरकार के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सत्य पाल जैन ने पंजाब सरकार के आरोपों को खारिज किया। उनके मुताबिक सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 6 अगस्त को सिफारिश की थी और 10 अगस्त को पंजाब तथा हरियाणा सरकारों से राय मांगी गई थी।

उनका दावा है कि हरियाणा ने अपनी राय भेज दी, जबकि पंजाब की ओर से तय समय में कोई राय नहीं आई। उन्होंने साफ कहा कि राज्य सरकार की राय लेना जरूरी है, लेकिन वह बाध्यकारी नहीं है। राज्य सरकार के पास नियुक्ति रोकने का वीटो भी नहीं है।

MOP की व्याख्या बनी असली वजह

विवाद का केंद्र MOP के पैरा 6 की व्याख्या है। पंजाब इसे राज्य की भूमिका और सहमति से जोड़कर देख रहा है, जबकि केंद्र का तर्क है कि राज्य की राय अंतिम निर्णय के लिए बाध्यकारी नहीं है।

यही कानूनी और प्रक्रियात्मक मतभेद अब राजनीतिक बहस का रूप ले चुका है। पंजाब सरकार ने कथित तौर पर रोके गए करीब 9 हजार करोड़ रुपये के RDF, बाढ़ राहत पैकेज और BBMB के नियमों जैसे मुद्दों पर भी केंद्र के खिलाफ नाराजगी जताई है।

BJP और अकाली दल का पलटवार

विवाद पर BJP ने मुख्यमंत्री भगवंत मान से माफी की मांग की है। पार्टी नेता फतेहजंग बाजवा ने कहा कि चीफ जस्टिस की नियुक्ति में मुख्यमंत्री की सीधी संवैधानिक भूमिका नहीं है।

वहीं शिरोमणि अकाली दल के अर्शदीप सिंह कलेर ने इसे पंजाब के लिए ‘काला दिन’ बताया। उनका सवाल है कि यदि न्यायपालिका की नियुक्तियों में राजनीतिक सहमति जरूरी मानी जाएगी, तो आगे न्यायिक व्यवस्था की निष्पक्षता पर भी सवाल उठ सकते हैं।

विवाद अब कितना बड़ा?

जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा की नियुक्ति हो चुकी है, लेकिन राजनीतिक टकराव खत्म होता नहीं दिख रहा। यह मामला अब सिर्फ एक न्यायिक नियुक्ति तक सीमित नहीं है। इसके केंद्र में राज्य और केंद्र के अधिकार, संवैधानिक प्रक्रिया और संघीय ढांचे की वह बहस है, जो आने वाले दिनों में पंजाब की राजनीति में और तेज हो सकती है।


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पीयुष उपाध्याय एक अनुभवी समाचार संपादक हैं, जो Aware Media Network के लिए देश-दुनिया की प्रमुख खबरों, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग सुनिश्चित करते हैं। उनका अनुभव पत्रकारिता में 7+ वर्षों का है और वे निष्पक्ष, भरोसेमंद और समय पर समाचार प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कई पुरस्कार और मान्यता प्राप्त की है, जिनमें 2022 में “Best Investigative Journalist” और 2021 में “Top 10 Editors in Uttarakhand” शामिल हैं।
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