भारत की रक्षा ताकत: 10 साल में बजट 2.5 गुना बढ़कर रचा इतिहास
भारत का रक्षा बजट अब नए मुकाम पर पहुंच गया है। दुनिया की बदलती सुरक्षा चुनौतियों और भारत की बढ़ती कूटनीतिक भूमिका के बीच, सरकार ने सरहदों की सुरक्षा के साथ-साथ ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। आंकड़े बताते हैं कि पिछले एक दशक में भारत का रक्षा आवंटन करीब ढाई गुना बढ़कर एक नए ऐतिहासिक शिखर पर पहुंच गया है।
क्या आप जानते हैं कि वित्त वर्ष 2015-16 में रक्षा बजट महज 2.46 लाख करोड़ रुपये था, जो 2025-26 में बढ़कर 6.81 लाख करोड़ रुपये के पार चला गया है? इस 300% से अधिक की छलांग के पीछे सामरिक समीकरणों में बदलाव और भविष्य की तैयारियां छिपी हैं।
रक्षा बजट का 10 साल का सफर
2014-15: 2.29 लाख करोड़ (मोदी सरकार का पहला बजट)
2015-16: 2.46 लाख करोड़
2013-14: 2.03 लाख करोड़ (कांग्रेस सरकार)
आगे का फलक (2025-26 तक):
2016-17: 2.58 लाख करोड़
2017-18: 3.59 लाख करोड़
2018-19: 4.04 लाख करोड़
2019-20: 4.31 लाख करोड़
2020-21: 4.71 लाख करोड़
2021-22: 4.78 लाख करोड़
2022-23: 5.25 लाख करोड़
2023-24: 5.93 लाख करोड़
2024-25: 6.21 लाख करोड़
2025-26: 6.81 लाख करोड़ (नया ऐतिहासिक उच्च स्तर)
क्यों हुई बजट में इतनी बड़ी बढ़ोतरी?
साल 2020 के बाद से बजट की रफ्तार तेज हुई है। इसकी मुख्य वजह चीन के साथ LAC पर बढ़ा तनाव और सेना को बेहतरीन आधुनिक हथियारों से लैस करने की बेताज ज़रूरत है। औसतन हर साल 10-12 फीसदी की इस वृद्धि ने भारत को दुनिया के सबसे ज्यादा रक्षा खर्च करने वाले देशों की क्लब में शीर्ष पर रखा है।
रणनीतिक हिस्सा: ‘कैपिटल आउटले’
बजट की असली ताकत is ‘कैपिटल आउटले’ यानी पूंजीगत व्यय है। इसी कोष से नए राफेल विमान, हाई-टेक युद्धपोत, घातक मिसाइल सिस्टम और ड्रोन खरीदे जा रहे हैं। इस धड़ पर सरकार ने भारी निवेश किया है, जिससे पुराने उपकरणों को रिप्लेस करने में तेजी आई है और मारक क्षमता बेतहरीन हुई है।
‘मेक इन इंडिया’ का फायदा
रक्षा बजट बढ़ने से घरेलू उद्योगों को बूम मिला है। सरकार अब बजट का बड़ा हिस्सा भारतीय कंपनियों से खरीद के लिए रख रही है। HAL, DRDO और निजी सेक्टर को भरपूर समर्थन मिल रहा है। नतीजा यह है कि भारत न केवल अपनी ज़रूरतें पूरी कर रहा है, बल्कि हथियारों के निर्यात में भी नए कीर्तिमान रच रहा है।
पेंशन और बुनियादी ढांचा
कुल बजट का एक बड़ा हिस्सा वेतन और पेंशन पर भी खर्च होता है। ‘वन रैंक वन पेंशन’ (OROP) लागू होने के बाद पेंशन बिल बढ़ा है। साथ ही, सीमा पर रसद, ईंधन और सुरंगों जैसे बुनियादी ढांचे पर भी खासा निवेश हो रहा है ताकि युद्ध जैसी स्थिति में सेना की पहुंच आसान और तेज हो सके।
English summary
Defence Budget 2026: भारत के रक्षा बजट में 10 साल में 2.5 गुना की बढ़ोतरी देखी गई है, जो नए शिखर 6.81 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। यह वृद्धि चीन के साथ तनाव और आत्मनिर्भर भारत की रणनीति का नतीजा है। आंकड़ों और विश्लेषण से जानें पूरी डिटेल।
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