कभी उत्तर प्रदेश की राजनीति के शिखर पर विराजमान आजम खान, आज क्यों पहुंचे इस हाल में?
एक समय था जब उत्तर प्रदेश की राजनीति में आजम खान का नाम ही ताकत और प्रभाव का पर्याय हुआ करता था। रामपुर से लेकर लखनऊ तक, उनकी सियासी जमीन मजबूत मानी जाती थी। लेकिन आज, स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। वे आर्थिक और राजनीतिक, दोनों ही मोर्चों पर बेहद कमजोर स्थिति में आ खड़े हुए हैं। उनकी जमीन खिसक चुकी है और संपत्तियों पर भी ग्रहण लग गया है।
जौहर यूनिवर्सिटी: एक सपना, जो अब सवालों के घेरे में
आजम खान का सपना कही जाने वाली जौहर यूनिवर्सिटी आज प्रशासन के नियंत्रण में है। करीब 50 महीनों के भीतर, उन्होंने लगभग 600 करोड़ रुपये की संपत्ति गंवा दी है। यूनिवर्सिटी की लगभग 13 हेक्टेयर जमीन को ‘शत्रु संपत्ति’ घोषित कर दिया गया है, कई भवन सील कर दिए गए हैं, और कुछ की नीलामी की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। इस विश्वविद्यालय पर 30 से अधिक मुकदमे दर्ज हैं, और मामला हाईकोर्ट से होते हुए सुप्रीम कोर्ट तक जा पहुंचा है। प्रशासन ने संपत्ति का सीमांकन और जियो-टैगिंग भी पूरी कर ली है।
आर्थिक तंगी और घटती आय
2022 के चुनावी हलफनामे के अनुसार, आजम खान की जेब में अब सिर्फ 35 हजार रुपये नकद हैं, और बैंक खातों में लगभग 2 करोड़ 30 लाख रुपये बचे हैं, जिनमें से कुछ उनकी संस्थाओं के नाम पर हैं। चल संपत्ति के तौर पर उनके पास एक वॉल्वो कार, पत्नी के नाम पर एक क्वालिस, कुछ गहने, हथियार और सीमित मात्रा में कृषि और गैर-कृषि भूमि ही बची है। उनकी आय में भी भारी गिरावट आई है। 2016-17 से 2022 तक, उनकी सालाना आय 10 लाख रुपये से भी कम रही, जबकि पहले यह लाखों-करोड़ों में हुआ करती थी।
कानूनी दांव-पेंच और जेल की लंबी अवधि
योगी सरकार के कार्यकाल में आजम खान पर 111 आपराधिक मामले दर्ज हुए, जिनमें से अधिकांश जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े हैं। पिछले आठ सालों में, उन्होंने लगभग 50 महीने जेल में बिताए हैं। पहली बार 27 महीने और फिर 23 महीने, यानी पिछले आठ सालों में उन्होंने आधा समय जेल की सलाखों के पीछे गुजारा है। भ्रष्टाचार, जालसाजी, जमीन कब्जे और शत्रु संपत्ति से जुड़े मामलों के कारण, कोर्ट ने उनके चुनाव लड़ने पर भी प्रतिबंध लगा दिया है।
राजनीतिक हाशिए पर, सिर्फ बची हैं लंबी कानूनी लड़ाई
कभी समाजवादी राजनीति के सबसे प्रभावशाली चेहरों में शुमार आजम खान, आज मुकदमों, जांचों और कानूनी उलझनों में फंसे हुए हैं। रामपुर, जिसे उन्होंने दशकों तक अपना गढ़ बनाए रखा, अब उनसे धीरे-धीरे दूर हो रहा है। राजनीतिक तौर पर हाशिए पर पहुंच चुके आजम खान के पास अब कुछ करोड़ की संपत्ति और एक लंबी कानूनी लड़ाई ही बची है।
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