बाबरी का ‘पुनर्निर्माण’ : हुमायूं कबीर के ऐलान से फिर भड़की सियासत, क्या खुलेगा फिर पुराना ज़ख्म?

By
Aware Media Network
Aware Media Network एक स्वतंत्र डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म है, जो देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरें, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग पाठकों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारी...
- News Desk
3 Min Read
Trinamool Congress विधायक हुमायूं कबीर का 'बाबरी मस्जिद' निर्माण का ऐलान, क्या फिर सुलगेगा पुराना घाव?

टीएमसी विधायक के ‘बाबरी मस्जिद’ निर्माण की घोषणा से पश्चिम बंगाल की राजनीति में भूचाल

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया विवाद गरमा गया है, जिसका केंद्र तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के विधायक हुमायूं कबीर का एक विवादास्पद बयान है। विधायक कबीर ने घोषणा की है कि वह 6 दिसंबर को मुर्शिदाबाद जिले के बेलडांगा में एक ‘बाबरी मस्जिद’ की नींव रखेंगे। यह तारीख अयोध्या में बाबरी मस्जिद के विध्वंस की 33वीं बरसी होने के कारण और भी अधिक संवेदनशील है।

विधायक कबीर ने अपने ऐलान में कहा, “हम 6 दिसंबर को बेलडांगा में बाबरी मस्जिद की नींव रखेंगे। इसे पूरा होने में तीन साल लगेंगे। इस कार्यक्रम में कई मुस्लिम नेता हिस्सा लेंगे।” इस घोषणा ने तुरंत राजनीतिक और धार्मिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाओं को जन्म दिया है।

भाजपा का ‘तुष्टिकरण की राजनीति’ का आरोप

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने टीएमसी विधायक के इस कदम की कड़ी आलोचना करते हुए इसे ‘तुष्टिकरण की राजनीति’ करार दिया है। भाजपा प्रवक्ता यासर जिलानी ने कबीर पर चुनावी फायदे के लिए जानबूझकर सांप्रदायिक भावनाओं को भड़काने का आरोप लगाया।

जिलानी ने कहा, “टीएमसी नेता, खासकर हुमायूं कबीर, नफरत की राजनीति के लिए जाने जाते हैं। वे सिर्फ तुष्टिकरण के लिए राजनीति करते हैं। उन्हें पता है कि लोग उन्हें चुनावों में खारिज कर देंगे, इसलिए वे वोट बैंक बचाने के लिए सांप्रदायिक तनाव पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं।”

कांग्रेस और धार्मिक नेताओं की मिली-जुली प्रतिक्रिया

कांग्रेस पार्टी और ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन ने भी इस बयान पर आपत्ति जताई है। कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा, “मस्जिद बनाना ठीक है, लेकिन ख़ास तौर पर ‘बाबरी मस्जिद’ ही क्यों? जो झगड़ा पहले ही सुलझ चुका था, उसे राजनीतिक लाभ के लिए फिर से खोला जा रहा है। हमारा रिश्ता बाबर से नहीं, बल्कि शिवाजी महाराज से है।”

वहीं, कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने कहा, “मस्जिद कोई भी बना सकता है, उसका बाबरी से क्या लेना-देना है? अगर वे मस्जिद बनाना चाहते हैं, तो वे आगे बढ़कर बना सकते हैं।”

ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने धार्मिक दृष्टिकोण से जवाब देते हुए कहा कि एक बार किसी स्थान पर मस्जिद बन जाने के बाद, वह हमेशा मस्जिद ही रहती है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भले ही भारत में बाबरी मस्जिद के नाम पर सैकड़ों मस्जिदें बन जाएं, लेकिन अयोध्या में स्थित असली बाबरी मस्जिद की अहमियत कभी कम नहीं हो सकती।


Discover more from Aware Media News - Hindi News, Breaking News & Latest Updates

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Share This Article
Follow:
Aware Media Network एक स्वतंत्र डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म है, जो देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरें, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग पाठकों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारी संपादकीय टीम विश्वसनीय स्रोतों, आधिकारिक आंकड़ों और पत्रकारिता के नैतिक सिद्धांतों के आधार पर समाचार तैयार करती है। Aware Media Network का उद्देश्य निष्पक्ष, सटीक और समय पर जानकारी प्रदान करना है, ताकि पाठक जागरूक निर्णय ले सकें और समसामयिक घटनाओं को बेहतर ढंग से समझ सकें।
कोई टिप्पणी नहीं

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Exit mobile version