नागोया में इलावेनिल का ‘सिल्वर’ धमाका: स्वर्ण चूका पर अपनी सहज मुस्कान से जीता सबका दिल
(अजय मसंद)
नागोया (जापान), 20 सितंबर: भारतीय निशानेबाज इलावेनिल वलारिवन की एक खासियत है—उनकी मुस्कान कभी उनके पदक के रंग की मोहताज नहीं होती। रविवार को जब एशियाई खेलों की रेंज में उनके हाथ से लगभग तय लग रहा स्वर्ण पदक फिसलकर रजत में बदला, तब भी यह 27 वर्षीय एयर राइफल निशानेबाज उसी संयम और संतोष के साथ बाहर निकलीं। महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा के फाइनल में इलावेनिल ने लंबे समय तक अपना दबदबा बनाए रखा था।
मुकाबले के अधिकांश हिस्से में वह करीब 1.5 अंक की मजबूत बढ़त के साथ पूर्ण नियंत्रण में थीं। लेकिन आखिरी तीन ‘ढीले’ शॉट्स ने बाजी पलट दी और उन्हें रजत पदक से संतोष करना पड़ा। उनके चेहरे पर हार की कोई शिकन नहीं थी, बल्कि अपनी चूक को स्वीकार करने का साहस था। इलावेनिल ने बड़ी बेबाकी से कहा, “जैसे ही मेरा पदक पक्का हुआ, दबाव कम हो गया और मैं थोड़ी रिलैक्स हो गई। मुझे अपनी प्रक्रिया और फाइनल की तकनीक पर अभी और काम करने की जरूरत है।”
यही ईमानदारी बताती है कि वह इस नतीजे के साथ इतनी सहज क्यों थीं। उन्होंने इसे एक बड़ी सीख मानते हुए कहा, “मैंने अपना सर्वश्रेष्ठ दिया और यह पूरी प्रक्रिया मेरे लिए सीखने का एक हिस्सा है।” यह पदक प्रमुख एशियाई प्रतियोगिताओं में उनका लगातार तीसरा व्यक्तिगत रजत था, इससे पहले वह शिमकेंट और दिल्ली की एशियाई चैंपियनशिप में भी पोडियम पर अपनी जगह बना चुकी थीं।
स्वर्ण से मामूली अंतर से चूकने के बावजूद, इलावेनिल अब किसी बड़े जश्न के बजाय एक साधारण सुकून की तलाश में हैं। उन्होंने हंसते हुए कहा, “फिलहाल मैं बस अपने बिस्तर की कमी महसूस कर रही हूँ। मैं वापस जाकर अपने कोच और टीम के साथियों के साथ इस पल का आनंद लेना चाहती हूँ।” आगामी विश्व चैंपियनशिप की तैयारी से पहले वह कुछ दिन आराम और खुद को तरोताजा करने को प्राथमिकता देना चाहती हैं।
यह रविवार भारत के लिए दोहरी सफलता लेकर आया। इलावेनिल ने न केवल व्यक्तिगत रजत जीता, बल्कि सोनम उत्तम मस्कर और विदरसा विनोद के साथ मिलकर टीम स्पर्धा में भी देश की झोली में रजत पदक डाला। इलावेनिल के लिए यह सामूहिक सफलता अधिक मायने रखती है। उन्होंने कहा, “यह टीम भावना और एक-दूसरे की मदद का परिणाम है। पहले ही दिन दो पदक जीतना पूरी टीम के मनोबल को बढ़ाने वाला है।”
व्यक्तिगत तौर पर यह पदक इलावेनिल के लिए एक लंबे इंतजार का फल है। 2018 के जकार्ता एशियाई खेलों से शुरू हुआ उनका सफर अब जाकर पदक तक पहुँचा है। एक अनुभवी ओलंपियन होने के बावजूद उनके संग्रह में एशियाई खेलों के पदक की जो कमी थी, वह अब पूरी हो गई है।
इस ऐतिहासिक पल में उन्हें अपनी कोच नेहा चव्हाण की कमी बहुत खली, जो नागोया में उनके साथ नहीं थीं। इलावेनिल ने याद करते हुए कहा, “नेहा मैम ने मुझसे कहा था कि अपनी तकनीक पर भरोसा रखना और साहस के साथ खेलना। आज मुझे उनकी बहुत याद आ रही है, क्योंकि यह मेरा पहला एशियाई खेल पदक है। अगर वह यहाँ होतीं, तो यह अहसास और भी खास होता।” भले ही कोच साथ नहीं थीं, लेकिन इलावेनिल ने उनके मार्गदर्शन को रेंज पर बखूबी उतारकर दिखा दिया।
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