बिहार चुनाव की रणभेरी, पूरे देश में मतदाता सूची का महा-सफाई अभियान
पटना: भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने बिहार विधानसभा चुनावों की घोषणा के साथ ही पूरे देश में मतदाता सूचियों के एक बड़े “महा-सफाई अभियान” का ऐलान कर दिया है। मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार ने सोमवार को इस बात की पुष्टि करते हुए बताया कि यह विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया पूरे देश में लागू होगी। बिहार की 243 विधानसभा सीटों के लिए मतदान 6 और 11 नवंबर को दो चरणों में होगा, जबकि नतीजों की घोषणा 14 नवंबर को की जाएगी।
सीईसी ज्ञानेश कुमार ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा, “ईसीआई ने पहले ही पूरे देश में एसआईआर कराने का निर्णय ले लिया है।” उन्होंने यह भी बताया कि बिहार में मतदाता सूची के शुद्धिकरण में मतदाताओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया है। अंतिम मतदाता सूची सभी राजनीतिक दलों को सौंप दी गई है, और नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि के बाद जारी होने वाली सूची ही अंतिम मानी जाएगी।
आधार अब पहचान का एकमात्र सहारा, नागरिकता का नहीं:
सीईसी ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार, आधार कार्ड को पहचान के प्रमाण के रूप में 12वें दस्तावेज़ के रूप में शामिल किया गया है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि आधार कार्ड नागरिकता का प्रमाण पत्र नहीं है, जैसा कि आधार अधिनियम की धारा 9 में भी वर्णित है। 2023 से पहले सर्वोच्च न्यायालय के कई फैसलों में आधार को जन्मतिथि के प्रमाण के रूप में भी मान्यता नहीं दी गई थी। अब, न्यायालय के फैसलों और आधार अधिनियम के आलोक में, आधार कार्ड ही पहचान का एकमात्र मान्य प्रमाण है। मतदाता बनने के लिए, भारतीय संविधान के अनुच्छेद 326 के अनुसार, व्यक्ति की आयु कम से कम 18 वर्ष होनी चाहिए, वह देश का नागरिक हो, और संबंधित मतदान केंद्र के पास का निवासी हो। चुनाव आयोग सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का अक्षरशः पालन कर रहा है।
राजनीतिक दलों की मांग पर एसआईआर, आयोग संवैधानिक दायित्व निभा रहा:
सोशल मीडिया पर एसआईआर को लेकर चल रही अटकलों पर प्रतिक्रिया देते हुए, सीईसी ने कहा कि यह राजनीतिक दलों की ही मांग थी। उन्होंने जोर देकर कहा कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और संविधान के दायरे में रहकर ही राष्ट्रीय और राज्य विधानसभा चुनावों का संचालन करती है। इससे पहले, 5 अक्टूबर को भी सीईसी कुमार ने बिहार विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के फैसले का बचाव किया था और चुनाव के बाद संशोधन के सुझाव को “अनुचित” बताया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत एसआईआर करना कानूनी और अनिवार्य दोनों है, और हर चुनाव से पहले यह प्रक्रिया अपनाना कानून का पालन करना है।
अंतिम मतदाता सूची जारी, मतदाताओं की संख्या में हुआ बदलाव:
एसआईआर प्रक्रिया संपन्न होने के बाद, चुनाव आयोग ने बिहार विधानसभा चुनावों के लिए अंतिम मतदाता सूची भी प्रकाशित कर दी है। इस अंतिम सूची में कुल मतदाताओं की संख्या 7.42 करोड़ दर्ज की गई है। जबकि 24 जून तक कुल मतदाताओं की संख्या 7.89 करोड़ थी। चुनाव आयोग की एक विज्ञप्ति के अनुसार, मसौदा सूची से 65 लाख मतदाताओं को हटा दिया गया है। 1 अगस्त, 2025 तक की मसौदा सूची में मतदाताओं की संख्या 7.24 करोड़ थी। हटाए गए अपात्र मतदाताओं की संख्या 3.66 लाख है, वहीं 21.53 लाख पात्र मतदाताओं को मसौदा सूची में जोड़ा गया है, जिससे कुल मतदाताओं की संख्या 7.42 करोड़ हो गई है।
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