Bihar News: सावन के दूसरे सोमवार पर समस्तीपुर की सुबह हर-हर महादेव के जयघोष से गूंज उठी। रात से मंदिरों के बाहर लगी कतारें, कंधों पर कांवड़ और आंखों में शिवभक्ति का भाव दिखाई दिया। ऐतिहासिक मंदिरों में उमड़ी भीड़ ने जिले को पूरी तरह आस्था के रंग में रंग दिया।
रात से ही मंदिरों के बाहर लगी कतारें
समस्तीपुर के विद्यापतिधाम, खुदनेश्वर स्थान और शहर के थानेश्वर स्थान मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटने लगी। कई भक्त रात से ही अपनी बारी का इंतजार करते नजर आए।
मंदिर परिसर और आसपास के इलाकों में लगातार हर-हर महादेव और बोल बम के जयकारे गूंजते रहे। श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का जलाभिषेक कर सुख-समृद्धि और मनोकामना पूरी होने की प्रार्थना की।
40 किलोमीटर पैदल चलकर पहुंचे कांवड़िए
थानेश्वर स्थान मंदिर में कांवड़ियों का उत्साह देखते ही बन रहा था। बड़ी संख्या में शिवभक्त बेगूसराय के बछवारा स्थित झमटिया घाट से गंगाजल लेकर करीब 40 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर समस्तीपुर पहुंचे।
दलसिंहसराय होते हुए आगे बढ़े कांवड़ियों का रास्ते में जगह-जगह लोगों ने स्वागत किया। कठिन सफर के बावजूद भक्तों के चेहरे पर थकान से ज्यादा उत्साह दिखाई दिया।
विद्यापतिधाम में भक्ति की अनोखी कहानी
विद्यापतिधाम की पहचान केवल एक प्राचीन शिव मंदिर के रूप में नहीं है। यहां कवि विद्यापति और भगवान शिव के अनोखे संबंध की लोककथा आज भी श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है।
मान्यता है कि विद्यापति की भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव उनके सेवक ‘उगना’ के रूप में उनके साथ रहने लगे थे। इसी वजह से यहां भगवान शिव को उगना महादेव के रूप में भी पूजा जाता है।
भक्त की पुकार पर पहुंचीं मां गंगा
लोकमान्यता के अनुसार, विद्यापति जब मां गंगा के दर्शन के लिए निकले तो रास्ते में थककर उन्होंने गंगा से अपने पास आने की प्रार्थना की। भक्त की पुकार पर मां गंगा के वहां पहुंचने की कथा आज भी इस क्षेत्र की धार्मिक पहचान का हिस्सा है।
इसी आस्था से जुड़ी मान्यताओं ने विद्यापतिधाम को खास बना दिया है। सावन में यहां दूर-दराज से श्रद्धालु पहुंचते हैं।
प्रशासन ने संभाली व्यवस्था
श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को देखते हुए प्रशासन की ओर से सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण के इंतजाम किए गए। मंदिरों के आसपास यातायात व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान दिया गया, ताकि भक्तों को दर्शन और जलाभिषेक में परेशानी न हो।
आस्था के आगे छोटी पड़ गई मुश्किलें
समस्तीपुर में सावन के दूसरे सोमवार का नजारा सिर्फ भीड़ का नहीं, बल्कि विश्वास और समर्पण का भी था। कोई घंटों कतार में खड़ा रहा तो किसी ने 40 किलोमीटर पैदल चलकर बाबा को गंगाजल अर्पित किया।
यही सावन की भक्ति है—रास्ते कठिन हो सकते हैं, कदम थक सकते हैं, लेकिन जब मन में महादेव का नाम हो तो श्रद्धालु मंजिल तक पहुंच ही जाते हैं। समस्तीपुर का यह दृश्य उसी अटूट आस्था की जीवंत तस्वीर बन गया।
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