इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर देश में चल रही बहस के बीच रीवा सांसद जनार्दन मिश्रा का एक बयान सोशल मीडिया पर चर्चा में है। उन्होंने विदेशी तेल निर्भरता का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि जब देश में शुद्ध पेट्रोल पर्याप्त नहीं है, तो इसकी मांग कहां से पूरी होगी।
हवाई सेवा कार्यक्रम में दिया बयान
मध्य प्रदेश की रीवा लोकसभा सीट से बीजेपी सांसद जनार्दन मिश्रा कोलकाता-रीवा-भोपाल हवाई सेवा के लोकार्पण कार्यक्रम में पहुंचे थे। मंच से जनता को संबोधित करते हुए उन्होंने देश की अर्थव्यवस्था, महंगाई, रोजगार और आत्मनिर्भरता जैसे मुद्दों पर अपनी बात रखी। इसी दौरान उनका बयान पेट्रोल और इथेनॉल के मुद्दे पर चर्चा का केंद्र बन गया।
‘शुद्ध पेट्रोल तुम्हारे बाप के यहां से आएगा?’
जनार्दन मिश्रा ने कहा कि भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा विदेशों से पूरा करता है। उन्होंने इथेनॉल मिश्रण का विरोध करने वालों पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब देश में पर्याप्त मात्रा में शुद्ध पेट्रोल उपलब्ध ही नहीं है, तो इसे कहां से लाया जाएगा। इसी क्रम में उन्होंने मंच से कहा, “शुद्ध पेट्रोल तुम्हारे बाप के यहां से आएगा क्या?” उनका यह अंदाज सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे वीडियो की वजह बना।
इथेनॉल को लेकर सांसद ने क्या कहा?
रीवा सांसद ने इथेनॉल के इस्तेमाल का समर्थन करते हुए ब्राजील का उदाहरण दिया। उन्होंने दावा किया कि वहां बड़े पैमाने पर इथेनॉल का उत्पादन होता है और वाहन इस ईंधन पर चल रहे हैं। उनका कहना था कि भारत में भी ऑटोमोबाइल कंपनियों के पास इथेनॉल मिश्रित ईंधन के अनुरूप तकनीक मौजूद है। ऐसे में देश को वैकल्पिक ईंधन के विकल्पों पर आगे बढ़ना चाहिए।
विदेशी तेल पर निर्भरता का मुद्दा
अपने भाषण में मिश्रा ने भारत की कच्चे तेल की विदेशी निर्भरता का भी जिक्र किया। उनका तर्क था कि वैश्विक संकट और समुद्री मार्गों में आने वाली बाधाओं का सीधा असर तेल की आपूर्ति और कीमतों पर पड़ सकता है। ऐसे माहौल में घरेलू स्तर पर वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देना ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकता है।
बयान से ज्यादा बड़ी है असली बहस
सांसद के शब्दों ने भले ही राजनीतिक और सोशल मीडिया चर्चा को तेज कर दिया हो, लेकिन इसके पीछे एक गंभीर सवाल भी है—भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को लंबे समय तक कैसे सुरक्षित रखे? इथेनॉल से किसानों, चीनी उद्योग और घरेलू ईंधन उत्पादन को फायदा मिल सकता है, लेकिन इसके साथ वाहन तकनीक, ईंधन की गुणवत्ता और उपभोक्ताओं की जरूरतों पर भी लगातार चर्चा जरूरी है।
क्या इथेनॉल बनेगा भविष्य का ईंधन?
भारत में पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण बढ़ाने की नीति का उद्देश्य आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता घटाना और घरेलू ऊर्जा विकल्पों को मजबूत करना है। हालांकि, इसे लेकर वाहन मालिकों और विशेषज्ञों के बीच कई सवाल भी उठते रहे हैं। जनार्दन मिश्रा का बयान इसी पुरानी बहस को एक बार फिर सामने ले आया है। अब देखना यह है कि राजनीतिक बयान से आगे बढ़कर देश में इथेनॉल, ऊर्जा सुरक्षा और उपभोक्ता हित के बीच संतुलन कैसे बनाया जाता है।
रीवा सांसद का बयान भले ही अपने तीखे अंदाज के कारण सुर्खियों में आया हो, लेकिन पेट्रोल और इथेनॉल की बहस भारत की ऊर्जा नीति से जुड़ा बड़ा सवाल है। आने वाले वर्षों में ईंधन का भविष्य केवल राजनीति नहीं, बल्कि तकनीक, अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आत्मनिर्भरता तय करेगी।
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