NRI के लिए बजट 2026: प्रॉपर्टी बेचना होगा सस्ता, जानिए क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स

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Budget 2026: NRI को बजट में मिल सकती है राहत! प्रॉपर्टी बेचना होगा आसान, क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स | budget 2026 nri property tax relief tds rules simplification real estate explain in hindi

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Business
oi-Sumit Jha


Published: Tuesday, January 20, 2026, 7:40 [IST]

NRI Property Tax Relief Budget 2026:
बजट 2026 (Budget 2026) का बेसब्री से इंतजार कर रहे अनिवासी भारतीयों (NRIs) को इस बार बड़ी राहत मिल सकती है। खासकर रियल एस्टेट सेक्टर में टैक्स नियमों के सरलीकरण की उम्मीदें चरम पर हैं। वर्तमान में, प्रॉपर्टी बेचने पर एनआरआई के लिए टीडीएस (TDS) के नियम रेजिडेंट भारतीयों की तुलना में काफी सख्त और जटिल हैं, जिसके कारण उनका निवेश अक्सर फंस जाता है।

मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि यदि सरकार इस बजट में टीडीएस दरों में कटौती करती है और अनुपालन (Compliance) प्रक्रिया को सरल बनाती है, तो न केवल एनआरआई निवेशकों का भरोसा बहाल होगा, बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था और रियल एस्टेट बाजार में विदेशी मुद्रा का प्रवाह भी तेजी से बढ़ेगा।

TDS on NRI Property Sale: एनआरआई और रेजिडेंट्स के बीच कड़वा सच

वर्तमान नियमों की बात करें तो जहां एक रेजिडेंट भारतीय को 50 लाख रुपये से अधिक की प्रॉपर्टी बेचने पर केवल 1% टीडीएस देना पड़ता है, वहीं एनआरआई के लिए यह दर कई गुना अधिक है। एनआरआई द्वारा प्रॉपर्टी बेचने पर खरीदार को बिक्री मूल्य पर टैक्स काटना होता है, जो लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस (LTCG) के लिए 12.5% और शॉर्ट टर्म के लिए 30% तक हो सकता है।

यह भारी अंतर एनआरआई विक्रेताओं के लिए नकदी की गंभीर समस्या पैदा करता है, क्योंकि बिक्री का एक बड़ा हिस्सा सरकार के पास टीडीएस के रूप में जमा हो जाता है।

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जटिल अनुपालन और टैन (TAN) की अनिवार्यता: खरीदारों की मुसीबत

एनआरआई से प्रॉपर्टी खरीदना सिर्फ विक्रेताओं को ही नहीं, बल्कि खरीदारों को भी सिरदर्द देता है। खरीदार को न केवल उच्च दर पर टीडीएस काटना पड़ता है, बल्कि उसे टैन (TAN) नंबर लेना, टैक्स जमा करना और ई-टीडीएस रिटर्न फाइल करना अनिवार्य होता है। इसके विपरीत, रेजिडेंट सेलर के मामले में प्रक्रिया काफी सरल है। एक्सपर्ट्स की मांग है कि सरकार एनआरआई के लिए भी ‘चालान-कम-स्टेटमेंट’ जैसी आसान व्यवस्था लागू करे, ताकि खरीदार और विक्रेता दोनों को कागजी कार्रवाई और कानूनी पेचीदगियों से जल्द राहत मिल सके।

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लो-टैक्स डिडक्शन सर्टिफिकेट: एक कठिन राह

अगर कोई एनआरआई कम टैक्स कटवाना चाहता है, तो उसे आयकर विभाग से ‘लो-टैक्स डिडक्शन सर्टिफिकेट’ लेना पड़ता है। हालांकि, यह प्रक्रिया इतनी जटिल और समय लेने वाली है कि कई बार डील होने तक सर्टिफिकेट मिल ही नहीं पाता। बजट 2026 में उम्मीद की जा रही है कि सरकार इस प्रक्रिया को डिजिटल और समयबद्ध (Time-bound) बनाएगी। नियमों में सरलता आने से एनआरआई को अपना निवेश वापस निकालने (Repatriation) में आसानी होगी, जिससे वे भविष्य में पुनः निवेश के लिए प्रोत्साहित होंगे।

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भारतीय शेयर बाजार को होगा बड़ा फायदा – सिद्धार्थ मौर्य

Vibhavangal Anukulakara Pvt. Ltd. के संस्थापक और प्रबंध निदेशक, सिद्धार्थ मौर्य के अनुसार, यदि सरकार बजट में एनआरआई कर ढांचे में सुधार करती है, तो इससे भारतीय शेयर बाजार और रियल एस्टेट में विदेशी निवेश की बाढ़ आ सकती है। डबल टैक्स रिलीफ और रेमिटेंस संरचनाओं में सरलता से प्रवासी भारतीयों की कर देनदारी कम होगी। यह कदम न केवल एनआरआई की वित्तीय स्थिति को बेहतर बनाएगा, बल्कि भारत के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने और पूंजी बाजार में स्थिरता लाने में भी मील का पत्थर साबित हो सकता है।

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English summary

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