West Bengal SIR: 38.20 लाख अपील में सिर्फ 1.02 लाख का निपटारा, मौजूदा रफ्तार रही तो 16 साल लगने का अनुमान

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PEEYUSH UPADHYAY
पीयुष उपाध्याय एक अनुभवी समाचार संपादक हैं, जो Aware Media Network के लिए देश-दुनिया की प्रमुख खबरों, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग सुनिश्चित करते हैं। उनका अनुभव...
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पश्चिम बंगाल की वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के बाद लंबित अपीलों का आंकड़ा अब बड़ा सवाल बन गया है। चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि कुल 38,20,683 अपील दाखिल हुई हैं, लेकिन इनमें से केवल 1,02,231 मामलों का निपटारा हुआ है। यानी करीब 37.18 लाख अपील अभी लंबित हैं।

38.20 लाख अपीलों में 97 फीसदी से ज्यादा लंबित

चुनाव आयोग के मुताबिक, SIR के बाद मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने से जुड़े फैसलों के खिलाफ 38,20,683 अपील दायर हुईं। इनमें 1,02,231 मामलों का निपटारा हो चुका है, जबकि 37,18,452 मामले अभी बाकी हैं। यानी कुल अपीलों में करीब 97.3 फीसदी मामलों का निपटारा होना बाकी है।

इन मामलों की सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर अपीलीय ट्रिब्यूनल बनाए गए हैं। ये ट्रिब्यूनल अप्रैल 2026 से काम कर रहे हैं।

मौजूदा रफ्तार से 16 साल का गणित कैसे आया?

13 अप्रैल से 18 सितंबर 2026 के बीच करीब 158 दिनों में 1,02,231 अपीलों का निपटारा हुआ। इस आधार पर औसतन लगभग 647 अपील प्रतिदिन निपटाई गईं।

अब अगर 37,18,452 लंबित मामलों को इसी औसत रफ्तार से बांटा जाए, तो करीब 5,750 दिन लगेंगे।

यानी लगभग 15 साल 9 महीने, जिसे आसान भाषा में करीब 16 साल कहा जा सकता है।

हालांकि, यह केवल मौजूदा औसत पर आधारित गणितीय अनुमान है। यह चुनाव आयोग या सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक समयसीमा नहीं है।

जून 2042 तक खत्म होने का अनुमान क्यों?

अगर 18 सितंबर 2026 से हर दिन औसतन 647 अपीलों का निपटारा होता रहे और इस दौरान नए मामलों का दबाव न बढ़े, तो 37.18 लाख मामलों को निपटाने में लगभग 15.75 साल लग सकते हैं।

इस हिसाब से लंबित मामलों का स्टॉक करीब जून 2042 तक खत्म होने का गणितीय अनुमान निकलता है।

लेकिन वास्तविक स्थिति इससे काफी अलग हो सकती है। ट्रिब्यूनलों की संख्या बढ़ सकती है, सुनवाई की गति तेज हो सकती है और कुछ श्रेणियों के मामलों को प्राथमिकता दी जा सकती है।

अपीलों में नाम जोड़ने और हटाने दोनों के मामले

महत्वपूर्ण बात यह है कि 38.20 लाख अपीलों का पूरा ब्योरा अभी स्पष्ट रूप से सामने नहीं आया है। चुनाव आयोग के हलफनामे में नाम हटाए जाने और नाम जोड़े जाने के खिलाफ दाखिल अपीलों का अलग-अलग आंकड़ा नहीं दिया गया है। इस डेटा की कमी को लेकर भी सवाल उठे हैं।

यानी लंबित 37.18 लाख मामलों को एक ही श्रेणी का मानना सही नहीं होगा। किसी मतदाता का नाम हटाए जाने के खिलाफ मामला और किसी तीसरे पक्ष द्वारा किसी नाम को मतदाता सूची में शामिल किए जाने पर आपत्ति—दोनों की प्रकृति अलग हो सकती है।

34 लाख से ज्यादा Form 6 आवेदन भी आए

SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए बड़ी संख्या में Form 6 आवेदन भी दाखिल हुए। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, 17 दिसंबर 2025 से 7 अगस्त 2026 के बीच करीब 34.13 लाख Form 6 आवेदन प्राप्त हुए।

हालांकि, Form 6 आवेदन और 38.20 लाख अपीलें एक ही चीज नहीं हैं। Form 6 मुख्य रूप से मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जबकि अपीलें SIR के दौरान लिए गए फैसलों के खिलाफ दाखिल की गई हैं।

कुछ मामलों में नाम दोबारा जोड़ने के आदेश

SIR से जुड़े पहले निपटाए गए मामलों के आंकड़े भी इस प्रक्रिया को समझने में अहम हैं। Indian Express की एक रिपोर्ट के मुताबिक, निपटाए गए मामलों में 91.13 फीसदी मामलों में नाम दोबारा मतदाता सूची में जोड़े गए, जबकि 8.86 फीसदी मामलों में नाम हटाए जाने का फैसला बरकरार रहा। यह आंकड़ा उस समय तक निपटाए गए मामलों से संबंधित है, पूरे 38.20 लाख मामलों से नहीं।

इससे यह भी स्पष्ट होता है कि लंबित मामलों की संख्या के साथ-साथ उनके स्वरूप और निपटारे के परिणाम को देखना भी जरूरी है।

सुप्रीम कोर्ट ने समयबद्ध निपटारे पर मांगी जानकारी

सुप्रीम कोर्ट पहले ही चुनाव आयोग से SIR से जुड़ी अपीलों की संख्या, उनके निपटारे और लंबित मामलों को लेकर जानकारी मांग चुका है। अदालत के सामने यह सवाल भी आया कि व्यवस्था को तेज करने के लिए अतिरिक्त ट्रिब्यूनल या दूसरे कदमों की जरूरत है या नहीं।

अब चुनाव आयोग के ताजा आंकड़ों ने पेंडेंसी की वास्तविक तस्वीर सामने रख दी है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ट्रिब्यूनल इन मामलों के निपटारे की रफ्तार कितनी बढ़ा पाते हैं।

पश्चिम बंगाल SIR के बाद 37.18 लाख से ज्यादा लंबित अपीलें चुनाव आयोग और अदालत के सामने बड़ी प्रशासनिक चुनौती हैं। मौजूदा रफ्तार के आधार पर 16 साल वाला आंकड़ा केवल गणितीय अनुमान है, लेकिन यह जरूर दिखाता है कि लंबित मामलों के निपटारे की गति बढ़ाना महत्वपूर्ण होगा।


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पीयुष उपाध्याय एक अनुभवी समाचार संपादक हैं, जो Aware Media Network के लिए देश-दुनिया की प्रमुख खबरों, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग सुनिश्चित करते हैं। उनका अनुभव पत्रकारिता में 7+ वर्षों का है और वे निष्पक्ष, भरोसेमंद और समय पर समाचार प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कई पुरस्कार और मान्यता प्राप्त की है, जिनमें 2022 में “Best Investigative Journalist” और 2021 में “Top 10 Editors in Uttarakhand” शामिल हैं।
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