संघ की क्षमा और राष्ट्र प्रेम: एक विचार-विमर्श
दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति, प्रो. योगेश सिंह, ने एक महत्वपूर्ण विचार प्रस्तुत करते हुए कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अपने विरोधियों और शत्रुओं को अनेक बार क्षमा किया है, परंतु राष्ट्र के विरोधियों और शत्रुओं को कभी क्षमा नहीं किया। यह बात उन्होंने इंद्रप्रस्थ साहित्य भारती द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में पीजीडीएवी महाविद्यालय में आयोजित दो दिवसीय समग्र संघ साहित्य परिचर्चा के उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता करते हुए कही।
प्रो. सिंह ने इस वर्ष संघ के सौ वर्ष पूरे होने के महत्व पर प्रकाश डाला और इसे संघ साहित्य पर परिचर्चा के लिए एक उपयुक्त और अनुकूल समय बताया। उन्होंने जोर देकर कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ केवल व्यक्तियों का समूह नहीं, बल्कि एक विचार है, और इस विचार से जुड़ने पर मन में कभी निराशा नहीं आती। संघ व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण के ध्येय को लेकर कार्य करता है।
मुख्य अतिथि के रूप में, केंद्रीय विश्वविद्यालय, सागर के पूर्व कुलाधिपति डॉ. बलवंत जानी ने कहा कि वर्तमान राष्ट्रीय शिक्षा नीति और भारतीय ज्ञान परंपरा पर हो रही चर्चाओं के कारण संघ साहित्य को अब मान्यता मिल रही है।
सुरुचि प्रकाशन के अध्यक्ष, श्री राजीव तुली, ने विशिष्ट अतिथि के रूप में अपने विचार साझा करते हुए कहा कि संघ का निर्माण ऐसे लोगों ने किया है जो कभी रुके नहीं, टूटे नहीं, झुके नहीं और बिके नहीं। उन्होंने यह भी बताया कि सुरुचि प्रकाशन राष्ट्रीय साहित्य के प्रकाशन का महती कार्य कर रहा है।
कार्यक्रम की प्रस्तावना रखते हुए, इंद्रप्रस्थ साहित्य भारती के अध्यक्ष डॉ. अवनिजेश अवस्थी ने बताया कि लोगों तक संघ के बारे में प्रामाणिक जानकारी पहुंचाने के उद्देश्य से इस समग्र संघ साहित्य परिचर्चा का आयोजन किया गया है। उद्घाटन सत्र का संचालन इंद्रप्रस्थ साहित्य भारती के महामंत्री संजीव सिन्हा ने किया, और धन्यवाद ज्ञापन कार्यक्रम संयोजक प्रो. ममता वालिया ने दिया।
इस अवसर पर अखिल भारतीय साहित्य परिषद् के राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री श्री मनोज कुमार, राष्ट्रीय मंत्री प्रो. नीलम राठी एवं श्री प्रवीण आर्य, पीजीडीएवी महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. दरविंदर कुमार, इंद्रप्रस्थ साहित्य भारती के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. विनोद बब्बर, उपाध्यक्ष मनोज शर्मा, मंत्री नीलम भागी, सुनीता बुग्गा, राकेश कुमार, कोषाध्यक्ष अक्षय अग्रवाल, डॉ. रजनी मान, सारिका कालरा सहित बड़ी संख्या में साहित्यकार और छात्र उपस्थित रहे।
उद्घाटन सत्र के उपरांत, प्रथम सत्र में साहित्यकारों, प्राध्यापकों और शोधार्थियों ने राष्ट्र, भारतबोध, धर्म और संस्कृति, हिंदुत्व, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, कार्यकर्ता निर्माण, संघ और स्वतंत्रता आंदोलन, संघ और सामाजिक समरसता, पर्यावरण, कुटुंब व्यवस्था, नारीशक्ति, शिक्षा जैसे अनेक विषयों से संबंधित संघ विचारकों द्वारा लिखित पुस्तकों के सार प्रस्तुत किए। इस सत्र का संचालन कार्यक्रम सह संयोजक डॉ. मलखान सिंह ने किया।
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